नई दिल्ली@ समुद्री सीमा को लेकर भारत सख्त

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समुद्र की सीमाओं के लिए भारत का बड़ा प्लान…
पाकिस्तान-बांग्लादेश के साथ क्या बदलेगा भारत …
सरकार डब्ल्यूजीएस 84 डेटाम की तरफ जाने पर विचार कर रही…
केंद्र के नए प्लान से पाकिस्तान-बांग्लादेश पर पड़ेगा असर…
समुद्री टेरिटोरियल वाटर और ईईजेड में भी बदलाव आएगा…
नई दिल्ली,03 अप्रैल 2025 (ए)।
भारत समुद्री सीमाओं के लिए बड़ा प्लान तैयार कर रहा है ताकि सुरक्षा को चाक-चौबंद किया जा सके। भारत समुद्री क्षेत्र और पड़ोसी देशों के साथ लगी सीमाओं पर सुरक्षा चौकसी को और पुख्ता बनाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार समुद्र तट के सटीक निर्देशांक के लिए इंटरनेशनल स्टैंडर्ड अपनाने पर विचार कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि सरकार अपनी तटरेखा के सटीक निर्देशांक निर्धारित करने के लिए वर्ल्ड जियोडेटिक सिस्टम 1984 डेटाम की तरफ जाने पर विचार कर रही है, जो पुरानी एवरेस्ट एलिप्सॉइड सिस्टम से आगे है, जिसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है।
मौजूदा बेस लाइन्स बदल जाएंगी
नए सिस्टम में जाने से मौजूदा बेस लाइन्स बदल जाएंगी। बेस लाइन का मतलब होता है वो सीधी रेखाएं जो समुद्री तट के सबसे बाहरी बिंदुओं को जोड़ती हैं। नए बदलाव से टेरिटोरियल वाटर और एक्लूसिव इकोनॉमिक जोन्स में बदलाव लाएगी। टेरिटोरियल वाटर, सन्निहित क्षेत्र, महाद्वीपीय शेल्फ,एक्लूसिव इकोनॉमिक जोन्स और समुद्री सीमाओं की सीमाएं बेस लाइन से समुद्र की ओर मापी जाती हैं।
नया इंटरनेशनल स्टैंडर्ड अपनाने से भारत की समुद्री सीमा कुछ मीटर से लेकर कुछ सौ मीटर तक बढ़ सकती है,जिसका असर समुद्र में 12 समुद्री मील तक फैले टेरिटोरियल वाटर और 200 समुद्री मील तक फैले ईईजेड पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए, सर माउथ क्षेत्र (सर क्रीक का हिस्सा) में, भारतीय तट की बेस लाइन उत्तर-पश्चिम दिशा में लगभग 57 मीटर तक खिसक जाएगी।
विदेश मंत्रालय इस विषय पर कर रहा विचार
सूत्रों ने बताया कि नए सिस्टम से 133 भौगोलिक निर्देशांकों का नया गजटेड नोटिफç¸केशन तैयार होगा,जिसका उपयोग बेसलाइन की गणना करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय डेटा को संशोधित करने और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने पर चर्चा कर रहा है।सूत्रों ने बताया कि भारत की बेस लाइन ्रविशेष रूप से बांग्लादेश की ओर बदल सकती है। इससे टेरिटोरियल वाटर में भी बदलाव होगा। सीमा के पाकिस्तान की ओर भी ऐसा ही,हालांकि कम प्रभाव महसूस किया जा सकता है। यह ध्यान देने वाली बात है कि 2014 के स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने बांग्लादेश और भारत के बीच समुद्री सीमा विवाद को सुलझाने के लिए डब्ल्यूजीएस 84 डेटा का इस्तेमाल किया था।


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