लचर व्यवस्था से जूझ रहा जिला, जनता हो रही परेशान
प्रभारी कलेक्टर ने कहा कि-कर रहे हैं पत्राचार
-अरविंद द्विवेदी-
अनूपपुर ,15 जुलाई 2023 ( ए)। आदिवासी बाहुल जिले अनुपपुर में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा तमाम योजनाएं तो संचालित की जाती हैं लेकिन योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए विभागीय अधिकारियों की ही पदस्थापना नहीं की जाती।वही जिले से प्रदेश सरकार में खाद्य मंत्री खासा दखल रखते हैं बाबजूद इसके अनुपपुर जिला प्रभारियों के भरोसे विकास को टटोल रहा है इतना ही नहीं लगातार प्रदेश सरकार को इस स्थिति से अवगत भी कराया जाता रहा है किंतु सरकार इस आदिवासी जिले की उपेक्षा करती आ रही है आलम यह है कि जिले में दर्जनो जिला कार्यालय प्रभारियों के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं, वहीं विभाग प्रमुख न होने से विभागीय काम बुरी तरह प्रभावित होते हैं। जिले में अपर कलेक्टर से लेकर तहसीलदार तक के पद भी खाली हैं। ऐसे में शासन की योजनाओं को बेहतर ढंग से क्रियान्वित कराना कलेक्टर के समक्ष भी बड़ी चुनौती है। कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे विभाग दिशा निर्देश आने वाले अधिकारी की कमी से भी जूझ रहे हैं।
लंबे समय से नहीं हुई पदस्थापना
जिले में अपर कलेक्टर के साथ ही तहसीलदार साथ ही उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, जिला रोजगार अधिकारी, जिला श्रम अधिकारी, परियोजना प्रशासक एकीकृत आदिवासी विकास, उपसंचालक सामाजिक न्याय, कार्यपालन यंत्री नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, जिला परिवहन अधिकारी, कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग प्रभारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। जबकि इन पदों की पदस्थापना लंबे समय से नहीं हो पाई है।
जिम्मेदारी तय नहीं,कामकाज भी प्रभावित
जिले में कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग पीआइयू, सहायक आयुक्त सहकारिता, अधीक्षक भू-अभिलेख, तहसीलदार, परियोजना अधिकारी, जिला शहरी विकास प्राधिकरण का पद भी खाली है। राजस्व विभाग में भी प्रभारियों के भरोसे काम लिया जा रहा है। बताया गया कि महत्वपूर्ण विभागों में अधिकारियों की पदस्थापना न होने से जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती और कामकाज भी प्रभावित होता है।
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कई महत्वपूर्ण विभाग प्रभारियों के हवाले
जिले में तहसीलदार के 4 पद स्वीकृत हैं जिसमें 3 रिक्त होने के कारण प्रभार में हैं। वहीं जिले में नायब तहसीलदार के 9 पद स्वीकृत हैं जिसमें 3 अब भी रिक्त हैं। साथ ही अपर कलेक्टर, सहायक आयुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी, जैसे महत्वपूर्ण पद के साथ ही मछली विभाग, जनसंपर्क विभाग, सांख्यिकी विभाग, खाद्य विभाग, श्रम विभाग, डूडा, ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा विभाग रिक्त, जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग प्रभारियों के भरोसे जैसे-तैसे चल रहे हैं।
अतिरिक्त प्रभार से जूझ रहे अधिकारी
जिला परिवहन अधिकारी एवं जल संसाधन विभाग के ईई पर दो-दो जिलों का प्रभार हैं। जिससे उन पर काम का बोझ अधिक होने के कारण परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। जिससे वह हफ्ते में एक या दो दिन आते हैं, बाकी समय मूल पद में ही रहते हैं। इसी तरह जिला उद्यानिकी अधिकारी भी जिले के अतिरिक्त प्रभार में हैं। साथ ही सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी प्रभार में चल रहा है। जहां पर विधायको व सांसद विकास निधि के काम होते हैं ऐसे में जिले में विकास कितना हों रहा है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रभारियों के भरोसे अहम विभाग
किसी भी विभाग में जनहित में तभी निर्णय लिया जा सकता है। जब उसका फुल फ्लैश अधिकारी हो। उसके पास हर निर्णय लेने का अधिकार हो, लेकिन जिले में हो रहा है उल्टा। यहां अधिकांश विभागों में प्रभारी जमे हुए हैं और फुल फ्लैस अधिकारी न होने से वे निर्णय नहीं ले पा रहे जिनकी दरकार है। हैरानी की बात तो यह है कि कई अहम विभाग भी प्रभारियों के भरोसे हैं। जिले में कोतमा व जैतहरी विकासखंड का सबसे बड़ा जनपद कार्यालय भी फिलहाल प्रभारी अधिकारी के भरोसे चल रहा है।
काम की अधिकता से फैल रही अव्यवस्था
एक-एक अधिकारी को दो-दो जिलों में काम करना पड़ रहा है। जिसके चलते हफ्ते में चार दिन स्वयं के जिल एवं शेष दो दिन प्रभार वाले जिले में काम करना पड़ रहा है। ऐसे में काम की अधिकता के चलते अधिकारियों को परेशान होना पड़ रहा है। दूसरी ओर प्रभारियों की व्यवस्था के चलते शासन की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। स्थिति यह है कि ज्यादा कम होने के कारण बाबूओं को फाइलें लेकर हर दो-चार दिन में दूसरे जिले में जाना पड़ता है।
जिम्मेदार के बोल…
शासकीय योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए स्टॉफ की कमी के चलते विभागीय अधिकारियों को प्रभार सौंपा जाता है। अधिकारी व कर्मचारियों के रिटायरमेंट व तबादला के कारण भी कार्यालयों में स्टाफ की कमी बनी रहती है। मौजूदा स्थिति में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए इस तरह की व्यवस्था की जाती है। हालांकि इस संबंध में शासन से बार-बार पत्राचार किया जाता है।
अभय सिंह ओहरिया
प्रभारी कलेक्टर, अनूपपुर
