- कोरबा लोकसभा के जनप्रतिनिधि नेता दूसरे राज्यों में मेहनत करते दिखे पर अपने प्रत्याशी के लिए वह मेहनत उनकी नहीं दिखी अब उनके प्रत्याशी में इस बात से रोष दिख रहा…
- कोरबा लोकसभा की भाजपा प्रत्याशी का कोरिया एमसीबी संगठन व जनप्रतिनिधियों से नाराजगी की बात सामने आ रही…
- लोकसभा चुनाव के बाद जिले के संगठन में होगा बदलाव,कोरबा से भाजपा लोकसभा प्रत्याशी ने दिया बयान:सूत्र
- स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर संगठन पर नाराज हुई सरोज पाण्डेय,अपनी जीत को लेकर भी कही बड़ी बात

-रवि सिंह-
कोरिया,30 मई 2024 (घटती-घटना)। कोरबा लोकसभा का चुनाव भले ही संपन्न हो चुका है पर अभी परिणाम आना बाकी है इस समय जो स्थिति निर्मित है वह कहीं ना कहीं अलग ही दास्तान बयां कर रही है, जिस समय कोरबा लोकसभा चुनाव नहीं हुआ था और प्रत्याशी कोरिया एमसीबी सहित कोरबा के सभी विधानसभा के जन प्रतिनिथि व संगठन से अपेक्षा व भरोस करके बैठी थी की काफी मेहनत करेंगे पर ऐसा होता दिख नहीं, वहीं अब जब कोरबा लोकसभा क्षेत्र के जन प्रतिनिथि व संगठन के नेताओं को दूसरे राज्यों के प्रत्याशी के लिए प्रचार करने भेजा गया वहां पर वह काफी मेहनत करते देखे जा रहे हैं और वह उन प्रत्याशियों को जीतने का दावा भी कर रहे हैं,यह बात आप कोरबा लोकसभा के प्रत्याशी को भी पसंद नहीं आ रही और लाजमी है कि किसी को भी यह बात पसंद नहीं आएगा,क्योंकि कोरबा लोकसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि व संगठन के नेता अपने प्रत्याशी के लिए वैसे काम करते नहीं दिखे जैसा उन्हें करना चाहिए था जिसे लेकर कोरबा लोकसभा के प्रत्याशी में काफी आक्रोश है जो अब दिखने लगा है, मंगलवार को कोरबा लोकसभा संसदीय क्षेत्र के कोरिया जिले में भाजपा की उम्मीदवार व भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पाण्डेय बैकुंठपुर पहुंचीं। सूत्रों का कहना है की लगभग डेढ़ घंटे उन्होंने भाजपा संगठन के पदाधिकारियों की क्लास ली,वो काफी नाराज नज़र आई,उन्होंने कहा कि वो चुनाव जीत रही है। संगठन के कुछ पदाधिकारियों पर उन्होंने नाराजगी जताई, कहा कि चुनाव के बाद कोरिया संगठन में ओवर ऑयलिंग की जाएगी, बदलाव होगा, उसके बाद आपको बहुत कुछ बदलाव नज़र आएंगे। वही कोरिया जिले में मतदान के बाद स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए भाजपा के पदाधिकारियों द्वारा किसी को नियुक्त नही किए जाने पर नाराजगी जताई, ऐसा उन्होंने एमसीबी जिले के संगठन के पदाधिकारियों को लेकर भी कहा। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपना काम कर रहा है पर हमको अपनी ओर से ईवीएम की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए। स्ट्रांग रूम के बाहर भाजपा के लोगो को पहरा देना था।
कुछ ने समाज प्रमुखों के नाम पर भी प्रत्याशी को खर्च में डाला,प्रत्याशी के लिए कोरिया जिला खर्चीला हुआ साबित
कुछ भाजपा नेताओं ने प्रत्याशी को समाज प्रमुखों के नाम पर भी खर्च में डाला,कुल मिलाकर प्रत्याशी के लिए कोरिया जिला खर्चीला रहा। वैसे बताया जा रहा है की जो लोग प्रत्याशी से लोगों को मिलवा रहे थे समाज प्रमुखों के नाम पर वह अपना उल्लू सीधा कर रहे थे वहीं वह वर्तमान विधायक को कहीं न कहीं बेकाम का साबित करना चाह रहे थे। वैसे प्रत्याशी सब कुछ भांप चुकी हैं।
प्रत्याशी की जीत मोदी की गारंटी पर है निर्भर,विभाजित कोरिया जिले में नहीं हुआ उनके लिए बेहतर मेहनत
भाजपा कोरबा लोकसभा प्रत्याशी की जीत मोदी की गारंटी पर ही कम से कम विभाजित कोरिया जिले में निर्भर है। दोनों जिले में उनके लिए समर्पण भाव से मेहनत का अभाव नजर आया। कार्यकर्ता जहां संसाधन ढूंढता रहा वहीं जिम्मेदार हवा हवाई दौड़ लगाते रहे। वैसे दो वर्गों का बेहतर उन्हे समर्थन मिला है वहीं कई अन्य वर्ग उन्हे समर्थन नहीं किया है।
सरगुजा व कोरबा संभाग के जनप्रतिनिधि नेता दूसरे राज्यों के लोकसभा प्रत्याशी को जीत दिला देंगे या फिर अपने लोकसभा के प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करा चुके?
सरगुजा और कोरबा लोकसभा क्षेत्र के जिन भाजपा नेताओं को अन्य राज्यों में लोकसभा प्रत्याशियों को जिताने का जिम्मा मिला हुआ है वह क्या अपने जिम्मेदारी वाले लोकसभा सीट के पार्टी उम्मीदवार को जीत दिला सकेंगे यह बड़ा सवाल है वहीं वह अपने लोकसभा प्रत्याशी के लिए कितनी मेहनत करके गए हैं यह भी एक बड़ा प्रश्न है। कोरबा सरगुजा में प्रत्याशियों के जीत की यदि वजह कोई बनेगा तो वह केवल मोदी नाम का सहारा बनेगा जनप्रतिनिधि नेताओं ने सरगुजा और कोरबा लोकसभा क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी के लिए वह मेहनत नहीं की जो उन्हे करना था यह कहना उचित होगा।
जिस तर्ज पर विधानसभा में भाजपाइयों ने मेहनत की उसके मुकाबले लोकसभा चुनाव में मेहनत नहीं दिख
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में काफी फर्क देखा गया,जिस तर्ज पर विधानसभा चुनाव में भाजपाइयों ने मेहनत की थी उसके मुकाबले लोकसभा में कुछ माहौल अलग था,लोकसभा प्रत्याशी सरोज पाण्डेय को अविभाजित कोरिया की तीनों सीट पर पूरा जोर लगाना पड़ गया था, उनकी टीम को लोगो को मनाने में खूब मेहनत करना पड़ा, और उन्होंने देखा कि संगठन में काफी कुछ ठीक नही चल रहा।
करुणा शुक्ला हार गई थी चुनाव
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में तब की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष करुणा शुक्ला ने भाजपा की ओर से चुनाव लड़ा था,जिसमे डॉ चरणदास महंत ने जीत हासिल की थी, करुणा शुक्ला भी कोरिया संगठन से काफी नाराज होकर गई थी,तब उन्होंने संगठन में काफी शिकायत की पर उनकी सुनी नही गई,अंत मे थक हार कर उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस में चली गई थी। अब देखना है कि सरोज पांडेय कितनी भारी पड़ती है।
कोरिया जिले में संगठन जिलाध्यक्ष सहित दो-तीन लोगों तक ही नजर आया चुनाव के दौरान
वैसे कोरिया जिले की बात की जाए तो जिले में भाजपा का संगठन लोकसभा चुनाव के दौरान केवल दो तीन लोगों तक ही नजर आया। पूरे प्रचार अभियान में यदि खुद प्रत्याशी ने ताकत नहीं झोंकी होती तो संगठन के मत्थे वह चुनाव में कहीं भी दौड़ में नहीं थीं। पटना में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम भी जब असफल हुआ खुद प्रत्याशी यह भांप गईं की कोरिया जिले में वह जब तक स्वयं ध्यान नहीं देगीं परिणाम सार्थक नहीं होगा और वही हुआ भी अंत में जब उन्होंने मोर्चा सम्हाला तब संगठन के कर्मठ कार्यकर्ता एकजुट हुए और कुछ मेहनत मैदान में नजर आया।
प्रत्याशी की जीत से ज्यादा परिवार के लोगों को मंच पर लाने में व्यस्त दिखा भाजपाइयों का जिम्मेदार खेमा
भाजपा प्रत्याशी की जीत के लिए जितनी मेहनत जिम्मेदार भाजपाई करते नजर नहीं आए उससे ज्यादा यह देखने को मिला की परिवार के लोग मंच पर आगे नजर आएं यह जिम्मेदार भाजपाइयों की मंशा नजर आती रही। एक तरह से चुनाव प्रचार के दौरान परिवारवाद की छवि मंचो पर कोरिया जिले में नजर आई वहीं कर्मठ भाजपाई उपेक्षित नजर आए। कुल मिलाकर प्रत्याशी ने जिसपर विश्वास किया सभी ने अपना उल्लू साधने का भरसक प्रयास किया उनके संसाधनों के बलबूते।