बैकुण्ठपुर 21 दिसम्बर 2021 (घटती-घटना)। सिविल सेवा आरचण संहिता का हवाला देते हुये शासकीय शिक्षक लगातार राजनैतिक कार्यक्रम व गतिविधियों में भाग लेने पर शिक्षक के विरूद्ध जिला शिक्षा अधिकारी सहित कलेक्टर को शिकायत किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार प्राथमिक शाला में पदस्थ जनपद पंचायत बैकुण्ठुपर के उपाध्क्ष पति महेश साहू पर ग्राम पंचायत चिरगुड़ा के सरपंच संगीता सिंह सहित शिकायतकर्ता अरविन्द सिंह ने सिविल सेवा नियम का हवाला देते हुये शिक्षक महेश साहू द्वारा राजनैतिक कार्यक्रमों सहित अन्य गतिविधियों भाग लेने पर कोरिया कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी कोरिया से शिकायत किया है। इस शिकायत में शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया है कि शिक्षक पूर्ण रूप से कांग्रेस विचारधारा का व्यक्ति है। इनके द्वारा बैकुण्ठपुर विधायक एवं संसदीय सचिव अंबिका सिंहदेव के साथ स्कूल समय में रायपुर दौरे के साथ क्षेत्र के अन्य राजनैतिक कार्यक्रमों में कई बार देखा गया है। इनकी सक्रियता का परिणाम है कि इनकी पत्नी आशा साहू को जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर का उपाध्यक्ष बनवाने में सफल हुये और इनके द्वारा अपनी पत्नी को उपाध्यक्ष बनवाने के बाद जनपद की बैठकों एवं अन्य कार्यो में इनकी संलिप्ता रहती है। इनके द्वारा जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायतों के सरपंच-सचिवों पर दबाव बनाकर निमार्ण कार्यो में ठेकेदारी भी शिक्षक महेश साहू द्वारा की जा रही है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि यह अपने मूल पद स्थापना स्थल पर कभी कभार जाते है व कई दिनों का एक साथ उपस्थिति पंजी पर हस्ताक्षर कर अपना राजनैतिक धौंस दिखाकर स्कूल समय पर वापस आ जाते है। उक्त शिकायत पर शिकायतकर्ता ने बताया कि ग्रामीण अंचलो के बच्चों का शिक्षा स्तर व भविष्य को ध्यान में रखते हुये इनके इस कृत्य पर सिविल सेवा नियम के विपरीत कार्य करने पर शिक्षक के खिलाफ उचित कार्यवाही किया जावे।
शिक्षक नेता की देखादेखी अन्य शिक्षक भी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करते
शिक्षक द्वारा इस तरह की गतिविधि देखे जाने पर उनके देखादेखी कई शिक्षक अपने पद में रहते हुये नेता बने बैठे है। इनके नेता बनने पर हर्ज नहीं किन्तू यह अपने शिक्षकिय दायित्व का निर्वहन पर ईमानदारी नहीं बरत रहे है। एक शिक्षक के ऐसा बर्ताव से उनके ही कलिगों में मनोवैज्ञानिक रूप से अपने काम के प्रति उदासिनता होती है। शिक्षक समाज में अपनी अलग पहचान रखता है और बच्चों का भविष्य उनके हाथों में निहित है यदि शिक्षकों को राजनैतिक कार्यक्रम के साथ उनकी रूचि राजनिति मे है तो ऐसे शिक्षकों को अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए क्योंकि उनको बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का कोई हक नहीं।