अम्बिकापुर,02 अप्रैल 2022(घटती-घटना)। चैत्र नवरात्र की शुरूआत शनिवार को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके साथ ही मंदिरों में ज्योति प्रज्जवलित करने और माता की आराधना के लिए भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। इस वर्ष चैत्र नवरात्र पर श्रद्धालुओं के बीच खास उत्साह देखा गया। क्यों कि कोरोना संक्रमण काल के कारण पिछले दो वर्षों से मंदिरों में देवी-देवताओं का सीधा दर्शन नहीं कर पा रहे थे। पर इस वर्ष कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने के कारण जिला प्रशासन ने सभी धार्मिक स्थालों को पूरी तरह खोलने के निर्देश दिए हैं। इस लिए चैत्र नवरात पर भक्तों ने मंदिर पहुंच कर मां का सीधा दर्शन किया और अपने परिवार की सुख- समृद्धि की कामना की। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री के स्वरूप की पूजा हुई। शनिवार को जगत जननी मां दुर्गा की आराधना शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ प्रारंभ हुई। शहर के देवी मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। माता की एक झलक पाने के लिए सभी श्रद्धालु लालायित नजर आए। माता रानी के दरबार में मत्था टेकने का सिलसिला सुबह से देर रात तक चलता रहा। चैत्र नवरात्रि की शुरूआत शनिवार को भक्तिमय वातावरण में हुई। पहले दिन मां का विशेष श्रंृगार किया गया। दोपहर 12.30 बजे के बाद अभिजीत मुहूर्त में ज्योति कलश प्रज्जवलित की गई। महामाया मंदिर, समलाया मंदिर, मां दुर्गा शक्तिपीठ गांधी चौक, संत हरकेवल मंदिर, काली मंदिर, रघुनाथपुर मंदिर, शीतला मंदिर सहित शहर के सभी देवी मंदिरों में माता की आराधना करने श्रद्धालु पहुंचे। मंदिरों में देवी भागवत कथा, दुर्गा सप्तसति का पाठ व भजन-कीर्तन किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं की लगी कतार
कोरोना संक्रमण काल के कारण पिछले दो वर्ष बाद इस चैत्र नवरात्र पर मंदिर का पट पूरी तरह से श्रद्धालुओं के लिए खोले गए हैं। मां के दर्शन के लिए सुबह से ही माहामाया मंदिर सहित दुर्गा मंदिर, गोरी मंदिर व अन्य मंदिरों में श्रद्धालओं की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई थी। शैलपुत्री स्वरूप की हुई पूजा
नवरात्रि के प्रथम दिवस माता के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की गई। शैलपुत्री का अर्थ पहाड़ों वाली माता होता है। माता के इस स्वरूप की पूजा से भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। सभी ने श्रद्धाभाव से मां के पहले रूप की पूजा-अर्चना कर अपने व परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।
ज्योति कलश से जगमगाए मंदिर
माता के मंदिर में मुख्य कलश स्थापित करने के बाद मंत्रोच्चारण के साथ ही विधिवत पूजन हुआ। इसके बाद सैकड़ों ज्योति कलश प्रज्जवलित हुए। माता के दरबार में ज्योत जलाकर भक्त मनौती पूरी होने की कामना करते नजर आए। वहीं कई भक्तों ने अपने-अपने घरों में भी ज्योति कलश स्थापित कर पूजा अर्चना की।
