कोरिया/पटना,@नगर विकास समिति का प्रत्याशी भाजपा कांग्रेस की बढ़ा सकता है परेशानी?

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-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,16 जनवरी 2025 (घटती-घटना)। नगरी निकाय चुनाव की तिथि अभी निश्चित नहीं हुई है, अंतिम प्रक्रिया का दौर चल रहा है वहीं कभी भी आचार संहिता लग सकता है, इस बीच यह भी बातें तय हो गई है की नगरीय निकाय चुनाव में बहुत कम समय मिलेगा और कम समय में ही भाग्य आजमाइश प्रत्याशियों की चलेगी, कोरिया जिले में सिर्फ पटना में ही नगर पंचायत का चुनाव होना है जो नगरीय निकाय चुनाव है, और पहली बार पटना नगर पंचायत होने के बाद पहला चुनाव होने वाला है, जिस वजह से यह चुनाव काफी अहम हो गया है राष्ट्रीय पार्टियों के लिए भी और स्थानीय स्तर के प्रत्याशियों के लिए भी, जहां राष्ट्रीय पार्टी भाजपा कांग्रेस अपने प्रत्याशी चयन को लेकर असमंजस की स्थिति में है वहीं पटना की नगर विकास समिति अपना प्रत्याशी भी जल्द तय कर सकती है। वहीं जहां कांग्रेस प्रत्याशी चुनने का जिम्मा लगभग पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष यवत सिंह पर छोड़ रखी है, जिसमें यह माना जा रहा है कि उनका प्रत्याशी लगभग तय है वहीं भारतीय जनता पार्टी पूर्व सरपंच को पार्टी में शामिल कर उस पर दाव लगाने की फिराक में है, वही इस समय जन चर्चाओं का विषय यह बन गया है कि पूर्व सरपंच के भाजपा में जाने से उनकी जीत की संभावनाएं कम होने लगी है, वहीं ऐसे में नगर विकास समिति का अपना प्रत्याशी उतरना कहीं ना कहीं पूरे नगर पंचायत चुनाव को त्रिकोणीय बना देगा, वैसे नगर विकास समिति का गठन या उसके स्थापना का उद्देश्य चुनाव लड़ना ही था यह पहले से ही तय था, यह अब समझा जा सकता है और यह माना जा सकता है कि नगर विकास समिति का गठन केवल चुनाव उद्देश्य से किया गया था और गठन का उद्देश्य राजनीतिक रोटी सेंकना था और वह भी तब जब राजनीतिक दलों से समिति से जुड़े लोगों को भाव न मिले।
खैर नगर विकास समिति का ही प्रत्याशी सर्वमान्य हो जायेगा यह कहना जल्दबाजी होगी या बहुत बड़ी हड़बड़ी वाली बात होगी, क्योंकि उससे जुड़ा कौन व्यक्ति अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को अपने घर की महिला सदस्य के सहारे पूर्ण करने का प्रयास करेगा या अपना दावा महिला सदस्य के नाम के सहारे आगे रखेगा वहीं वह ही स्वीकार होगा, समिति द्वारा और उसे ही ग्राम की जनता चुनेगी यह भी अभी से कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि पटना का राजनीतिक समीकरण काफी हटकर बनता है जिसे जल्दी से समझना मुश्किल, वैसे भी नगर विकास समिति में सभी राजनीतिक दलों के लोग शामिल हैं और वहीं इसमें शामिल लोग सोशल मीडिया में ही अभी तक प्रसिद्ध हैं, वहीं एक दो उपलब्धि भी उनके नाम के आगे यदि जुड़ी है वह राजनीतिक जुड़ी है भाजपा से ही उन उपलब्धियों का नाता है वैसे के इस समिति में काफी प्रतिष्ठित लोग हैं आम लोग इस समिति में शामिल नहीं है, जो अपना पढ़ा लिखा प्रत्याशी जनता के सामने रखेंगे वैसे सभी का प्रत्याशी पढ़ा लिखा होगा यह भी तय है। वैसे नगर विकास समिति का प्रत्याशी दोनों राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के लिए मुश्किल बनेगा, नहीं बनेगा यह देखने वाली बात होगी।
80 प्रत्यशी चेहरे पर मिलेगा वोट 20 प्रत्याशी सिंबल का होगा खेल
इस चुनाव में 80 प्रतिशत मत चेहरे के आधार पर मिलेगा। कौन कितना सामाजिक मिलनसार और सर्व हित में सोचने वाला होगा कौन सही होगा सरल सहज होगा स्वतंत्र कार्य करेगा बैरियर जहां नहीं होगा यह आंकलन इस चुनाव में मतदाता जरूर करेंगे। चेहरा मुख्य आधार लोगों के लिए होगा अध्यक्ष या पार्षद के लिए चुनाव करते समय, मतदाता यह देखकर मतदान करेंगे कि कौन कितना उसके लिए सहज और सरल उपलब्ध होगा। 20 प्रतिशत ही मत दलीय आधार पर मिलने की संभावना है। अब देखना है कौन किस तरह इस समीकरण को साध पाता है और जीत दर्ज कर पाता है।
आखिर ऐसी कौन सी वजह थी की चोरी-छुपे भाजपा में पूर्व सरपंच को होना पड़ा शामिल…भाजपा का मंच साझा करने के बाद उठा सवाल
पूर्व सरपंच ने चोरी छिपे भाजपा में प्रवेश किया ऐसा देखने सुनने को मिल रहा है। अब यदि ऐसा सही है तो यह सवाल भी लाजमी है कि क्यों चोरी छिपे भाजपा में प्रवेश को मजबूर हुई पूर्व सरपंच? पूर्व सरपंच को हाल ही में पटना में भाजपा के नए जिलाध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम में भाजपा के मंच पर देखा गया। पूर्व सरपंच का भाजपा प्रवेश धूमधाम से होना था समर्थकों के साथ होना था वहीं खुलेमंच पर वरिष्ठ सभी भाजपाइयों के साथ होना था जिसकी बजाए चोरी से भाजपा प्रवेश हुआ यह चर्चा और आश्चर्य का विषय लोग मान रहे हैं, वहीं इसे किसी नौसिखिए नेता की वाहवाही वाली बात लोग मानकर मजे ले रहे हैं और कह रहे हैं कि अपनी वाहवाही के चक्कर में किसी ने पूर्व सरपंच का राजनीतिक भविष्य ही चौपट कर दिया?
क्या नगर विकास समिति अपना प्रत्याशी चुनाव में उतारकर उसे जीत दिला ले जाएगी?
नगर विकास समिति का गठन राजनीतिक महत्वाकांक्षा व शहर के विकाश की पूर्ति के लिए किया गया था, यह तब तय हो जायेगा जब वह अपना प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारेगी। अब देखना है वह अपने प्रत्याशी को जीत दिला ले जा पाती है कि नहीं? वैसे नगर विकास समिति के सदस्यों में अधिकाशं प्रतिष्ठित और संभ्रांत बड़े लोग शामिल हैं वहीं आम लोग निचले तबके के वंचित समूह के लोग इस समिति के उन सदस्यों में शामिल नहीं जिनके साथ इनकी तस्वीर देखी जाती हो। नगर विकास समिति के सदस्यों की तरफ से प्रत्याशी भी आम नहीं खास होगा और वह भी प्रतिष्ठित साथ ही उच्च वर्ग से होगा यह तय है।
क्या पूर्व सरपंच का चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल होने की खबर उन्हें चुनाव में नुकसान पहुंचाएगा?
नगर पंचायत का गठन होते ही पूर्व सरपंच ने भाजपा का दामन थाम लिया। अब ऐसा माना जा रहा है कि उनकी जीत की संभावनाओं को झटका लगा है। वह निर्दल होकर मजबूत होती वहीं वह जैसे ही भाजपा में पहुंची हैं प्रवेश कर पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर वैसे ही वह सबसे कमजोर प्रत्याशी हो गई हैं क्या ऐसा लोगों का आंकलन सही है? वैसे माना जा रहा था कि वह निर्दल होकर पूर्व सरपंच मजबूत होती और वह शायद चुनाव में टक्कर की स्थिति में होती जीत दर्ज कर जाती लेकिन भाजपा में जाकर या किसी भी राजनीतिक दल में जाकर उन्होंने अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार ली खुद की ही हार तय कर ली? शायद भाजपा में नहीं गई होती तो हो सकता था कि नगर विकास समिति भी पूर्व सरपंच को अपना प्रत्याशी निर्दलीय तोरपर मान लेती, पर अब स्थिति अलग हो गई है और स्थिति इसलिए भी अलग हो गई है क्योंकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा में जॉइनिंग सिर्फ अध्यक्ष पद की लालसाही ले गई है, पूर्व सरपंच को निचले तपके के लोग भी पसंद किया करते थे, पूर्व सरपंच आम लोगों से लेकर सबके लिए एक सूटेबल प्रत्याशी मानी जाती थी पर अब पार्टी वाइज स्थितियां बदलती नजर आ रही।
यदि भाजपा कांग्रेस पहले चुनाव में ही अपना प्रत्याशी नहीं जीता पाई,प्रथम नगर पंचायत पटना चुनाव उनके लिए काला अध्याय होगा?
भाजपा कांग्रेस के लिए यह चुनाव करो मरो की स्थिति वाला चुनाव होगा। यदि इस चुनाव में दोनों राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों को जीत नहीं दिला सके तो यह चुनाव उनके लिए काला अध्याय बन जाएगा। वैसे इस चुनाव में कौन सा दल भारी पड़ेगा कौन जीत दर्ज करेगा यह देखने वाली बात होगी। वैसे भाजपा सत्ताधारी दल है वह पूरी ताकत झोंक देगी और कांग्रेस भी पीछे नहीं रहने वाली। निर्दल या नगर विकास समिति का प्रत्याशी जीत दर्ज करेगा की वोट कटवा बनेगा यह भी देखने वाली बात होगी?
नगर विकास समिति में हर राजनीतिक दल से लोग,क्या वह राजनीतिक दल को ही अपने पहुंचाएंगे चोट?
नगर विकास समिति में सभी दलों के लोग हैं, अब क्या वह अपनी या अपने साथी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए अपने ही राजनीतिक दल को चोट पहुंचाएंगे? क्या वह अपने राजनीतिक दल से गद्दारी करेंगे जहां उनकी आस्था और विश्वास है वर्षों से जहां उनका नाता है। भाजपा कांग्रेस के लिए भी ऐसी स्थिति में एक बात विचारणीय हो जाएगी वह यह की क्या वह ऐसे लोगों पर पुनः विश्वास करे?
सभी वार्डो से क्या फिर पार्षद पद के लिए भी उम्मीदवार उतारेगी नगर विकास समिति?
नगर विकास समिति यदि अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार उतारती है तो उसे हर वार्ड से पार्षद पद लिए भी उम्मीदवार उतारना पड़ेगा यदि वह खुद को नगर विकास की सच्ची अवधारणा वाला साबित करना चाहेगी वहीं यदि वह केवल अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार उतारेगी वह स्वार्थ वाली राजनीतिक पंक्ति में खड़ी हो जाएगी। अब देखना है कि नगर विकास समिति का अंतिम निर्णय क्या होने वाला है चुनाव संदर्भ में। वार्ड पार्षद बगैर चुनाव लड़ना नगर विकास समिति की गलती हो सकती है।
नगर विकास समिति क्या सामान्य वर्ग से उम्मीदवार उतारने राजनीतिक दलों से कर रही किनारा?
नगर विकास समिति यदि चुनाव लड़ती है तो उसका प्रत्याशी कौन होगा यह भी ध्यान देने वाली बात होगी। नगर विकास समिति से यदि सामान्य वर्ग से कोई उम्मीदवार होता है तो यह माना जाएगा कि वह सामान्य वर्ग को जीत दिलाने मात्र के लिए राजनीतिक दलों से किनारे जाकर अलग प्रत्याशी मैदान में उतार रही है वहीं यदि वह अन्य किसी वर्ग से प्रत्याशी चयन करती है तब ऐसा मानना गलत होगा।


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