हम सभी को आम तौर पर माता-पिता, शिक्षकों, मालिकों और अन्य से स्वीकृति लेने को कहा जाता है! कभी-कभी उनकी स्वीकृति प्राप्त करना सामान्य और स्वस्थ होता है, लेकिन हर समय दूसरों से स्वीकृति प्राप्त करना हमको दुखी और असुरक्षित बना सकता है। हमें दूसरों से अत्यधिक अनुमोदन प्राप्त करना बंद करना चाहिए और हम कौन हैं और हमको इस …
Read More »संपादकीय
छत्तीसगढ़ इलेक्टि्रक वाहन नीति-2022 के परिदृश्य
आज कल सड़को पर दौड़ती हरे नम्बर प्लेट्स वाले मोटर व्हीकल नये यातायात के युग की ओर इशारा कर रहे हैं। यह एक ऐसा वाहन है जो प्रणोदन के लिए एक या अधिक इलेक्टि्रक मोटर का उपयोग करता है। इसे एक कलेक्टर सिस्टम द्वारा संचालित किया जा सकता है, अतिरिक्त स्रोतों से बिजली के साथ , या इसे बैटरी द्वारा …
Read More »आखिर राजनीतिक लड़ाई में कब तक जलती रहेगी देश की संपत्ति?
लोकतंत्र-राजनीतिक विद्वेषऔर जलता देश, आखिर विरोध में किस की संपत्ति जली बीजेपी की या कांग्रेस की?विरोध के दौरान देश की संपत्ति अन्य लोगों की संपत्ति को जलाना कहा तक उचित है?क्या देश की संपत्ति जलाने से विरोध प्रकट होगा क्या विरोध करना संपत्ति जलाना है?उनका क्या कसूर जिन्होंने बड़ी मेहनत से अपनी गाड़ी खरीदी थी जिसे विरोधियों ने फूंक दिया …
Read More »क्या जनता भी विकास प्रेमी ना होकर पार्टी प्रेमी हो गयी है?
सरकार के विरुद्ध धरने पर सरकार, जनता कर रही अपनी बारी का इंतजार।भारतीय राजनीति के व्यवसाय में निवेश के समान है (वोट डालते हुए) इससे जुड़े जोखिमों को ध्यानपूर्वक समझ लें। निवेश का लॉक-इन पीरियड 5 साल का है कोई जरूरी नहीं है कि राजनीतिक कंपनियां ‘रिटर्न’ के जो वादे कर रही हैं, वो सही हो। आपके निवेश (वोट) पर …
Read More »बुनियादी आवश्यकताओं के बिना स्कूल आने वाला छात्र कितना आगे बढ़ पाएगा?
दिमाग के एक कोने में सालभर की स्कूल की फीस एवं वाहन की फीस की चिंता भी होगी।सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के पालक अपने बच्चों के बस्ते को खोलकर देखते भी नहीं, आखिर क्यों ?स्कूल आ पढ़े बर, जिंदगी ला गढ़े बर। आशीष जायसवाल शिक्षक। कल से स्कूल खुल गए खर्चा कर प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों …
Read More »क्या कानून का डर अब लोगों के मन मे नहीं बचा है?
क्या लोग कानून से डरना नहीं उसे खरीदना चाहते हैं?कानून सत्ताधारियों व पैसे वालों के कब्जे में हो गया है क्या?क्या सत्ताधारी व रसूखदारों के अनुसार ही चलेगा देश का कानून?क्या कानून को खुद रक्षा की जरूरत है क्योंकि कानून भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि कानून को मानने कोई तैयार नहीं है? -:रवि सिंह कटकोना कोरिया छत्तीसगढ़:- कानून शब्द कहने …
Read More »इंसान के मन में ही पर्यावरण का दुश्मन है
पेड़ पौधों के लिए किसी को चिंतित नहीं जितना पेट्रोल के दाम बढ़ने से दिखते हैं।जब अपने देश में पर्यावरण दिवस अता है तब हमें महत्व याद अता ऐसा क्यों?पर्यावरण दिवस के दिन से पर्यावरण और ज्यादा विपन्न होता है। आज पूरे दिन पर्यावरण दिवस पर बधाई का तांता लगा रहा। मोबाइल के मेमोरी छोटे बड़े-पेड़ पौधों से भर गई। …
Read More »पत्रकार विपक्ष की भूमिका में झेल रहें हैं सत्तापक्ष का एफआईआर वाला प्रहार
जनता से रिश्ता सरकार व लोकतंत्र के चौथे स्तंभ दोनों का पर निर्भर है सिर्फ एकजनता से रिश्ता सरकार व लोकतंत्र के चौथे स्तंभ दोनों का पर निर्भर है सिर्फ एकसत्ता और सत्ता पाकर ठेकेदारी करने वाले नेताओं से जनता है परेशानचुनाव पैसों के दमपर लड़ना है इसलिए जारी है केवल कमाई का अभियानउपलब्धियों और जनसरोकारों से अब नेताओं को …
Read More »विश्व शांति का अर्ध सत्य एक आदर्श
स्थिति की मनोकामना विश्व शांति की अवधारणा, इच्छा और उस स्थिति को स्थापित करने के प्रयास सुखद अनुभूति देते हैं। विश्व शांति सदैव मानव की एक ऐसी आदर्श स्थिति की मनोकामना है, जिसमें वह अपनी संपूर्ण स्वतंत्रता, रचनात्मकता और प्रफुल्लता के साथ जीवन यापन कर सके। विश्व शांति एक विचार है, जिसमें समाहित हैं अहिंसा, सभी देशों में आपसी सहयोग, …
Read More »अमीर-गरीब के बीच बढ़ती खाई
अमीर और गरीब के बीच पहले से ही भारी असमानता रही है, लेकिन कोरोना ने इसे और बढ़ा दिया है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा किये गये अखिल भारतीय ऋण और निवेश सर्वेक्षण की हालिया रिपोर्ट के अनुसार अमीर और गरीब के बीच खाई गहरी होती जा रही है. यह तथ्य कोई नया नहीं है और न ही चौंकाता है. …
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