कोरबा@जिले में सड़क दुघटनाओं में नहीं लग रहा विराम

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कोरबा 14 सितम्बर 2022 (घटती-घटना)। साल खत्म होने में अभी साढ़े 3 महीने का वक्त बाकी है. लेकिन सड़क दुर्घटना में मरने वालों का आंकड़ा दोहरा शतक लगा चुका है नक्सली हमलों में जितने लोगों की मौत नहीं होती, उससे कहीं अधिक मौत हर साल सड़क दुर्घटनाओं की वजह से हो रहीं हैं ढ्ढ इसे लेकर कई स्तर पर मंथन होते हैं. प्रशासन के अलग-अलग विभाग, ट्रैफिक, परिवहन और पुलिस मिलकर कार्य योजनाएं तो बना रहे हैं. लेकिन उन पर अमल नहीं होता, असर धरातल पर नहीं दिखता ढ्ढ1 दिन पहले बांगो थाना के मड़ई घाट के पास बस ने सड़क पर खड़े ट्रेलर को टक्कर मारी, जिसमें सवार 6 लोगों की जान चली गई. पुलिस ने जांच में पाया कि बस चालक काफी तेज रफ्तार में था ढ्ढ जो खड़े ट्रेलर के बगल से अपनी बस को सुरक्षित नहीं निकाल सका. जिसके कारण बस सीधे ट्रेलर से जा टकराई. इस वर्ष के जनवरी माह से लेकर अगस्त तक की स्थिति में कोरबा जिले में 200 लोगों ने अपनी जान गवां दी है जिले में अब तक की स्थिति में 415 सड़क हादसे हुए हैं. जिसमें 394 लोग घायल हुए, जबकि 200 लोगों की मौत हो गई है सर्वाधिक मौत कटघोरा मोरगा नेशनल हाईवे 130 पर हुई है ढ्ढ जो कि सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से जिले का सबसे संवेदनशील हिस्सा है ढ्ढ इस सड़क पर लगातार हादसे हुए हैं. जिसमें लोगों ने अपनी जान गंवाई.बीते 9 महीनों के दौरान कटघोरा से मोरगा के बीच हुए सड़क हादसों में 50 लोगों ने अपनी जान गंवाई है. खासतौर पर बांगो थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सड़क पर सड़क हादसों को रोक पाना असंभव लगने लगा है ढ्ढ जिले में पहले 5 ब्लैक स्पॉट थे. जो सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से सबसे डेंजर जोन थे ढ्ढ तीन में सुधार कार्य हो गया है. जबकि दो खतरनाक ब्लैक स्पॉट इसी सड़क पर है ढ्ढ पहला तानाखार तो दूसरा गुरसियां चौक में है ढ्ढ खतरनाक ब्लैक स्पॉट के अलावा इसी सड़क पर 11 ग्रे स्पॉट भी चिन्हित किए गए ढ्ढ जोकि सड़क दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील स्थल होते हैं. इन पर भी कई तरह के सुधार कार्य प्रस्तावित हैं ढ्ढसड़क का सफर सुगम बनाने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए 25 जुलाई 2022 को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर संजीव झा की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति का बैठक की गई थी इसमें पुलिस के साथ ही पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई और परिवहन विभाग जैसे कई विभागों के अधिकारी शामिल थे. बैठक में 27 बिंदुओं पर निर्देश दिए गए थे. खासतौर पर नेशनल हाईवे 130 पर चर्चा की गई थी. यहां हाईवे पेट्रोलिंग की रिस्पांस टाइम को कम करने के साथ ही कई तरह के अनुशंसा की गई थी. यह अनुशंसाएं बैठक के ढाई महीने बाद भी अधूरी हैं. यहां तक कि पिछले सड़क सुरक्षा समिति की अनुशंसा को भी ठीक तरह से लागू नहीं किया गया है. नेशनल हाईवे के अलावा अन्य स्थानों पर वाहनों की चेकिंग, नाबालिग बच्चों को खुद के वाहन से स्कूल जाने से रोकना. हेलमेट की अनिवार्यता, आवारा पशुओं को नियंत्रित करना, शहर के किनारे अतिक्रमण को हटाना, बांगो मार्ग पर खड़े ट्रेलर को तत्काल हटाने के लिए क्रेन उपलब्ध कराना. इस तरह की अनुशंसा की गई थी ढ्ढ लेकिन कुछ एक निर्देश को छोड़ दिया जाए. तो लगभग सभी अनुशंसाएं, अब तक लागू नहीं हो सकी हैं ढ्ढ ट्रैफिक डीएसपी सिंह चरण सिंह परिहार कहते हैं कि “सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हम हर संभव प्रयास करते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग बिना हेलमेट पहन कर दो पहिया वाहन चलाते हैं. जान जाने वालों में इनकी संख्या 70 फीसदी है.जबकि शराब पीकर वाहन चलाना और बेतरतीब रफ्तार से वाहन चलाना दुर्घटनाओं के दूसरा बड़ा कारण हैं. सड़क सुरक्षा समिति की अनुशंसाओं को अमल में लाने के लिए अन्य विभागों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है. हमने फोटोग्राफी भी करवाई है इसे जल्द लागू करेंगे. फिलहाल एसपी के निर्देश के तहत निजात अभियान चलाकर शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।


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