नई दिल्ली@ पेड़ों की कटाई को सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

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हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को तत्काल अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
कोर्ट के आदेश तक कटाई पर रोक लगाने का आदेश
नई दिल्ली,03 अप्रैल 2025 (ए)।
उच्चतम न्यायालय ने हैदराबाद विश्वविद्यालय से सटी 400 एकड़ जमीन पर पेड़ों की कटाई मामले का संज्ञान लेते हुए तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को कांचा गाचीबोवली वन क्षेत्र का तत्काल दौरा करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तेलंगाना के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि शीर्ष अदालत द्वारा अगला आदेश पारित किए जाने तक कांचा गाचीबोवली वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं दी जाए।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने उठाया मुद्दा
पीठ ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को अपराह्न 3.30 बजे तक अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा और कहा कि मामले की सुनवाई अपराह्न 3.45 बजे होगी। इस मुद्दे को वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने पीठ के समक्ष उठाया, जो पर्यावरण से संबंधित मामले में न्यायमित्र के रूप में उच्चतम न्यायालय की सहायता कर रहे हैं।पीठ ने अपने आदेश में कहा कि न्यायमित्र कई समाचार रिपोर्टों को उसके संज्ञान में लाए हैं,जिनमें वहां बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का चित्रण किया गया है। पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए,हम तेलंगाना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश देते हैं कि वह तत्काल संबंधित स्थल का दौरा करें और आज अपराह्न 3.30 बजे तक अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करें। ’’
पीठ ने उच्चतम न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि वह उसके आदेश को तत्काल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को सूचित करें, जो तत्काल उस पर कार्रवाई करेंगे। पीठ ने कहा, ‘‘हम तेलंगाना के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि जब तक इस न्यायालय द्वारा अगला आदेश पारित नहीं किया जाता है, कांचा गाचीबोवली वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।’’
हाई कोर्ट की सुनवाई पर रोक नहीं
पीठ को बताया गया कि तेलंगाना उच्च न्यायालय भी इसी मामले पर सुनवाई कर रहा है। उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा, ‘‘ हम यह स्पष्ट करते हैं कि हम तेलंगाना उच्च न्यायालय में जारी कार्यवाही पर रोक नहीं लगा रहे हैं।’’
‘जंगल की जमीन’ बचाने के लिए तेलंगाना सरकार से भिड़ रहे छात्र
हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का दावा है कि विवादित इलाके में वनस्पतियों और जीवों की 450 से ज्यादा प्रजातियां हैं। मगर सरकार उस जमीन को जंगल नहीं मानती है लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने वहां पेड़ गिराने पर रोक लगा दी है।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में 400 एकड़ जमीन को लेकर विवाद हो रहा है। यह जमीन हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास स्थित है। विश्वविद्यालय और राज्य सरकार दोनों इस जमीन पर अपना दावा कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य सरकार आईटी पार्क बनाने के लिए इस जमीन को खाली करवाना चाहती है। वहीं, विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह जंगल की जमीन है और इसे साफ करने से पर्यावरण को नुकसान होगा।


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