जब भी आप किसी चीज से जकड़ जाते हैं तो उससे आपको मोह पैदा होता है इसलिए कई राजा या किसी देश के प्रमुख अपना पद छोड़ना नहीं चाहते हैं और यही आपके कष्ट का सबसे बड़ा कारण है। भगवान राम पिता की आज्ञा पर जब सबकुछ त्याग कर 14वर्ष का वनवास धारण किया तो उन्हें ध्यान करने का अवसर …
Read More »संपादकीय
लेख@ जोत-जँवारा अउ देवता-धामी
जोत जलाय के परब चइत अउ कुँवार महीना मा आथे। जोत अउ जावरा मा अंतर हाबे, एक खाली जोत अउ दुसर जोत के संग मा जँवारा।जोत ल बाहिर के देवी-देवता ल परसन करे बर जलाय जाथे अउ जोत -जँवारा ल अपन कुल के देवी-देवता ला भूल-चूक ल छिमा करे बर अर्जी -बिनती कर जलाय जाथे। एक जोत जँवारा गाँव के …
Read More »लेख@ कुआँ सूखने पर ही पता चलता है पानी की कीमत
कहावत जब तक कुआँ सूख नहीं जाता, हमें पानी की कीमत का पता नहीं चलता हमें इस बात की याद दिलाती है कि हमें अपने जीवन और संसाधनों के प्रति जागरूक और कृतज्ञ रहना चाहिए। चाहे वह जल हो, प्रेम हो, स्वतंत्रता हो या स्वास्थ्य, हमें इनका सम्मान और संरक्षण करना चाहिए ताकि आने वाली पीढि़यों के लिए वे उपलब्ध …
Read More »लेख@ कैसे रूक पायेगा राजनीति में बढ़ता अपराधीकरण
हमारे देश के राजनेताओं में दिन-प्रतिदिन नैतिकता कम होती जा रही है। कई बड़े नेता आए दिन विवादास्पद बयान देखकर चर्चाओं में बने रहते हैं। वहीं बहुत से निर्वाचित विधायकों, सांसदों, मंत्रियों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों पर अपराधिक मामले दर्ज हो रहें हैं। जिससे राजनीति के क्षेत्र में काम करने वालों की छवि खराब होती जा रही है। देश की राजनीति …
Read More »लेख @ अस्पतालों में बिना जरूरत के बढ़ते सीजेरियन
यह सच है कि कुछ निजी अस्पताल अधिक मुनाफे के लिए अनावश्यक सीज़ेरियन कर रहे हैं, लेकिन सभी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। समाधान के लिए महिलाओं की जागरूकता,डॉक्टरों की नैतिक जिम्मेदारी और सरकारी नियमों की ज़रूरत है। कुछ सवाल है जिनके जवाब सबको मिलकर ढूँढने ज़रूरी है? क्या यह महिलाओं की ज़रूरत के हिसाब से बढ़ा है या …
Read More »लेख@ स्वदेशी ज्ञान:रोजगार का आधार और आर्थिक विकास का मूलमंत्र
हमारे देश में हजारों सालों से परंपरागत स्वदेशी ज्ञान की अविरल धारा बहती आ रही है। हमारे पुरखों ने कृषि, औषधि, वास्तु,हस्तशिल्प,योग और पर्यावरण संतुलन जैसे विविध क्षेत्रों में अद्वितीय ज्ञान विकसित किया था,वह ज्ञान आज भी प्रासंगिक है। यदि मौजूदा संदर्भ में इन परंपराओं को पुनर्जीवित किया जाए तो इससे बेरोजगारी और आर्थिक संकट जैसी गंभीर समस्याओं का समाधान …
Read More »विश्व रंगमंच दिवस पर विशेष@ रंगमंच को संवारने के संकल्प का दिन
नाटक दर्शकों को प्रेम, रहस्य, रोमांच,हर्ष,खुशी,आत्मीयता और सौंदर्य की उस ऊंचाई पर ले जाता है जहां वे कल्पना लोक में विचरण कर रहे होते हैं जो खुरदुरे पठारी यथार्थ से परे एक अलग दुनिया होती है। नाटक के मंचन से उद्भूत रस प्रेक्षागृह में उपस्थित दर्शकों को आत्मानंद की प्राप्ति कराने में समर्थ होता है, इसीलिए नाट्य रस को परमानंद …
Read More »लेख@ सजग रहे जीवन मे आने वाले पलों के लिए
मनोबल हमेशा ऊंचा ही रखियेजीवन में कठिन परिस्थितियों कभी बता कर नहीं आतीं हैं, इसीलिए मनुष्य को हर कठिन तथा विषम परिस्थिति के लिए सदैव सजग तथा सावधान रहने की आवश्यकता है। खुशियां तथा अवसाद हर मनुष्य के जीवन के दो पहलू हैं अब यह आप पर निर्भर है कि आप इन परिस्थितियों को किस तरह अपने जीवन में आत्मसात …
Read More »लेख@ व्यक्तिगत डायरी लिखना कहां तक उचित है,स्वयं सोचें
अपनी डायरी लिखना एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। डायरी वास्तव में एक चुनौती है,जो हमें अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करती है। यह एक भरोसा है, जो हमें अपने आप को समझने और अपने जीवन को बेहतर बनाने में मदद करती है।डायरी के अल्फ़ाज़ वास्तव में अनमोल हो सकते हैं।जो हमारे …
Read More »लेख@ पेंशन की लड़ाई:कर्मचारियों का हक या सरकारी बोझ?
भारत में 2004 से पहले सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन दी जाती थी। इसके तहत—सेवानिवृत्ति के बाद आजीवन निश्चित पेंशन मिलती थी। अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में दिया जाता था। महंगाई भत्ता जुड़ा होता था, जिससे समय-समय पर पेंशन बढ़ती रहती थी। सरकार द्वारा पूरी फंडिंग होती थी, कर्मचारी का योगदान नहीं …
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