कोरिया@कोरिया जिले में फ्लोरोसिस रोकथाम के लिए मिले 9 लाख से अधिक का बजट संदेह के घेरे में…जांच की मांग तेज

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-रवि सिंह-
कोरिया,24 मार्च 2025 (घटती-घटना)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के लिए कोरिया जिले को वित्तीय वर्ष 2022-24 के दौरान 9 लाख रुपये से अधिक का बजट स्वीकृत किया गया था। यह राशि जिले में फ्लोरोसिस से बचाव, प्रयोगशाला स्थापना, मरीजों के उपचार, जागरूकता अभियानों और निगरानी कार्यों के लिए दी गई थी। लेकिन अब इस बजट के उपयोग को लेकर संदेह गहराने लगा है, क्योंकि न तो प्रयोगशाला की स्थापना को लेकर कोई ठोस जानकारी उपलब्ध है और न ही अन्य गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण सामने आया है। सरकार की ओर से कोरिया जिले में फ्लोरोसिस प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए 7 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। इस राशि से प्रयोगशाला के लिए जरूरी उपकरण खरीदे जाने थे, ताकि फ्लोरोसिस प्रभावित लोगों की जांच और उपचार किया जा सके। लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह प्रयोगशाला कहां स्थापित की गई और क्या यह कार्यरत भी है या नहीं। इसके अलावा, मरीजों के उपचार, प्रचार-प्रसार और फ्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने के लिए अलग से 1 लाख रुपये का बजट दिया गया था। इस राशि का उपयोग फ्लोरोसिस से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देने, प्रभावित लोगों को उचित खानपान संबंधी परामर्श देने और स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन में किया जाना था। मगर इन अभियानों को लेकर भी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। फ्लोरोसिस से प्रभावित मरीजों की पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण, सैंपल ट्रांसपोर्ट और निगरानी गतिविधियों के लिए भी जिले को लगभग 1.76 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। इस राशि का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर सर्वे कर मरीजों को उपचार उपलब्ध कराना था, लेकिन जिले में अब तक इस तरह की कोई व्यापक पहल देखने को नहीं मिली। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह पूरा बजट वास्तव में इस्तेमाल हुआ है या नहीं? अगर प्रयोगशाला की स्थापना हुई है तो वह कहां है और कितने मरीजों की जांच की गई? क्या जागरूकता अभियानों पर खर्च किए गए पैसे का कोई हिसाब मौजूद है? स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अगर यह पाया जाता है कि राशि का दुरुपयोग हुआ है या इसे सही तरीके से खर्च नहीं किया गया, तो यह सरकारी धन की बर्बादी और आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का मामला बन सकता है। लोगों का कहना है कि अगर इस मामले में कोई अनियमितता हुई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। ताकि फ्लोरोसिस प्रभावित लोगों को सही उपचार और सुविधाएं मिल सकें।
क्या है फ्लोरोसिस और क्यों जरूरी है यह कार्यक्रम?
फ्लोरोसिस एक गंभीर जलजनित रोग है, जो शरीर में अत्यधिक फ्लोराइड के प्रवेश के कारण होता है। यह रोग मुख्यतः उन क्षेत्रों में फैलता है,जहां पीने के पानी में फ्लोराइड का स्तर 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक होता है।
फ्लोरोसिस के प्रकार

  1. डेंटल फ्लोरोसिस इसमें दांतों पर सफेद या भूरे रंग के धबे पड़ जाते हैं।
  2. स्केलेटल फ्लोरोसिस इसमें हड्डियां कठोर और कमजोर हो जाती हैं, जिससे चलने-फिरने में दिक्कत होती है।
  3. नॉन-स्केलेटल फ्लोरोसिस इसमें पेट दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं।
    राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम का उद्देश्य
  • फ्लोरोसिस से प्रभावित जिलों में जल स्रोतों की जांच करना।
  • फ्लोरोसिस डायग्नोसिस सेंटर और प्रयोगशालाएं स्थापित करना।
  • रोगियों को उपचार और परामर्श देना।
  • लोगों को स्वच्छ जल और पोषण संबंधी जानकारी देना।

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