हमारे देश के राजनेताओं में दिन-प्रतिदिन नैतिकता कम होती जा रही है। कई बड़े नेता आए दिन विवादास्पद बयान देखकर चर्चाओं में बने रहते हैं। वहीं बहुत से निर्वाचित विधायकों, सांसदों, मंत्रियों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों पर अपराधिक मामले दर्ज हो रहें हैं। जिससे राजनीति के क्षेत्र में काम करने वालों की छवि खराब होती जा रही है। देश की राजनीति …
Read More »संपादकीय
लेख @ अस्पतालों में बिना जरूरत के बढ़ते सीजेरियन
यह सच है कि कुछ निजी अस्पताल अधिक मुनाफे के लिए अनावश्यक सीज़ेरियन कर रहे हैं, लेकिन सभी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। समाधान के लिए महिलाओं की जागरूकता,डॉक्टरों की नैतिक जिम्मेदारी और सरकारी नियमों की ज़रूरत है। कुछ सवाल है जिनके जवाब सबको मिलकर ढूँढने ज़रूरी है? क्या यह महिलाओं की ज़रूरत के हिसाब से बढ़ा है या …
Read More »लेख@ स्वदेशी ज्ञान:रोजगार का आधार और आर्थिक विकास का मूलमंत्र
हमारे देश में हजारों सालों से परंपरागत स्वदेशी ज्ञान की अविरल धारा बहती आ रही है। हमारे पुरखों ने कृषि, औषधि, वास्तु,हस्तशिल्प,योग और पर्यावरण संतुलन जैसे विविध क्षेत्रों में अद्वितीय ज्ञान विकसित किया था,वह ज्ञान आज भी प्रासंगिक है। यदि मौजूदा संदर्भ में इन परंपराओं को पुनर्जीवित किया जाए तो इससे बेरोजगारी और आर्थिक संकट जैसी गंभीर समस्याओं का समाधान …
Read More »विश्व रंगमंच दिवस पर विशेष@ रंगमंच को संवारने के संकल्प का दिन
नाटक दर्शकों को प्रेम, रहस्य, रोमांच,हर्ष,खुशी,आत्मीयता और सौंदर्य की उस ऊंचाई पर ले जाता है जहां वे कल्पना लोक में विचरण कर रहे होते हैं जो खुरदुरे पठारी यथार्थ से परे एक अलग दुनिया होती है। नाटक के मंचन से उद्भूत रस प्रेक्षागृह में उपस्थित दर्शकों को आत्मानंद की प्राप्ति कराने में समर्थ होता है, इसीलिए नाट्य रस को परमानंद …
Read More »लेख@ सजग रहे जीवन मे आने वाले पलों के लिए
मनोबल हमेशा ऊंचा ही रखियेजीवन में कठिन परिस्थितियों कभी बता कर नहीं आतीं हैं, इसीलिए मनुष्य को हर कठिन तथा विषम परिस्थिति के लिए सदैव सजग तथा सावधान रहने की आवश्यकता है। खुशियां तथा अवसाद हर मनुष्य के जीवन के दो पहलू हैं अब यह आप पर निर्भर है कि आप इन परिस्थितियों को किस तरह अपने जीवन में आत्मसात …
Read More »लेख@ व्यक्तिगत डायरी लिखना कहां तक उचित है,स्वयं सोचें
अपनी डायरी लिखना एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। डायरी वास्तव में एक चुनौती है,जो हमें अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करती है। यह एक भरोसा है, जो हमें अपने आप को समझने और अपने जीवन को बेहतर बनाने में मदद करती है।डायरी के अल्फ़ाज़ वास्तव में अनमोल हो सकते हैं।जो हमारे …
Read More »लेख@ पेंशन की लड़ाई:कर्मचारियों का हक या सरकारी बोझ?
भारत में 2004 से पहले सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन दी जाती थी। इसके तहत—सेवानिवृत्ति के बाद आजीवन निश्चित पेंशन मिलती थी। अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में दिया जाता था। महंगाई भत्ता जुड़ा होता था, जिससे समय-समय पर पेंशन बढ़ती रहती थी। सरकार द्वारा पूरी फंडिंग होती थी, कर्मचारी का योगदान नहीं …
Read More »@बलिदान दिवस पर विशेष @ गणेश शंकर विद्यार्थी:पत्रकारिता का गौरवमय किरीट
अंग्रेजी शासन से मुक्ति और स्वराज्य प्राप्ति के लिए 1857 से आरम्भ हुआ स्वाधीनता संघर्ष 1947 में पूर्ण हुआ। इस यात्रा में देश के विविध क्षेत्रों से हजारों नर-नारियों ने योगदान दिया है। अपना सर्वस्व समर्पण करके मां भारती के गौरव एवं गरिमा में वृद्धि की है। भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में समाज जागरण करते हुए राष्ट्रीय एकात्मकता का भाव …
Read More »लेख@ शादी के बाद करियर:उड़ान या उलझन?
परिवारों को यह समझना होगा कि शादी का मतलब महिलाओं के करियर का अंत नहीं होता। पुरुषों को घर और बच्चों की जिम्मेदारी में बराबर भागीदारी निभानी चाहिए। कंपनियों को महिलाओं के लिए अधिक फ्लेक्सिबल जॉब ऑप्शंस देने चाहिए। करियर और शादी को विरोधी ध्रुवों की तरह देखने की बजाय उन्हें साथ ले चलने की जरूरत है। पुरुषों को भी …
Read More »लेख @हमारी सोच से आगे महिलाएं वैचारिकता बदलनें की दरकार
निश्चित तौर पर भारत में महिलाओं की मुक्ति तथा सशक्तिकरण का प्रश्न स्वतंत्रता एवं भारत की मुक्ति के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ गया है। निश्चित तौर पर हर रात की सुबह होती है, और सुबह चमकदार और उजाले से भरपूर होती है। स्वतंत्र काल से जुड़ी हुई महिला सशक्तिकरण की यात्रा आज तक अनवरत जारी है। अब महिलाओं को …
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