प्रधान आरक्षक पर पुलिस अधिकारियों की क्यों है विशेष कृपा
रवि सिंह-
बैकु΄ठपुर 16 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। पहले लाइन अटैच, फिर गुपचुप तरीके से थाने के लिए पड़ी रवानगी। गुपचुप तरीके से एक प्रधान आरक्षक पटना थाना में दोबारा। एक प्रधान आरक्षक पर पुलिस अधिकारियों की क्यों है विशेष कृपा। पटना थाने से पहले हटाया गया, पुनः गोपनीय तरीके से फिर लाया गया। क्या पटना थाना उस प्रधान आरक्षक के बिना नहीं चल सकता? क्या पटना थाना को चलाने के लिए पूरे जिले में सिर्फ एक ही प्रधान आरक्षक योग? जिस प्रधान आरक्षक के खिलाफ है कई शिकायतें होने की वजह से पुलिस अधीक्षक ने कुछ दिन पहले पटना से शिकायतों के आधार पर था लाइन अटैच कर दिया था, आखिर गुपचुप तरीके से फिर पिछले 15 दिनों से पटना थाने में ही प्रधान आरक्षक की काम करने की चर्चा है आखिर जब हटाना ही था तो फिर गुपचुप तरीके से लाने का क्या मतलब? जबकि लाइन में ड्यूटी करते काफी कम देखे जाते हैं, जब से लाइन में ड्यूटी लगी है तब से लाइन में कम इधर ही ज्यादा देखा गया है।
विशेष सूत्रों की मानेतो कोरिया जिले के पुलिस विभाग में एक प्रधान आरक्षक ऐसे हैं जिनपर पुलिस विभाग के अधिकारियों की विशेष कृपा बरस रही है। प्रधान आरक्षक के लिए नियमो कायदों की अन्य पुलिसकर्मियों की तरह बाध्यता की बजाय उनकी सहूलियत का विशेष ध्यान पुलिस विभाग दे रहा है और खासकर प्रधान आरक्षक का पटना पुलिस थाने से प्रेम भी इस पूरे मामले में सपष्ट नजर आ रहा है जिससे साफ झलक रहा है कि यह प्रधान आरक्षक पटना पुलिस थाना छोड़ना नहीं चाहते और पटना थाने में भी कुछ न कुछ ऐसी समस्या है या अनुभवी अन्य पुलिस के ही अन्य प्रधान आरक्षकों की कमी है जिसकी वजह से विभागीय अधिकारी भी एक विशेष प्रधान आरक्षक को पटना थाने में ही रखना चाहते हैं भले ही उनकी शिकायतों की भी फेहरिस्त लम्बी हो। प्रधान आरक्षक को पहले शिकायतों के आधार पर लाइन अटैच किया गया अब गुपचुप तरीके से उनको फिर पटना थाने में कार्य करने को भेजा जाना यह साबित करता है कि प्रधान आरक्षक या तो विभाग के सबसे खास हैं क्योंकि इनके लिए नियम कायदों को तोड़ने में विभागीय अधिकारी भी परहेज नहीं करते हैं वहीं या तो पटना पुलिस थाने में फिलहाल पदस्थ अन्य प्रधान आरक्षकों से यह ज्यादा योग्यता रखते हैं जिसकी वजह से ही इनको जिम्मेदारी बार बार दी जा रही है। वैसे प्रधान आरक्षक फिलहाल पटना में लगातार दिखने लगे हैं और जिससे साफ जाहिर है कि उनके लाइन अटैच का मामला केवल दिखावा था और अब दिखावा खत्म करते हुए इनके पसंदीदा थाने में इनको इनके ही कहने पर भेज दिया गया है।