- हिंदू धर्म अनुसार हुई शादियां, फिर मुहूर्त का क्यों नहीं रखा गया ध्यान?
- क्या सिर्फ सामान की सप्लाई के लिए बिना मुहूर्त कराई गई सामूहिक शादियां?

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर/रायपुर,30 मार्च 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ शासन महिला बाल विकास विभाग आजकल सामूहिक विवाह कार्यक्रम सम्पन्न कराने में लगा हुआ है। यह कार्यक्रम उन लोगों के लिए आयोजित किया गया है जो आर्थिक रूप से कमजोर है और उन्हें शादी विवाह में होने वाले खर्च नहीं कर सकते जिसके लिए सरकार ने अपने खर्चे पर इनकी शादी करने का जिम्मा उठाया है यह शादियां हिंदू रीति रिवाज के साथ देखने को मिला,सामूहिक विवाह लगभग मंदिर प्रांगण में आयोजित किया गया पर इस विवाह को लेकर इस समय यदि कोई चीज सुर्खियां बटोर रहा है या चर्चा का विषय बना हुआ है तो वह है हिंदू रीति रिवाज से जब शादी हो रही है तो मुहूर्त का ध्यान क्यों नहीं दिया गया? क्या मुहूर्त तक रुकना शासन के लिए यह सरकार प्रशासन के लिए जरूरी नहीं था या फिर इसके पीछे के मंशा क्या थी? क्या सिर्फ सप्लाई कर सिर्फ कमिशन कामना है इस विवाह का उद्देश्य था? छत्तीसगढ़ में लगभग सारे मंत्री हिंदू धर्म से आते हैं फिर खुद इस विभाग के मंत्री भी हिंदू धर्म की हैं फि र भी क्या उन्हें भी इस बात का ध्यान नहीं रहा? क्या वह अपने घर की शादियां भी बिना मुहूर्त के करते या फिर शासकीय पैसे से जो शादियां होती है उसके लिए किसी मुहूर्त का जरूरत नहीं?
छत्तीसगढ़ में पता नहीं किस बात की हड़बड़ी की वजह से इस संस्कार को बिना शुभ मुहूर्त ही संपन्न किया गया
सनातन कहें या हिंदू संस्कृति अनुसार विवाह शुभ मुहूर्त में किया जाने वाला एक संस्कार है और इसका हिन्दू या सनातन संस्कृति में विशेष ध्यान रखा जाता है जबकि छत्तीसगढ़ में पता नहीं किस बात की हड़बड़ी की वजह से इस संस्कार को बिना शुभ मुहूर्त ही संपन्न करा लिया गया। बताया जाता है कुछ तो मामला आयोजन जल्द निपटाकर जल्द से जल्द इस आयोजन के मद को निपटाना भी था और वह हुआ भी। आयोजन जल्द से जल्द निपटाने के लिए लगभग जिलों में यह आयोजन संपन्न होते गए वहीं भाजपा सरकार के किसी निर्वाचित सदस्य मंत्री ने और न किसी संगठन के व्यक्ति ने इस आयोजन में शुभ मुहूर्त का मुद्दा उठाया। कई जगह इस बात की चर्चा और इस मुद्दे को कुछ लोगों ने सोशल मीडिया में उठाया भी की अभी खरवास है और ऐसे में शुभ विवाह संस्कार का होना सही नहीं है लेकिन शासन की साथ ही महिला बाल विकास की नजर शायद इस सोशल मीडिया विरोध पर नहीं पड़ी या पड़ी भी तो उन्होंने नजर अंदाज किया और आयोजन सम्पन्न करना ही बेहतर समझा।
हिंदूवादी सरकार बिना मुहूर्त के कैसे आयोजित कर ले गई सामूहिक शादी कार्यक्रम?
बिना मुहूर्त छत्तीसगढ़ महिला बाल विकास विभाग की सामूहिक शादियां कैसे संपन्न हुईं क्या मजबूरी थी यह भी एक प्रश्न है। प्रदेश की भाजपा सरकार हिंदूवादी सरकार है और ऐसे में हिंदूवादी सरकार के एक मंत्रालय अंतर्गत यह त्रुटि मानी जाए या इसे जानबूझकर संपन्न किया गया कार्यक्रम माना जाए। प्रश्न उठेंगे क्योंकि धर्म से जुड़ा मामला एक धार्मिक मान्यताओं को तवज्जो देने वाली सरकार के लिए उठ रहे हैं।
सनातन संस्कृति के लिए कुछ भी कर जाने की बात करने वाली भाजपा सरकार सामूहिक विवाह के दौरान शुभ मुहूर्त का ध्यान क्यों नहीं रख रही है?
यदि सामूहिक विवाह कार्यक्रम लगभग हर जिले में आयोजित हो रहा है और शासकीय राशि भी जमकर खर्च की जा रही है वहीं वर वधू को काफी कुछ उपहार भी प्रदान किया जा रहा है लेकिन इन सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के आयोजन में शुभ मुहूर्त को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सनातन संस्कृति को लेकर चलने वाली और सनातन संस्कृति के लिए कुछ भी कर जाने की बात करने वाली प्रदेश की भाजपा सरकार सामूहिक विवाह आयोजनों के दौरान शुभ मुहूर्त का ध्यान क्यों नहीं रख रही है यह विचारणीय है। प्रदेश का महिला बाल विकास विभाग क्या सामूहिक विवाह मामले में शुभ मुहूर्त को लेकर कोई ध्यान नहीं रखना चाहता या वह इस मामले में ध्यान देना नहीं चाहता? वैसे कई जगह यह विवाह कार्यक्रम मंदिरों में आयोजित हुए और कहीं न कहीं सनातन संस्कृति और परंपराओं का भी पालन किया गया बस कुछ ध्यान नहीं रखा गया तो वह यह की शुभ मुहूर्त में यह कार्यक्रम आयोजित हो इसका परहेज रखा गया।
जहां हिंदू धर्म अनुसार खरमास में नहीं होती शादियां, फिर एक महीने में बिना मुहूर्त कैसे हो रहे है सामूहिक विवाह?
हिंदू धर्म परंपरा अनुसार खरवास माह में शुभ कार्य विवाह इत्यादि नहीं किए जाते संपन्न,अब सवाल यह भी है कि जब खरवास माह में विवाह इत्यादि संपन्न नहीं किए जाते तो छत्तीसगढ़ में कैसे सामूहिक विवाह खरवास में संपन्न हो रहे हैं। बिना मुहूर्त विवाह इत्यादि शुभ कार्य का इस माह परहेज ही किया जाना हिन्दू धर्म अनुसार मान्य है। ज्योतिष की माने तो साल 2025 में खरमास 14 मार्च से शुरू होकर 13 अप्रैल को खत्म होगा, इस दौरान मांगलिक कार्य जैसे शादी-ब्याह नहीं किए जाते है खरमास लगने की वजह जब सूर्य देव देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में गोचर करते हैं, तब खरमास लगता है सूर्य देव जब कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास शुरू हो जाता है सूर्य देव जब मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास खत्म हो जाता है खरमास के दौरान खरमास के दौरान शादी-ब्याह,मुंडन,यज्ञोपवीत संस्कार,गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते, खरमास के दौरान मांगलिक कार्यों पर विराम रहता है, खरमास के बाद शुभ मुहूर्त मिलता है, खरमास के बाद अप्रैल-जून और फिर नवंबर से लेकर दिसंबर माह तक कई विवाह के मुहूर्त बनते हैं।
क्या मंत्री विधायक भी अपने घरों की शादियां बिना मुहूर्त के संपन्न कराते हैं?
वैसे क्या प्रदेश सरकार के मंत्री विधायक भी अपने घरों की शादियों में शुभ मुहूर्त का ध्यान नहीं रखते यह भी सवाल है,यदि मंत्री विधायक प्रदेश के शुभ मुहूर्त का ध्यान नहीं रखते तब तो इस आयोजन को लेकर कोई प्रश्न नहीं है वहीं यदि उन्हें शुभ मुहूर्त का ध्यान है और अपने लिए है तो अन्य के लिए भी होना चाहिए।
बिना मुहूर्त की शादी को लेकर महिला बाल विकास मंत्री सुर्खियों में…
बिना मुहूर्त के संपन्न हुई प्रदेश के महिला बाल विकास विभाग की सामूहिक शादियां सुर्खियों में है और साथ ही विभाग की मंत्री भी सुर्खियों में हैं। आय व्यय का जिम्मा इसी विभाग का था और जो पूरी तरह अब सम्पन्न करा लिया गया।
क्या शादियां संपन्न कराने वाले भी शासकीय दक्षिणा के लिए बिना मुहूर्त शादी करा दिए?
हिंदू धर्म अनुसार होने वाली शादियों में विवाह संपन्न कराने का जिम्मा धर्म के ऐसे लोगों के पास होता है जो धर्म के जानकार होते हैं और धर्म अनुसार शुभ कार्य संपन्न कराते हैं,अब सवाल यह भी है कि क्या ऐसे लोगों ने धर्म के भी दक्षिणा के लिए शासकीय बिना मुहूर्त शादियों को संपन्न करा दिया।
महिला बाल विकास मंत्री से नहीं हो पाई बात
दैनिक घटती-घटना के प्रतिनिधि के द्वारा लगातार उन्हें फोन लगाया गया पर फोन से संपर्क न होने की वजह से इस संबंध में उनसे बात नहीं हो पाई जिस वजह से उनका पक्ष नहीं रखा जा सका।