बैकुण्ठपुर @चिरमिरी की बंद चार भूमिगत कोयला खदानें होंगी शुरू

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  • बैकुन्ठपुर के कटकोना 5 नंबर को भी शुरू करने का प्रयास।
  • 25 वर्ष के लिए दिया जाएगा ठेके पर,ग्लोबल टेंडर हुआ जारी।

रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 15 जून 2022 (घटती-घटना)।
साउथ इस्टर्न कोलफिल्डस लिमिटेड (एससीएल) की घाटे में चल रही तीन भूमिगत खदानों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच बंद अंजनहिल रदान समेत चार भूमिगत खदान को पुनः शुरू करने की कवायद की जा रही है। इसके लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया गया है। खदानों को 25 वर्ष के लिए ठेके पर निजी कंपनियों को दिया जाएग, बैकुंठपुर क्षेत्र कि 6 साल पहले बंद हुई 5 नवंबर खदान को भी शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है, सूत्रों की मानें तो इसका भी ग्लोबल टेंडर जारी हो सकता है जिसके लिए तैयारी हो रही है कुछ दिनों पहले बैकुंठपुर दौरे पर आया सीएमडी ने खदान का जायजा लिया था और जल्द शुरू करने की बात कही थी।
कोल इंडिया प्रबंधन ने पिछले 12 साल के अंदर देश के 203 भूमिगत कोयला खदानों को अलग-अलग कारणों से बंद कर दिया। कोयले को कमी दूर करने के लिए अब इनमें से 20 खदानों को पुनः प्रारंभ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन खदानों को कोल इंडिया सीधे नहीं बल्कि निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित करेगी। फिर प्रारंभ किए जाने वाले खदानों छत्तीसगढ़ के रतुंग अंजनहिल कल्याणी माइंस और वीरसिंहपुर खदान शामिल है। एसईसीएल की 57 भूमिगत खदानें घाटे में चल रही है। आने वाले तीन साल के अंदर छत्तीसगढ़ के तीन भूमिगत खदान रजगामार सुराकछार व बलगी को बंद किया जाना है। कंपनी की आय का मुख्य स्रोत कोयला खनन व व्यापार से होने वाला लाभ है। कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोत्तरी व उनको दी जाने वाली सुविधाएं और मशीनीकरण साथ जमीन अधिग्रहण में होने वाले खर्च के कारण उत्पादन ली लागत बढती जा रही है, जिस कारण बंद खदानों में उत्पदान कार्य के लिए निजी कम्पनियों सौपा जा रहा है।

खदान बंद होने की यह थी वजह
एसईसीएल की चिरमिरी स्थित अजनहित कोयला खदान में छह मई 2010 को हुए गैस रिसाव की घटना में 14 अमिका की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद इस खदान के अलावा इसके साथ लगी वस्तुगा को भी बंद कर दिया गया था। अलग अलग वजह से खदानों को बंद किया गया है। कही कोयले की कमी तो कहीं पानी भर जाने की समस्या बनी हुई थी। कई खदानों में कोयले का खनन व्यवसायिक रूप से महंगा पड़ रहा था। विपरित परिस्थितियाँ की वजह से बंद किए गए खदानों को फिर से शुरू करने में सुरक्षा का खतरा हो सकता है।
इन खदान से होगा कितना भंडारण
बरतंगा हिल खदान में 196.2 लाख टन, अजनहिल खदान में 64.3 लाख टन, वीरसिंहपुर खदान में 34.3 लाख टन, कल्याणी माइंस में 19.0 लाख टन कोयला का भंडारण।
वर्ष 2023-24 तक एक हजार लाख टन उत्पादन लक्ष्य
देश में कोयला उत्पादन का 83 फीसद कोल इंडिया की खदानों से निकाला जाता वर्ष 2020-21 में कोल इंडिया ने 59622 लाख टन कोयले का उत्पादन किया था। कोयला मंत्रालय ने 2023-24 तक एक हजार लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा है। लगातार बढ़ रही बिजली की खपत ने कोयले की जरूरत बढ़ा दी है। पिछले कुछ माह से कोयले की आपूर्ति घटने से बिजली की समस्या सामने आ रही बारिश में खुली खदानों में कोयला उत्पादन प्रभावित हो जाता है। बंद भूमिगत खदानों को प्रारंभ करने से उत्पादन में वृद्धि होगी।


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