कोरिया @ईद पर मुस्लिम समाज के लोगों ने ईदगाह मेंईद की नमाज अदा कर अमन की दुआ मांगी

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धूमधाम से मनाई गई ईद, ईदगाह पर ईद की पढ़ी गई नमाज।

कोरिया 11 अप्रैल 2024(घटती-घटना)। बुधवार शाम भारत में ईद के चांद का दीदार हुआ और लोगों ने एक दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई दी। वहीं भारत में गुरुवार को ईद-उल-फितर का त्योहार धूमधाम से मनाया गया, ईद का त्योहार सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक है ईद के मौके पर मुस्लिम लोग एक दूसरे को मीठा खिलाकर ईद की बधाई देते देखे गए। ईद पर मुस्लिम समाज के लोगों ने ईदगाह में ईद की नमाज अदा कर अमन की दुआ मांगी और फिर एकदूसरे को गले लगाकर बधाई देते नजर आ रहे हैं।
ज्ञात हो की रमजान का महीना पूरा होने के बाद जब शव्वाल महीने की पहली तारीख शुरू होती है तो उस दिन ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है, भारत में यानी गुरुवार 11 अप्रैल को ईद का त्योहार मनाया गया, ईद का त्योहार समाज में एकता, सद्भावना और धार्मिकता के महत्व को बढ़ावा देता है, इसके माध्यम से मानवता के मूल्यों की प्रतिष्ठा की जाती है और सभी के बीच एक अद्वितीय बंधन का उत्सव मनाया जाता है। पुरे जिले में रमजान का महीना गुजरने के बाद ईद के दिन बेहद खुशनुमा माहौल देखने को मिल, ईद पर सबसे पहले ईदगाह जाकर नमाज अदा की गई, जिसके बाद एक दूसरे से मुलाकात का शील शिला शुरु होआ, लोग एक दूसरे के घर जाकर खीर, सेवईं या शीर खुरमा खाकर मुंह मीठा कराया और ईद की बधाई दी, ईद के त्योहार पर लगभग सभी लोग नए कपड़ों में नजर आए हैं।
भीषण गर्मी होने के
बावजूद भी ईद के त्यौहार के उत्साह में नहीं दिखी कोई
टेंगनी, ग्राम पंचायत टेंगनी में ईद का त्यौहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया, ईद के मौके पर इस साल लोगों में अलग ही उत्साह देखने को मिला, भीषण गर्मी होने के बावजूद भी लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी, आजिज़ी मस्जिद का इमाम शायरे इस्लाम मौलाना अमीनुल्लाह बलरामपुरी ने बताया पवित्र माहे रमजान में की गई इबादत के इनाम के रूप में लोगों को ईद का मुबारक दिन नसीब होता है, सभी ने मिलकर बड़े ही धूमधाम के साथ ईद का त्यौहार मनाया, ईद के दिन सुबह-सुबह लोग नई-नई पोशाकों में नजर आए, खुशनुमा माहौल में हजारों लोगों ने पूरी अकीदत और एहतेराम के साथ ईद की नमाज़ अदा की गई, इस विशेष नमाज के दौरान अज़ीज़ी मस्जिद के ग्राउंड में देश की खुशहाली और अमन के लिए दुआ मांगी गई , नमाज के बाद लोग एक दूसरे को गले लगा करके मुबारकबाद दी, ईद के मौके पर बच्चों में खासा उत्साह देखा गया, परंपरागत पोशाकों में सजे बच्चों ने भी बड़ो के साथ मिलकर ईद की खुशियां बाटी, ईद की नमाज़ में टेंगनी, गिरज़ापुर, पंडोपारा के लोग भी शामिल थे, मौलवी साजिद खान सदर अजीजी मस्जिद अदुल रईस खान सदर महबुबिया अंजुमन कमेटी मोहम्मद पीर खान नायब सदर मोहम्मद शमीम अंसारी सेक्रेटरी मोहम्मद परवेज अफजल नायाब सेक्रेटरी मास्टर असलम खान खजांची शाहरुख खान नायाब खजांची व अन्य हजार लोग तक शामिल थे,इस बार ईदगाह और मस्जिद शहीद हो कर नई अजीजी मस्जिद तामीर का काम जारी है, इसी वजह से मस्जिद के ग्राउंड में ही ईद की नमाज अदा की गई, भीषण गर्मी के चलते नमाज सुबह 8ः30 बजे शायरे इस्लाम मौलाना अमीनुल्लाह बलरामपुरी द्वारा अदा करवाई गई, इस बार ईदगाह ग्राउंड में शायर मौलाना अमीनुल्लाह बलरामपुरी ने ऐसा नात सुनाया की लोग सुनकर बहुत खुश हुए और ईनाम से नवाजे गए, फिर नमाज के बाद भारत वासियों के लिए अमन चैन भाईचारा कायम रहने की दुआ मांगी गई।
ईद की नमाज ईदगाह पर क्यों पढ़ी जाती है?
मौलाना अमीनुल्लाह बलरामपुरी ने बताया की कई जगहों पर ईद की नमाज मस्जिदों में भी पढ़ी जाती है लेकिन तरीका तो यही है कि नमाज हमेशा ईदगाह पर ही पढ़ी जानी चाहिए, ईदगाह पर नमाज पढ़ना ही अच्छा माना जाता है, इस्लाम से जुड़े लोगों का मानना है कि पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब से पहले ईदगाह पर जाकर नमाज पढ़ने का चलन नहीं था, उनके समय से ही ईदगाह पर नमाज पढ़ने की शुरुआत हुई, इस्लामिक जानकारों का कहना है कि ईदगाह पर नमाज अदा करने से न सिर्फ इस्लामिक कल्चर बना रहता है, साथ ही अलग-अलग इलाकों के लोग एक जगह पर नमाज अदा करते हैं तो इससे भाईचारा और सौहार्द भी बढ़ता है, ईद की नमाज में गरीब हो या अमीर, हर कोई गले लगकर ही एक दूसरे को मुबारकबाद देता है, इसके साथ ही नमाज के बाद पूरे विश्व की शांति के लिए दुआ की जाती है, बद्र की जंग जीतकर जब पैगंबर मुहम्मद मक्का से मदीना पहुंचे थे तो मीठा खाकर लोगों ने जीत का जश्न मनाया था, यही वजह है कि त्योहार को मीठी ईद भी कहा जाता है, ईद के मौके पर खानपान से लेकर कपड़ों तक, काफी ख्याल रखा जाता है, हालांकि, यह कहीं नहीं लिखा है कि ईद पर नए कपड़े पहनने चाहिए, हां लेकिन आपके कपड़े साफ जरूर होने चाहिए, इसके साथ ही इत्र लगाना भी आपकी मर्जी है, अगर आप नहीं लगाते हैं तो कोई जरूरी नहीं है, इत्र लगाना सुन्नत है इसलिए अच्छा माना जाता है।


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