सागौन की लकड़ी के साथ पकड़े गए ट्रैक्टर की आखिर क्या है सही कहानी?वन विभाग द्वारा ट्रैक्टर छोडऩे मामले में विभाग संदेह के घेरे में
वाहन मालिक का कहना है वन विभाग के लोग घर से ले गए थे गाड़ी,गाड़ी में नहीं था सागौन,सागौन की लकड़ी के साथ ट्रैक्टर हुई थी जप्त
रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 1 फरवरी 2022 (घटती-घटना)। सागौन की लकड़ी के साथ पकड़े गए ट्रैक्टर की आखिर क्या है सही कहानी? रेंजर शायद छूट गई गाड़ी, वाहन मालिक नहीं छूटी, सूत्र विभाग छोड़ने की तैयारी में। सागौन की लकड़ी के साथ ट्रैक्टर हुई थी जप्त, वन विभाग बैकुंठपुर के अमले ने किया था जब्त। वाहन मालिक का कहना है वन विभाग के लोग घर से ले गए थे गाड़ी, गाड़ी में नहीं था सागौन। सागौन की लकड़ी के साथ पकड़े गए ट्रैक्टर की आखिर क्या है सही कहानी? सूत्रों की माने तो जब्त ट्रेक्टर मामले को वन विभाग बैकुंठपुर निपटाने के कगार पर ही है। मामला ठंडा होने के इंतजार कर रहा वन विभाग, मामला ठंडा होते ही छोड़ दिया जाएगा ट्रेक्टर। यदि विभाग ट्रैक्टर के साथ लकड़ी जप्त किया था तो क्यों नहीं कर रहा राजसात, सवाल? रेंजर सहित अधिकारी आखिर किसके दबाव में ट्रैक्टर छोड़ने को हो गए तैयार?
4 माह पहले सागौन की लकड़ी के साथ पकड़ी गई ट्रैक्टर कि आखिर असल कहानी क्या है रोज नई-नई बात सामने आ रही है पहले तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि वन विभाग ने ट्रैक्टर को लकड़ी के साथ पकड़ा था तो आखिर राजसात की कार्यवाही क्यों नहीं की गई? वही वाहन मालिक का कहना है कि वन विभाग के लोग जबरदस्ती मेरे घर से वाहन ले जाकर उसमें सागौन की लकड़ी लोड किए और कार्यवाही की अब उसी वाहन को छोडऩे के लिए तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं, संबंधित रेंजर से पूछे जाने पर उन्होंने कहा था कि शायद गाड़ी छूट गई है पर वही वाहन मालिक का कहना है कि मेरी गाड़ी नहीं छूट सकी है। यदि गाड़ी नहीं छुट्टी है तो उस पर 4 महीने से क्या कार्रवाई हो रही है यह सबसे बड़ा सवाल है और कार्यवाही सार्वजनिक किए जाने की भी जरूरत है क्योंकि मामला संरक्षित वन संपदा से जुड़ा हुआ है और यदि इसी तरह कार्यवाही करके बाद में गाड़ियां छोड़ी जाती रहीं तो फिर वह दिन भी दूर नहीं जब बैकुंठपुर के इसी वन अमले के भरोसे थोड़ा बहोत बचा वन भी समाप्त हो जाएगा और पेड़ों का नामोनिशान खत्म हो जाएगा। चार माह पुराने सागौन पेड़ों से लदे हुए ट्रेक्टर जब्ती मामलें में जानकारी के अनुसार अभी तक वन विभाग राजसात की कार्यवाही नहीं किया है और क्यों नहीं कर रहा है इसकी वजह वन विभाग खुद यह बता रहा है की गाड़ी में लकड़ी नहीं पाया गया था जब लकड़ी नहीं पाया गया था तो फिर गाड़ी की जब्ती क्यों की गई? वाहन को वन विभाग छोड़ सकता है ऐसा सूत्रों का कहना है पर अभी ट्रेक्टर मालिक के अनुसार वाहन वन विभाग के कब्जे में है और पूरे मामले का क्या सच है यह तो वाहन मालिक व वन विभाग के लोग ही जाने वहीं जिम्मेदार अधिकारी अभी कोरोना संक्रमण की वजह से आइसोलेट है इसलिए वह भी जानकारी नहीं दे पा रहीं हैं।
रेंजर,एसडीओ सहित ट्रेक्टर मालिक की बातों में है विरोधाभास
पूरे मामले में यदि ट्रेक्टर मालिक सहित बैकुंठपुर वन विभाग के रेंजर की बातों पर गौर करें तो दोनों की ही बातों में विरोधाभास समझ मे आएगा। ट्रेक्टर पकड़े जाने और ट्रैक्टर छोड़ने के मामले में बैकुंठपुर वन विभाग के रेंजर से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा ट्रेक्टर में सागौन नहीं मिला था और शायद ट्रेक्टर छोड़ दिया गया है लेकिन इसकी जानकारी एसडीओ फॉरेस्ट देंगी, वहीं ट्रेक्टर मालिक का कहना है कि ट्रेक्टर वन विभाग के लोग घर से लेकर गए और उसमें सागौन नहीं लदा था और बाद में सागौन की बात सामने आई और अभी ट्रेक्टर छुटा भी नहीं है, यदि दोनों की बातों पर गौर किया जाए तो मामले में विरोधाभास सामने से नजर आता है और वह यह कि ट्रेक्टर मालिक वन विभाग पर आरोप लगा रहा है वहीं वन विभाग के रेंजर कह रहे हैं कि ट्रेक्टर में सागौन लोड नहीं था ,ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि फिर वन विभाग द्वारा क्यों किसी का ट्रेक्टर चार महीने से खड़ा करके रखा गया है जब उसमें सागौन मिला ही नहीं। वही पूरे मामले में एसडीओ अपने आपको अनजान बता रहे हैं और कोरोना संक्रमण की वजह से आइसोलेट होने की बात कह रहे हैं मामला तोल मोल जैसा देखा जा रहा है।
यह है पूरा मामला
बैकुंठपुर वन मण्डल अंतर्गत जगदीशपुर सागौन प्लान्टेशन क्षेत्र से सागौन के हरे भरे पेड़ों को काटकर ट्रेक्टर द्वारा परिवहन कर ले जाने के दौरान चार माह पूर्व ट्रेक्टर सहित सागौन के हरे भरे पेड़ों को वन अमले ने ग्राम रनई तक ट्रेक्टर को दौड़ाकर पकड़ते हुए मय ट्रेक्टर सागौन के हरे भरे पेड़ों से लदे ट्रेक्टर को जब्त किया था और उस समय इस कार्यवाही की बाकायदा वीडियोग्राफी भी हुई थी जो किसी के द्वारा की जाकर सार्वजनिक की गई थी जिसमें स्पस्ट रूप से सागौन के हरे भरे पेडों से लदे ट्रेक्टर को देखा जा सकता है और उस समय ट्रेक्टर चालक सह मालिक का बयान भी सुना जा सकता है कि उसके द्वारा क्या कहा जा रहा है और सागौन पेड़ों को काटकर कहाँ ले जाया जा रहा है वह बतला भी रहा है। चार माह पुराने मामले में जिसमें दिनदहाड़े सागौन के हरे भरे पेड़ों से लदे हुए ट्रेक्टर को वन विभाग के अमले ने जब्त किया था और ट्रेक्टर सहित सागौन के हरे भरे पेड़ों को जब्त करते हुए अपने हिरासत में लिया गया था और चार महीनों तक ट्रेक्टर लकड़ी सहित वन विभाग बैकुंठपुर के जब्ती में था और उसे चार महीने बाद यह कहकर छोड़ दिया गया कि ट्रेक्टर में सागौन लकड़ी पाया ही नहीं गया और इसलिए ट्रेक्टर छोड़ दिया गया। पूरे मामले में बड़े स्तर पर लेनदेन होने की बात भी सामने आ रही है और कुछ सफेदपोश लोगों के शामिल होने की वजह से यह लेनदेन करते हुए सागौन के हरे भरे पेड़ों से लदे ट्रेक्टर को छोड़ दिया गया जिससे सफेदपोश लोगों को बचाया जा सके और लेनदेन करते हुए लाभ भी अर्जित कर लिया गया जो बड़े स्तर पर हुआ जिसके कारण ट्रेक्टर छूट सका।
मामले में सभी के बयान बदलने की बात आ रही सामने
जिन के बयान के आधार पर कार्यवाही की गई थी अब उन्हीं का बयान बदलने के बाद सामने आ रही है इस मामले में सात आठ लोग शामिल थे, अब सूत्रों की माने तो सभी अपना बयान बदल दिए हैं ताकि ट्रैक्टर मालिक को बचाया जा सके इसमें वन विभाग के अधिकारियों की संलिप्त होने का संदेह है।
पेड़ो के तस्करी मामले पर वन विभाग पर उठ रहे गंभीर सवाल
सवाल- सागौन के हरे भरे पेड़ों से लदे जिस ट्रेक्टर को वन विभाग बैकुंठपुर के अमले ने जब्त किया था आखिर चार महीने बाद उसे छोड़ने की तैयारी क्यों?
सवाल- चार महीनों तक आखिर क्यों जब्त रखा गया ट्रेक्टर यदि ट्रेक्टर में सागौन पेड़ जब्त नहीं हुए थे? जैसा कि ट्रेक्टर को छोड़ते समय उल्लेखित किया गया है कि ट्रेक्टर में सागौन पेड़ नहीं मिले?
सवाल- वन विभाग बैकुंठपुर आखिर चार माह तक ट्रेक्टर को जब्तकर क्या कार्यवाही कर रहा था जब ट्रेक्टर में कुछ लदा ही नहीं था?
सवाल- दिनदहाड़े जब्ती की हुई थी कार्यवाही, वीडियो तक है जब्ती के समय का मौजूद, आखिर वन विभाग बैकुंठपुर क्यों सभी के आंखों में धूल झोंकने का प्रयास क्यों।
सवाल- वन विभाग बैकुंठपुर द्वारा चार महीनों बाद सागौन तस्करी में लिप्त व जब्त ट्रेक्टर को छोड़ने के पीछे की आखिर वजह क्या है, क्यों वन विभाग सरेआम झूठ कह रहा है, जबकि जब्ती कार्यवाही बहुतों के सामने हुई थी।
सवाल- आखिर कितने पैसों में ईमान का हो रहा सौदा? कितने पैसों में बिकी वन संपदा की सुरक्षा का संकल्प?
सवाल- वन रक्षा समिति के अध्यक्ष के बयान पर ट्रेक्टर हुआ था जब्त, आखिर वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष ने क्यों बदल दिया अपना बयान?
सवाल- राजनीतिक दबाव सहित पैसों के दमपर जब्त ट्रेक्टर छोड़ा जा सकता है सूत्रों से मिल रही खबर।
सवाल- सागौन वृक्षों की तस्करी मामले में वन विभाग बैकुंठपुर भी अब संदेह के दायरे में?
सवाल- कहीं वन विभाग ही तो नही करा रहा था सागौन वृक्षों की तस्करी,यह भी ट्रेक्टर छोड़ने की कार्यवाही से उठ रहा सवाल।