@ आखिर किस बात पर हो रही है आपत्ति
नई दिल्ली,27 मार्च 2025 (ए)। संसद के मानसून सत्र में मणिपुर हिंसा पर विपक्ष ने खूब हंगामा किया था और इसी हंगामे के बीच ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2023’ संसद के दोनों सदनों से पास हो गया। सरकार का कहना है कि इस बिल को लाने का उद्देश्य लोगों की डिजिटल प्राइवेसी को सुरक्षित रखना है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 3 अगस्त 2023 को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल,2023 लोकसभा में प्रस्तावित किया था।
बिल पर चर्चा के बाद इसे 7 अगस्त को लोकसभा और 9 अगस्त को राज्यसभा में पारित कर दिया गया। 12 अगस्त को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस बिल को मंजूरी दे दी और अब यह कानून बन चुका है। हालांकि, इस कानून के नियमों को बनाने की प्रक्रिया अभी जारी है।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
दरअसल, 24 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने ‘निजता के अधिकार’ को मौलिक अधिकार बताया था। पीठ ने कहा था कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए जीने के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद से ही डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल पर काम शुरू हुआ था। साल 2018 में डेटा प्रोटेक्शन को लेकर जस्टिस बीएन कृष्णा समिति ने डेटा संरक्षण बिल, 2018 का एक ड्राफ्ट तैयार किया और इसकी रिपोर्ट तत्कालीन आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद को सौंप दी।
