लखनऊ, 15 अक्टूबर 2022। करीब डेढ़ साल से फरार चल रहे एक लाख के इनामी आईपीएस मणिलाल पाटीदार ने आखिककार शनिवार को लखनऊ के अपर जिला सत्र न्यायाधीश/ भष्टाचार निवारण अधिनियम लोकेश वरुण की अदालत मे आत्मसमर्पण कर दिया। महोबा के एसपी रहे पाटीदार के अधिवक्ता ऐश्वर्य प्रताप सिह और रणधीर सिह ने अदालत मे तर्क दिया कि पाटीदार को झूठे मामले मे फसाया गया है। अदालत ने पाटीदार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत मे जेल भेजने का आदेश दिया है।
2014 बैच के आईपीएस अधिकारी पाटीदार को भ्रष्टाचार के गभीर मामले मे शासन ने नौ सितबर 2020 को सस्पेड कर दिया था। पाटीदार के खिलाफ सितबर 2020 मे महोबा मे क्रशर कारोबारी इन्द्रकात त्रिपाठी को आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य धाराओ मे मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस के वसूली के खेल मे क्रशर कारोबारी की जान गई थी। इसी मामले मे पुलिस को उसकी तलाश थी। पाटीदार पर एक लाख का इनाम भी घोषित किया गया था। महोबा के क्रशर कारोबारी इन्द्रकात त्रिपाठी को 8 सितबर 2020 को सदिग्ध परिस्थितियो मे गोली लग गई थी। इसके करीब 5 दिन बाद कानपुर के एक अस्पताल मे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इन्द्रकात त्रिपाठी ने घटना के एक दिन पहले यानी 7 सितबर 2020 को एक वीडियो जारी कर पाटीदार पर गभीर आरोप लगाए थे। उन्होने खुद की हत्या की आशका भी जताई थी।
इन्द्रकात ने आरोप लगाया था कि आईपीएस पाटीदार ने उनसे छह लाख रुपए की रिश्वत मागी। रिश्वत न देने पर हत्या कराने या जेल भेजने की धमकी देने लगा। इन्द्रकात की मौत के बाद उनके परिवार ने मणिलाल पाटीदार, कबरई थाने के तत्कालीन इस्पेक्टर देवेद्र, सिपाही अरुण और दो अन्य लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
निलबित आईपीएस मणिलाल पाटीदार पर आरोप है कि उन्होने महोबा मे एसपी रहते जमकर धनउगाही की। पाटीदार अपने कॅरियर की शुरुआत से ही बदनाम होने लगे थे। उन पर भ्रष्टाचार और वसूली के कई आरोप लगे लेकिन महोबा के क्रेशर कारोबारी इन्द्रकात त्रिपाठी की मौत के बाद उनके बुरे दिन शुरू हो गए। आरोप है कि रिश्वत न देने पर मणिलाल ने इन्द्रकात को जमकर प्रताडि़त किया। मणिलाल के इशारे पर पुलिस ने इन्द्रकात का कारोबार बद कराने की कोशिश की। उनके ठिकानो पर बेवजह छापामारी की गई। आरोप है कि इन सबसे इन्द्रकात इतना परेशान हो गए कि उन्होने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
