रामानुजगंज 19 नवंबर 20-22 (घटती घटना) अपना विचार व्यक्त करते हुए समाज विज्ञानी बजरंग मुनि ने कहां की मैंने बहुत सोच समझकर योजना पूर्वक अपने जीवन की शुरुआत की थी। मुझे बहुत उम्मीद थी कि दुनिया की प्रमुख समस्याओं के समाधान में मैं कुछ सहायक बन सकूंगा। अब उम्र और स्वास्थ के हिसाब से कुछ निराशा हुई है। मैं इस बात को समझ गया था कि राजनीति ही सभी समस्याओं की प्रमुख उत्पादक संस्था है। लंबे समय तक मुझे राहुल गांधी नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल से उम्मीदें बनी रही। राहुल गांधी ने अपनी सामाजिक प्राथमिकताओं को बदलकर राजनैतिक कर लिया अब राहुल गांधी दिन रात सावरकर के पीछे पड़े हैं जबकि सावरकर वर्तमान और राजनीतिक व्यवस्था में कहीं कोई महत्वपूर्ण स्थान नहीं रखते राहुल गांधी को भारतीय राजनीति का निष्पक्ष मार्गदर्शन करना चाहिए नेतृत्व नहीं। नीतीश कुमार से मुझे बहुत उम्मीदें थी लेकिन परिस्थितियों ने नीतीश कुमार को मजबूर कर दिया और उन्होंने हार मान ली। अरविंद केजरीवाल से मुझे राजनीतिक प्रणाली में बदलाव की उम्मीद थी लेकिन अरविंद केजरीवाल वर्तमान गंदी राजनीति में अपना हित खोजने लग गये। नरेंद्र मोदी से 2012 तक मुझे कोई ज्यादा उम्मीद नहीं थी मैं सिर्फ इतनी ही उम्मीद करता था कि नरेंद्र मोदी मुस्लिम सांप्रदायिकता को बराबरी पर ला सकेंगे लेकिन जहां राहुल गांधी नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल ने राजनैतिक व्यवस्था के मामले में मुझे निराश किया है वहीं नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत ने मिलकर मुझे उम्मीद से बहुत अधिक राजनीतिक मामलों में संतुष्ट किया है। मैं राजनैतिक मामलों में पूरी तरह आंख बंद करके नरेंद्र मोदी मोहन भागवत का समर्थन कर रहा हूँ। लेकिन अब तक नरेंद्र मोदी मोहन भागवत से सुशासन की उम्मीद जगी है, स्वशासन के कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं। स्वशासन के संबंध में अभी पूरे भारत में कहीं से कोई आवाज नहीं उठ रही है इसलिए अंत में निराश होकर मैंने सामूहिक यज्ञ को सभी समस्याओं के समाधान की शुरुआत बताया है। मेरे लिए अब दो मार्ग हैं जो एक दूसरे के पूरक हैं पहला मार्ग सामूहिक यज्ञ है। मैं अपनी पूरी ताकत से सामूहिक यज्ञ प्रणाली को आदर्श दिशा में विकसित करने की कोशिश करूंगा जिसकी शुरुआत छाीसगढ़ के तातापानी से शुरू होगी। फरवरी माह के तीसरे सप्ताह में यह सामूहिक यज्ञ होगा। दूसरा कार्य मेरा यह होगा कि मैं अपनी शेष सारी शक्ति उस व्यक्ति या समूह की मदद में लगाऊंगा जो वर्तमान राजनैतिक प्रणाली के विरुद्ध लोक स्वराज्य की प्रणाली को आगे ले जाने का नेतृत्व करेगा। वहीं नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत की राजनैतिक सामाजिक आर्थिक नीतियों का पूरा समर्थन करता रहूंगा। मैं पूरा- पूरा प्रयास करूंगा कि भारत में नेहरू अंबेडकर और सावरकर सरीखे लोगों की आर्थिक सामाजिक राजनीतिक प्रणाली कभी वापस ना आ सके मैंने अपना मार्ग चुन लिया है।
