संपादकीय

लेख@ पास/फेल की बजाय समग्र विकास/जीवन कौशल की नीतियां बनाएं

नो डिटेंशन पॉलिसी के तहत कक्षा 1 से 8 तक के किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जा सकता था। हालांकि अब इन छात्रों को फेल किया जा सकेगा। साथ ही फेल छात्रों को 2 महीने के भीतर फिर से परीक्षा का अवसर मिलेगा। अगर इसमें भी फेल होते हैं तो उन्हें अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा। …

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@सावित्रीबाई फु लेःजन्मदिन पर विशेष@बालिका शिक्षा एवं स्वावलंबन को समर्पित जीवन

आज से डेढ़-दो सौ वर्ष पहले देश में महिलाओं के लिए विद्यालयों के द्वार लगभग बंद थे। महिलाओं का घर-गृहस्थी एवं चूल्हा-चौका में कुशल होना ही पर्याप्त था। ऐसे समय में सावित्रीबाई फुले ने स्वयं शिक्षित हो महिलाओं के लिए न केवल शिक्षा-स्वावलम्बन के रास्ते खोले बल्कि उनको सामाजिक प्रतिष्ठा भी दिलाई। 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले …

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लेख@ आओ,नव वर्ष पर विकसित भारत बनाने का संकल्प लें

हमने कई मौकों पर अपने सपने को टूटते हुए देखा है लेकिन फिर भी हम हर मुसीबत की स्थिति से मजबूत और आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। स्वराज के महत्व को समझना चाहिए और इन सपनों को आगे बढ़ाने के लिए आक्रामक रूप से शुरुआत करनी चाहिए ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को भी बेहतर भविष्य प्रदान कर सकें। …

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लेख@ आओ नव वर्ष संकल्प करें…

संसार के अनेक देशों की तरह भारत में भी हर बार नया साल बहुत उत्साह ,मस्ती तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है! नए वर्ष पर पहले तो ग्रीटिंग कार्ड का आदान-प्रदान होता था ,आजकल एसएमएस का आदान-प्रदान होने लगा है! नए साल के जशन मनाए जाते हैं! लोग परिवार के सदस्यों के साथ महंगे महंगे होटलों में नाच गाने …

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लेख@ नया वर्ष स्ति्रयों के अधिकारों और सम्मान का वर्ष हो

@ महिलाओं को सशक्त, सक्षम बनाया जाएनव वर्ष 2025 के आगमन पर केवल शुभकामनाओं और बधाइयों के संदेश का आदान-प्रदान और उत्सव ना होकर नया वर्ष स्ति्रयों के संपूर्ण सम्मान तथा वास्तविक अधिकार देने का वर्ष होना चाहिए। नव वर्ष में स्त्री,बच्चों तथा बुजुर्गों के लिए एक महती कार्य योजना तैयार कर उनका संरक्षण तथा उन्नयन निश्चित होना चाहिए। भारतीय …

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लेख@आजादी के बाद भी भारत में है गरीबी

किसी देश को विकसित कब माना जाता है? यह देश की समृद्धि, उसके लोगों की खुशहाली और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी स्थिति से तय होता है। और, कोई देश कितना समृद्ध है, यह उसके ‘जीएनपी’ यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से तय होता है। ‘डीपी’ यानी कुल घरेलू उत्पाद, भुगतान संतुलन, विदेशी मुद्रा-मुद्रा भंडार, आर्थिक विकास दर, जीडीपी आदि। इसके …

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लेख@ नववर्ष का 365 नए अवसर, जीवन को नई राह देने का वक्त

घड़ी की सुइयाँ जैसे ही बारह पर पहुंचती हैं, एक पल ठहर जाता है। आसमान रंग बिरंगी रोशनी से जगमगा उठता है, और हमारे भीतर कहीं एक नन्हीं सी चिंगारी जलने लगती है कुछ नया करने की, कुछ अलग जीने की। नववर्ष सिर्फ तारीख बदलने का नाम नहीं है यह उस दरवाजे के खुलने जैसा है, जिसके पीछे अनगिनत संभावनाएँ …

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लेख@ 2025 में कैसा रहेगा राजनीतिक मतभेदों का पारा

2025 में भारत का राजनीतिक पटल गरमा गरम रहेगा। दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों के साथ-साथ बीएमसी के चुनाव भी होंगे। कांग्रेस संगठनात्मक बदलावों पर ध्यान केंद्रित करेगी, जबकि भाजपा और संघ अपने 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में बड़े आयोजन करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 75 वर्ष के हो जाएंगे और भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मिलेगा। 2024 भारतीय …

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लेख@ भागवत को क्यों दी जा रही है धर्म गुरु नहीं बनने की नसीहत

अपना देश एक रंग बिरंगे गुलदस्ते की तरह है। अनेकता में एकता जिसकी शक्ति है। यहां विभिन्न धर्म और उनकी अलग-अलग पूजा पद्धति देखने को मिलती है तो देश का सामाजिक और जातीय ताना बाना भी काफी बंटा हुआ हुआ है। ऐसे में किसी भी मुद्दे पर किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से पूर्व सौ बार उसके बारे में सोचना …

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@ जन्म दिन पर आज विशेष @महान फ्र ांसीसी रसायनज्ञःलुई पाश्चर

लुई पाश्चर का जन्म 27 दिसंबर, 1822, डोल, फ्रांस – एक फ्रांसीसी रसायनज्ञ और सूक्ष्म जीवविज्ञानी थे, जो चिकित्सा सूक्ष्म जीव विज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण संस्थापकों में से एक थे। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और चिकित्सा में पाश्चर का योगदान लगभग बेजोड़ है। उन्होंने आणविक विषमता के अध्ययन का बीड़ा उठाया; पाया कि सूक्ष्मजीव किण्वन और बीमारी का कारण बनते हैं; पाश्चराइजेशन …

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