संपादकीय

गुरू बिन कुछ भी ज्ञान न होए

प्राचीन काल से ही गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा करने का चलन है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 13 जुलाई को मनाई जा रही है। दरअसल प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। गुरु पूर्णिमा का संबंध महाभारत के रचयिता महर्षि श्रीकृष्ण द्वैपायन से जुड़ा है, जिनका जन्म इसी दिन हुआ माना जाता है। …

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पर्यावरण के लिए भी समस्या बन रही बढ़ती आबादी

पूरी दुनिया की आबादी इस समय करीब 7.7 अरब है, जिसमें सबसे ज्यादा चीन की आबादी 1.45 अरब है जबकि भारत आबादी के मामले में 1.4 अरब जनसंख्या के साथ विश्व में दूसरे स्थान पर है। विश्व की कुल आबादी में से करीब 18 फीसदी लोग भारत में रहते हैं और दुनिया के हर 6 नागरिकों में से एक भारतीय …

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वर्तमान में आम इंसान की परेशानियां

आज आम इंसान के हालातों पर रोटी कपड़ा और मकान फि़ल्म के गानें की चंद पंक्तियाँ याद आ रही है,गरीब को तो बच्चे की पढ़ाई मार गईबेटी की शादी और सगाई मार गईकिसी को तो रोटी की कमाई मार गईकपड़े की किसी को सिलाई मार गईकिसी को मकान की बनवाई मार गईबाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गईआज देश बहुत …

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स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!

हम सभी को आम तौर पर माता-पिता, शिक्षकों, मालिकों और अन्य से स्वीकृति लेने को कहा जाता है! कभी-कभी उनकी स्वीकृति प्राप्त करना सामान्य और स्वस्थ होता है, लेकिन हर समय दूसरों से स्वीकृति प्राप्त करना हमको दुखी और असुरक्षित बना सकता है। हमें दूसरों से अत्यधिक अनुमोदन प्राप्त करना बंद करना चाहिए और हम कौन हैं और हमको इस …

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छत्तीसगढ़ इलेक्टि्रक वाहन नीति-2022 के परिदृश्य

आज कल सड़को पर दौड़ती हरे नम्बर प्लेट्स वाले मोटर व्हीकल नये यातायात के युग की ओर इशारा कर रहे हैं। यह एक ऐसा वाहन है जो प्रणोदन के लिए एक या अधिक इलेक्टि्रक मोटर का उपयोग करता है। इसे एक कलेक्टर सिस्टम द्वारा संचालित किया जा सकता है, अतिरिक्त स्रोतों से बिजली के साथ , या इसे बैटरी द्वारा …

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आखिर राजनीतिक लड़ाई में कब तक जलती रहेगी देश की संपत्ति?

लोकतंत्र-राजनीतिक विद्वेषऔर जलता देश, आखिर विरोध में किस की संपत्ति जली बीजेपी की या कांग्रेस की?विरोध के दौरान देश की संपत्ति अन्य लोगों की संपत्ति को जलाना कहा तक उचित है?क्या देश की संपत्ति जलाने से विरोध प्रकट होगा क्या विरोध करना संपत्ति जलाना है?उनका क्या कसूर जिन्होंने बड़ी मेहनत से अपनी गाड़ी खरीदी थी जिसे विरोधियों ने फूंक दिया …

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क्या जनता भी विकास प्रेमी ना होकर पार्टी प्रेमी हो गयी है?

सरकार के विरुद्ध धरने पर सरकार, जनता कर रही अपनी बारी का इंतजार।भारतीय राजनीति के व्यवसाय में निवेश के समान है (वोट डालते हुए) इससे जुड़े जोखिमों को ध्यानपूर्वक समझ लें। निवेश का लॉक-इन पीरियड 5 साल का है कोई जरूरी नहीं है कि राजनीतिक कंपनियां ‘रिटर्न’ के जो वादे कर रही हैं, वो सही हो। आपके निवेश (वोट) पर …

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बुनियादी आवश्यकताओं के बिना स्कूल आने वाला छात्र कितना आगे बढ़ पाएगा?

दिमाग के एक कोने में सालभर की स्कूल की फीस एवं वाहन की फीस की चिंता भी होगी।सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के पालक अपने बच्चों के बस्ते को खोलकर देखते भी नहीं, आखिर क्यों ?स्कूल आ पढ़े बर, जिंदगी ला गढ़े बर। आशीष जायसवाल शिक्षक। कल से स्कूल खुल गए खर्चा कर प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों …

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क्या कानून का डर अब लोगों के मन मे नहीं बचा है?

क्या लोग कानून से डरना नहीं उसे खरीदना चाहते हैं?कानून सत्ताधारियों व पैसे वालों के कब्जे में हो गया है क्या?क्या सत्ताधारी व रसूखदारों के अनुसार ही चलेगा देश का कानून?क्या कानून को खुद रक्षा की जरूरत है क्योंकि कानून भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि कानून को मानने कोई तैयार नहीं है? -:रवि सिंह कटकोना कोरिया छत्तीसगढ़:- कानून शब्द कहने …

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इंसान के मन में ही पर्यावरण का दुश्मन है

पेड़ पौधों के लिए किसी को चिंतित नहीं जितना पेट्रोल के दाम बढ़ने से दिखते हैं।जब अपने देश में पर्यावरण दिवस अता है तब हमें महत्व याद अता ऐसा क्यों?पर्यावरण दिवस के दिन से पर्यावरण और ज्यादा विपन्न होता है। आज पूरे दिन पर्यावरण दिवस पर बधाई का तांता लगा रहा। मोबाइल के मेमोरी छोटे बड़े-पेड़ पौधों से भर गई। …

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