- निर्वाचन के विरुद्ध प्रत्याशी लेंगे अब न्यायालय का शरण
- जब 5:00 बजे मतदान हो चुका था समाप्त तब ऐसी क्या विपत्ति आन पड़ी थी कि छिंदिया के एक पोलिंग बूथ पर रात के 1:30 बजे तक होती रही काउंटिंग?
- जिस बूथ में मतदान सबसे पहले समाप्त हुआ, वहीं की गिनती सबसे अंतिम में क्यों हुई?
- क्या आशा साहू को जीताने के लिए निर्वाचन विभाग ने सारे नियम शिथिल कर रखे थे,पीडि़त प्रत्याशी का आरोप…कहा हुई है धांधली?
- क्या निर्दलीय प्रत्याशी को भाजपा के जिलाध्यक्ष व विधायक से टकराना पड़ा महंगा…जीत छीनकर दे दिए गया दूसरे प्रत्याशी को?
- त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में धांधली की शिकायत सरगुजा संभाग में खूब देखने को मिली,ऐसी ही शिकायत अब कोरिया जिले से भी सामने आई है…
- गणना एजेंटों को नहीं दिखाया गया पर्चा,दूर बैठने को कहा गया,बंद कमरे में मोबाइल भी कराया गया बंद…सूत्र
- गणना पत्रक में भी केवल संबंधित प्रत्याशी का उल्लेख,जबकि समस्त प्रत्याशियों द्वारा प्राप्त वोटों का होना चाहिए रिकॉर्ड
- पुनर्गणना का प्रावधान खत्म,न्यायालय पर निर्वाचन विभाग ने छोड़ा प्रत्याशियों के किस्मत का फैसला?
- पंचायत चुनाव में निर्वाचन विभाग की धांधली ने कहीं पर भी पुनर्गणना नहीं होने दिया, सभी को इलेक्शन कमीशन के दरवाजे खटखटाना को कहा गया?
- सत्ता के इशारे पर निर्वाचन विभाग के दायित्व को निभा रहे अधिकारियों ने सत्ता के प्रत्याशियों को जीत दिलाने का लिया था ठेका?
- लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाला चुनाव जिम्मेदारों के हाथों की बना कठपुतली?
-रवि सिंह-
कोरिया,25 फरवरी 2025 (घटती-घटना)। हमारे भारत देश में सबसे मजबूत लोकतंत्र को माना जाता है,इस लोकतंत्र की खूबसूरती के लिए व देश के मजबूती के लिए चुनाव पद्धति का इस्तेमाल किया जाता है। ताकि एक मजबूत लोकतंत्रात्मक देश को मजबूत बना सके। पर इस समय इस लोकतंत्र की खूबसूरती पर भी बैठे जिम्मेदार लोग दाग लगा रहे हैं, अपने अधिकारों का गलत उपयोग कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि अब निर्वाचन प्रक्रिया सिर्फ किसी के हाथों की कठपुतली बन गई है। मजबूत लोकतंत्र को चुनने की जो शक्ति लोगों को प्रदान थी, उस शक्ति का भी अब दुरुपयोग होने लगा है, जनता अब निष्पक्ष तरीके से अपना प्रतिनिधि भी नहीं चुन सकती, वह भी अब षड्यंत्र के तहत थोपने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कुछ ऐसा ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सरगुजा संभाग में देखने को मिला। कई जगह से ऐसी खबरें हैं कि सत्तापक्ष की हाथ की कठपुतली बन रहा निर्वाचन विभाग और सत्ता पक्ष के इशारे पर आते रहे उनके मन मुताबिक परिणाम। जिसकी शिकायतें भी हुई, पर इस सबके बीच एक बड़ा सवाल यह था कि जहां पर भी धांधली के आरोप लगे, वहां पर पुनर्गणना के प्रावधान को दरकिनार किया गया। प्रसाशन बातें इलेक्शन कमीशन पर डालकर अपना पल्ला झाड़ता रहा, पर इस चुनाव में यदि निष्पक्ष निर्वाचन की बात की जाए तो शायद देखने को नहीं मिली, क्योंकि ऐसी कई शिकायतें सामने आई। कुछ ऐसा ही मामला कोरिया जिले जनपद क्षेत्र क्रमांक 11 में भी देखने को मिला, शाम 5:00 मतदान समाप्त होने पर जहां पर रात के 1:30 तक गणना हुई, जबकि ऐसी गणना किसी भी बूथ पर नहीं देखने को मिला। छिंदिया का एक इकलौता ऐसा बूथ था जहां रात के 1:30 बजे तक गणना की गई जबकि चुनाव शाम को 5:00 बजे ही खत्म हो गया था। आखिर ऐसा क्या षड्यंत्र चल रहा था कि वहां पर गणना के समय को बढ़ा दिया गया, हारे हुए प्रत्याशी ने जो गंभीर आरोप लगाए हैं, यदि उस पर गौर किया जाए तो ऐसा लगता है कि निर्वाचन विभाग अपनी शक्तियों का गलत उपयोग ही करके हारे हुए प्रत्याशियों को जीत दिलाया है। हाई प्रोफाइल सीट जनपद सदस्य के लिए क्षेत्र क्रमांक 11 में तीन भूतपूर्व उपाध्यक्ष समेत 11 प्रत्याशी मैदान में थे। हारे हुए प्रत्याशी द्वारा लगाये गये आरोप के अनुसार उन्हें जानबूझकर सत्ता शासन का दुरुपयोग कर हराया गया है। यदि पीडि़त पक्ष के आरोपों पर गौर करें तो मामला संदेहास्पद बन जाता है। जनपद क्षेत्र क्रमांक 11 के 4 ग्राम पंचायत में से 3 ग्राम पंचायत में पर्याप्त लीड लेने के बाद केवल एक ग्राम पंचायत के एक पोलिंग बूथ से ही पूरा चुनाव हार जाना, इस पोलिंग बूथ पर मतदान 5:00 बजे समाप्त होने के बाद भी सबसे अंत में देर रात मतगणना होना, गणना एजेंट को मतदाता पर्ची से दूर बैठाना और उन्हें पर्चियां को देखने ना देना, बंद कमरे में सभी का मोबाइल बंद कर जमा कर लेना, लगाए गए आरोपों के अनुसार मामले में और संदेह को जन्म देता है।
गणना पत्रक में भी केवल संबंधित प्रत्याशी का उल्लेख, जबकि समस्त प्रत्याशियों द्वारा प्राप्त वोटों का होना चाहिए रिकॉर्ड
पंचायत चुनाव में मतदान संपन्न हो जाने के बाद मतदान केंद्र में ही वोटो की गिनती करने का प्रावधान है, एवं प्रत्याशियों द्वारा तय किए गए गणना एजेंट को गणना पत्रक दिया जाना अनिवार्य है। गणना पत्रक में संबंधित चुनाव में प्रत्याशियों द्वारा प्राप्त किए गए मतों का उल्लेख होता है, परंतु ग्राम पंचायत छिंदिया के पोलिंग बूथ क्रमांक 160, 161 और 162 में गणना एजेंट को समस्त प्रत्याशियों द्वारा प्राप्त किए गए मतों का गणना पत्र न देकर केवल एजेंट से संबंधित प्रत्याशी के मतों का लेखा-जोखा दिया गया। जबकि अन्य स्थान पर गणना एजेंट को समस्त प्रत्याशियों द्वारा प्राप्त मतों का लेखा-जोखा दिया गया। जो की क्षेत्र क्रमांक 11 के चुनाव में निष्पक्षता के प्रति संदेह को जन्म देता है।
क्या निर्दलीय प्रत्याशी को भाजपा के जिलाध्यक्ष व विधायक से टकराना पड़ा महंगा…जीत छीनकर दे दिया गया दूसरे प्रत्याशी को?
जब छत्तीसगढ़ में पंचायत चुनाव का बिगुल बजा था और आदर्श आचार संहिता लागू हुआ था, तो भाजपा के पुराने कार्यकर्ता विपिन बिहारी जायसवाल ने भारतीय जनता पार्टी जिला संगठन से क्षेत्र क्रमांक 11 के जनपद सदस्य के लिए टिकट की मांग की थी। और जब उन्हें पार्टी समर्थित प्रत्याशी नहीं बनाया गया तो विपिन बिहारी जायसवाल का वर्तमान भाजपा संगठन से अनबन की अपुष्ट खबरें आई थी। वर्तमान में विपिन बिहारी जायसवाल का कहना है कि मेरे पार्टी से बागी हो कर लड़ जाने के कारण मुझे पार्टी कार्यकर्ता और संगठन का कोई साथ नहीं मिला, बेवजह मेरा निष्कासन कर दिया गया और अब मेरे चुनाव जीतने की स्थिति में साजिश करके अंतिम चरणों में मुझे जिला स्तर के शीर्ष नेतृत्व द्वारा हारा हुआ घोषित कर दिया गया। अब विपिन बिहारी जायसवाल द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है या तो पुनर्गणना के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, कि वास्तव में वे जनता के द्वारा वोट न मिलने से हार गए या भाजपा जिला संगठन के हस्तक्षेप के कारण उन्हें हारा हुआ घोषित किया गया।
आखिर ऐसी क्या विपत्ति आन पड़ी थी कि छिंदिया पोलिंग बूथ पर रात के 1:30 बजे तक होती रही काउंटिंग?
जनपद सदस्य क्षेत्र क्रमांक 11 के चुनाव में ग्राम पंचायत छिंदिया में तीन पोलिंग बूथ बनाए गए थे, यहां प्रत्येक पोलिंग बूथ में लगभग 700 की संख्या में मतदाता थे और वोटिंग प्रतिशत भी लगभग 85 प्रतिशत था। यहां शाम 6:00 बजे तक दो पोलिंग बूथ में मतदान समाप्त हो चुका था और एक पोलिंग बूथ में यह मतदान रात्रि 7:00 बजे तक चला था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस मतदान केंद्र में सबसे पहले मतदान प्रक्रिया समाप्त हुई थी, उसकी गिनती सबसे अंत में रात्रि लगभग 1:30 बजे संपन्न हुई। जबकि अन्य मतदान केंद्र जो अगल-बगल ही थे, और जहां बाद में मतदान समाप्त हुआ था, उसकी गिनती रात्रि 11:00 से 12:00 तक हो चुकी थी। सोचने वाली बात यह है कि जहां गिनती सबसे पहले प्रारंभ होकर समाप्त होनी थी। वहां देरी किस कारण से हुई? ऐसी कौन सी विपत्ती आ पड़ी थी कि उसकी गिनती में विलंब हुआ? हारे हुए प्रत्याशी का आरोप है कि क्षेत्र के समस्त मतदान केन्द्रों की गिनती होने के बाद एक आंकड़ा बैठाया गया, तब तक मतदान केंद्र क्रमांक 161 की गिनती को रोक कर रखा गया था और उसके बाद मतदान केंद्र क्रमांक 161 की गिनती को सुनियोजित तरीके से प्रबंध किया गया।
जिस बूथ में मतदान सबसे पहले समाप्त हुआ, वहीं की गिनती सबसे अंतिम में
जनपद सदस्य क्षेत्र क्रमांक 11 के बूथ क्रमांक 160, 161 और 162, जो की एक ही प्रांगण में स्थित है। इसमें बूथ क्रमांक 161 की वोटिंग सबसे पहले समाप्त हो गई थी और कायदे अनुसार इसकी गिनती भी सबसे पहले हो जानी थी। परंतु इसी मतदान केंद्र की गिनती सबसे अंत में प्रारंभ हुई, इस मतदान केंद्र के रिजल्ट आने के पूर्व प्रत्याशी विपिन बिहारी जायसवाल आंकङो के अनुसार जीता हुआ तय माने जा रहे थे। पर अचानक ऐसा घटनाक्रम घटित हुआ की इस मतदान केंद्र के परिणाम के बाद उन्हें हारा हुआ बताया गया।
गणना एजेंटों को नहीं दिखाया गया पर्चा, दूर बैठने को कहा गया, बंद कमरे में मोबाइल भी कराया गया बंद…सूत्र
बूथ क्रमांक 161 में विपिन बिहारी जायसवाल की गणना एजेंट एवं एक अन्य प्रत्याशी के गणना एजेंट ने बताया कि बूथ के अंदर जाने के बाद कमरे को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। उनके मोबाइल ले लिए गए और बंद कर दिए गए थे। और उन्हें जहां गिनती हो रहे थे उससे दूर दीवार से लगाकर बेंच पर बैठाया गया था, जहां से मतदाता पर्ची पर लगे निशान को देख पाना संभव नहीं था। क्योंकि उन्हें स्वयं 7:00 बजे से ही अंदर बुला लिया गया था इसलिए उन्हें अन्य बूथ में क्या परिणाम आया, इसकी कोई जानकारी नहीं थी। फिर भी उन्होंने अत्यंत कम मत प्राप्त होने की जानकारी होने पर पुनः गणना करने एवं एक बार पर्चियों को देख लेने की बात कर्मचारियों से की, जिसे नकार दिया गया और अगले दिन जिला निर्वाचन आयोग में जाने को कहा गया।
क्या इसलिए लेट से की गई गिनती की पुनर्गणना से बचा जा सके?
अब विपिन बिहारी जायसवाल का कहना है कि क्या गिनती एक पोलिंग बूथ की इसलिए देर रात की गई जिससे वहां पुनर्गणना से बचा जा सके। उनका आरोप है कि यही सत्य है। पुनर्गणना से बचने के लिए ही मतगणना देर रात की गई।
पुनर्गणना का प्रावधान खत्म,न्यायालय पर निर्वाचन विभाग ने छोड़ा प्रत्याशियों के किस्मत का फैसला?
लगभग सभी जगह से आगे होने के बाद केवल एक पोलिंग बूथ में पीछे होने की खबर और अप्रत्याशित हार के बाद जब प्रत्याशी ने पुनर्गणना की मांग की तो इसे नकार दिया गया और पुनर्गणना के लिए निर्वाचन विभाग ने न्यायालय के शरण में जाने की सलाह दी। जबकि रिकाउंटिंग से तत्काल मामला क्लियर हो सकता था और विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। अब हारे हुए प्रत्याशी ने न्यायालय जाने की बात की है और न्यायालय से पुनर्गणना करने की गुहार लगाने की तैयारी में है।