- जनप्रतिनिधियों से परिधान की व्यवस्था हो जायेगी…चुनाव चूंकि नजदीक है,पत्रकारों को है विश्वास…
- पत्रकारों का आपसी वॉट्सऐप चैट हुआ वायरल, अब पत्रकारों के आपसी चैट पर उठ रहे सवाल
- क्या जनप्रतिनिधियों से दान लेकर पत्रकार कर पाएंगे निष्पक्षता की बात, उठा रहे लोग सवाल
-रविं सिंह
मनेन्द्रगढ़,13 जुलाई 2023 (घटती-घटना)। एमसीबी प्रेस क्लब के पत्रकारों को ध्वजारोहण कार्यक्रम में ध्वज की सलामी देने के लिए श्वेत वस्त्र के साथ साथ टोपी की आवश्यकता है। प्रेस क्लब के साथियों को उम्मीद है ये व्यवस्था कोई भी जनप्रतिनिधि से हो जाएगी। क्योंकि चुनाव भी नजदीक है। एमसीबी प्रेस क्लब के ग्रुप का चैट इन दिनों सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। एमसीबी प्रेस क्लब के पत्रकारो के बीच हुई बातचीत के चैट से यह समझा जा सकता है कि ये पत्रकार जनप्रतिनिधियों पर आश्रित है। 15 अगस्त को निर्माणाधीन पत्रकार भवन में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम में एमसीबी प्रेस क्लब के पत्रकार फुल श्वेत परिधान और टोपी पहने नजर आकर राष्ट्र ध्वज को सलामी देना चाहते है, लेकिन श्वेत वस्त्र और टोपी की व्यवस्था यह जिले के जनप्रतिनिधियों से चाहते है। एमसीबी प्रेस क्लब के पत्रकारो को लगता है कि चुनावी साल है कुछ माह बाद चुनाव भी होने वाले है ऐसे में कोई भी जनप्रतिनिधि इनको श्वेत वस्त्र और टोपी देने के लिए मना नही करेगा।
सोशल मीडिया में सक्रिय रहने वाले मनेन्द्रगढ़ के प्रकाश त्रिपाठी ने भी एमसीबी प्रेस क्लब के पत्रकारो के ग्रुप में किये गए चैट को पोस्ट करते हुए लिखा है कि जिला एमसीबी में पत्रकारिता का स्तर इतना घटिया क्यों है? इसे पत्रकारों की आपसी बातचीत के जरिये समझा जा सकता है। इन्हें पत्रकार कॉलोनी के लिए प्रशासन से शासकीय जमीन का आबंटन चाहिए। मुख्यमंत्री की स्वेक्षानुदान निधि से अनुदान प्राप्त पत्रकारों को स्वतंत्रता दिवस मनाने श्वेत परिधान भी चाहिए। कलर टोपी चाहिए इसके बिना राष्ट्र का अपमान होता है। ये सब कुछ उन्हें जनप्रतिनिधियों से चाहिए। उनका मानना है कि चुनाव करीब हैं उन्हें खुश रखना विधायकों की मजबूरी है। जब पत्रकार चड्ढी भी विधायक की दी हुई पहनेंगे फिर सवाल पूछेंगे कैसे यह सवाल प्रकाश त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर उठाया है?
5 हजार विधायक स्वेच्छानुदान लेकर भी फजीहत करवा चुके है पत्रकार
नए जिले मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर के पत्रकार विधायक विनय जायसवाल से 5 हजार रुपये की स्वेच्छानुदान राशि लेकर भी अपनी फजीहत करवा चुके है। विधायक ने 4 दर्जन पत्रकारो को आर्थिक रूप से कमजोर बताते हुए स्वेच्छानुदान दिया था जिसे जिले के सिर्फ दो पत्रकारो रविकांत सिंह और अमित पांडेय ने यह कह कर वापस किया था कि इस पर हमारा हक नहीं। स्वेक्षानुदान मामले में पत्रकारों की जब फजीहत हुई थी तब दो पत्रकारों ने खुद को मामले से अलग किया था और राशि लौटा दी थी वहीं अन्य पत्रकारों ने राशि लेकर यह साबित किया था की वही असली जरूरतमंद हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
क्या यही है पत्रकारिता का असली स्तर,क्या जनप्रतिनिधियों से और अधिकारियों से वसूली है असली पत्रकारिता?
नवीन जिले एमसीबी के पत्रकारों का आपसी वाट्सएप चैट वायरल हुआ है जिसमे जनप्रतिनिधियों से परिधान की मांग की जाएगी यह लिखा गया है,अब इस चैट के वायरल होने के बाद सवाल उठता है की क्या यही है पत्रकारिता का असली स्तर,क्या जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से वसूली ही असली पत्रकारिता है। वायरल चैट को लेकर सोशल मीडिया में भी पत्रकारों की फजीहत हो रही है और कहीं न कहीं यह पत्रकारिता जगत के लिए शर्म वाला विषय है।
पत्रकार जनप्रतिनिधियों से अधिकारियों करेंगे वसूली तो फिर कैसे निभायेंगे निष्पक्ष होने का फर्ज
वायरल चैट के बाद और चैट पर सवाल उठने के बाद यह भी बात समझी जा सकती है की जब पत्रकार ही वसूलीबाज हो जाएं और जब पत्रकार ही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के आश्रित हो जाएंगे तो कैसे निष्पक्ष होने का फर्ज वह निभायेंगे। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यदि लोकतांत्रिक व्यवस्था में वसूली का काम करने लग जायेगा तो समाज में सच कौन सामने लायेगा यह भी सवाल उठता है।