मनेंद्रगढ़@क्या आदिवासी महिला के सामने गिड़गिड़ाने के बाद थानाप्रभारी अपने मामले में समझौता कराने में हुए सफल?

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  • आदिवासी महिला को प्रताडि़त भी किया और समझौता के लिए राजी कराने लगाई एड़ी-चोटी का जोर:सूत्र
  • आदिवासी महिला के हृदय को निशाना बनाने में सफल हुए थाना प्रभारी,आदिवासी महिला ने दीया मानवता का परिचय थाना प्रभारी सहित पुलिसकर्मियों के लिए राहत की खबर
  • मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी के रक्षा कवच माने जाने वाले एसपी ने आदिवासी महिला के मामले में इतना समय दिया की प्रभारी साहब समझौता करा ही लिये
  • आदिवासी महिला को जेल भेजने मामले में थाना प्रभारी दोषी सिद्ध हो सकते थे यही वजह थी कि महिला को समझाने व समझौता के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया

रवि सिंह-
मनेंद्रगढ़,30 मई 2023 (घटती-घटना)। जिले के पुलिस अधीक्षक का तबादला हो गया और तबादला होने व नए पुलिस अधीक्षक के पदभार ग्रहण करने से पहले एक बड़े मामले को मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी समझौता कराने में सफल हो गए, क्योंकि वह मामला उनके लिए जी का जंजाल बना हुआ था, मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी के लिए सुरक्षा कवच माने जाने वाले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक कई मामलों में इनका बचाव किया है, यही वजह है कि आज तक थाना प्रभारी बड़े-बड़े आरोपों से बचने में सफल हो गए, थाना प्रभारी के लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुरक्षा कवच बने हुए थे, यदि यह इनका मदद नहीं करते तो आज ना तो उनका प्रमोशन होता और ना ही यह 3 साल का कार्यकाल मनेंद्रगढ़ थाना में पूरा कर पाते, शिकायतें होती रही पर मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी को संरक्षण मिलता रहा, सूत्रों के हवाले से एक बार फिर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिसमें मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी के ऊपर आदिवासी महिला का बड़ा आरोप लगा था जिस मामले में उनके ऊपर कार्यवाही होने सुनिश्चित थी और यह बात मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी भाप चुके थे यही वजह थी कि आदिवासी महिला मामले में वह समझौता चाह रहे थे, जिसके लिए वह तमाम लोगों को लगा रखा था और महिला के ऊपर समझौता का दबाव बनाया जा रहा था, जिसके लिए मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी को उनके पुलिस अधीक्षक द्वारा काफी समय दिया गया और अंततः उनके जाने से पहले महिला के मामले में समझौता कराने में मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी सफल रहे, वैसे सूत्रों का कहना है कि समझौता बहुत आसानी से नहीं हुआ थाना प्रभारी को इसके लिए काफी लोगों के सामने गिड़गिड़ाना भी पड़ा, यहां तक कि महिला के सामने भी उन्हें सफाई देनी पड़ी और पूरे मामले में अपने आप को इनोसेंट बताने का प्रयास करते रहे और दूसरे कर्मचारियों पर मामले को थोपने का प्रयास किया गया, इस पर वह अपनी सफाई पूरी तरीके से पेश कर आदिवासी महिला के कोमल ह्रदय को पिघलाने में थाना प्रभारी व अन्य पुलिसकर्मियों सफल हुए और महिला को समझौता के लिए तैयार कर लिया गया, जिसके बाद मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी ने भी राहत की सांस ली और कहीं ना कहीं एक बार फिर अपने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का शुक्रिया किया होगा जिन्होंने उसे इतना समय दिया जिस वजह से समझौता मुमकिन हो सका। वही विभागीय जांच की माने तो यह उस जांच में भी पूरी तरीके से फस रहे थे और शायद समझौते के बाद उस जांच के मायने भी बदल जाएंगे।
प्रताड़ना झेलने के बाद भी आदिवासी महिला ने दिखाई दरियादिली,क्या इसके बावजूद भी इस मामले से सीख लेंगे थाना प्रभारी?
आदिवासी महिला ने काफी प्रताड़ना झेलने के बावजूद अपनी दरियादिली दिखाते हुए पुलिस वालों को एक मौका दिया है, जबकि पुलिस वालों ने उसे बिल्कुल भी मौका नहीं दिया था, उसे इस कदर परेशान किया था कि इस घटना को सुनने व जानने वाले भी पुलिस वाले की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर रहे थे, इतनी प्रताड़ना वह बेज्जती झेलने के बावजूद आदिवासी महिला ने कही न कही पुलिस को राहत ही दी है, ऐसे में महिला का शुक्रिया अदा करना चाहिए, पुलिस वालों ने तो मानवता नहीं दिखाया पर महिला ने मानवता जरूर दिखा दिया जिस वजह से मामला समझौते तक पहुंचा है।
महिला ने तो मानवता का परिचय दे दिया पर थाना प्रभारी की मानवता तो खुलेआम शर्मसार हुई
महिला ने जिस तरीके से मानवता का परिचय दिया है इससे पुलिस को भी सीख लेनी चाहिए कि उन्हें वर्दी पहनने के बाद यह याद रखना चाहिए कि उन्हें वर्दी समाज की सुरक्षा के लिए दिया गया है ना कि समाज को भयभीत करने व समाज को परेशान करने के लिए दी गई है, पुलिस भयमुक्त समाज की कल्पना है पर पुलिस इस कल्पना से भटक चुकी है यही कारण है कि पुलिस से लोगों का भरोसा उठ चुका है पर यह घटना पुलिस वालों के लिए भी एक सीख है कि एक महिला ने उन पर दया दिखाई है और उन्हें यह संदेश दिया है कि जो घटना मेरे साथ हुई है वैसी घटना और किसी के साथ ना हो।
यह था पूरा मामला
महिला के भाई दीपक सिंह के शिकायत अनुसार छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री के नाम एमसीबी जिला कलेक्टर एवं एसपी कार्यालय में शिकायत पत्र सौंप न्याय की गुहार लगाई। दीपक सिंह ने बताया मेरे बड़े पापा की लड़की सिपाही पारा में निवास करते हैं। हम आदिवासियों को शासन द्वारा हमें अपने घर में शराब बनाकर पीने की छूट है। दिनांक 25/02/2023 दिन शनिवार को मेरे बहन घर में अकेली थी मेरा जीजा भी बाहर अमरकंटक गए हुए था अचानक पुलिस वाले मेरी बहन के घर में दबिश देखकर घुस गए घर में तलाशी लेने लगे 10 बोतल कच्ची महुआ शराब जप्त कर मेरी बहन से केस नहीं बनाएंगे ऐसे कह कर पैसे की डिमांड करने लगे पुलिसकर्मियों के द्वारा 15 हजार की मांग की गई मेरी बहन ने कहा कि मेरे पास 2 हजार है अभी आप ले लीजिए बाकी का पैसा मैं आपको कल दे दूंगी नहीं माने, महिला पुलिस साथ में नहीं थी शाम के समय 07 बजे या 08 का समय होगा मेरी बहन को जबरदस्ती पुलिस वाले अपने साथ में 4 माह का छोटा बच्चा गाड़ी में बैठा कर मनेंद्रगढ़ थाना कोतवाली ले गए। शिकायतकर्ता के आरोप अनुसार दिनांक 25/02/2023 दिन शनिवार मनेंद्रगढ़ कोतवाली थाने में महिला पुलिस के बगैर उपस्थिति रात भर बहन को थाने में बैठा कर रखा गया। दिनांक 26/02/2023 को 10 लीटर शराब जप्त कर, 30 लीटर शराब का केस बना कर जेल भेज दिया मैंने अपने आवेदन में 25/02/2023 सीसीटीवी कैमरा की जांच कर फुटेज की मांग की है। ताकि हमें पता लग सके मेरी बहन के साथ कोई अन्याय तो नहीं हुआ है क्योंकि महिला पुलिस उसके साथ में होना चाहिए जो रात भर उपस्थित नहीं थी। साथ ही यह भी पता लग जाएगा। जब मेरी बहन मनेंद्रगढ़ थाना कोतवाली उस समय महिला पुलिस उसके साथ थी कि नहीं थी जो जांच का विषय है। मैं मीडिया के माध्यम से अपनी बात छाीसगढ़ के मुखिया तक पहुंचाना चाहता हूं। यह बताना चाहता हूं जब छत्तीसगढ़ राज्य में एक आदिवासी महिला अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है। प्रेस मीडिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री से अपील है मनेंद्रगढ़ कोतवाली थाने का मामला है इससे निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की कृपा करें।


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