@ युद्ध विराम की मांग, शांति वार्ता को भी तैयार…
@ नक्सलियों ने केंद्र सरकार से एंटी नक्सल ऑपरेशन को रोकने का आग्रह किया
@ नक्सलियों ने सशर्त शांति वार्ता की मांग की, केंद्र सरकार से बातचीत की उम्मीद…
@ अमित शाह 4 अप्रैल की शाम को छत्तीसगढ़ पहुंचकर अधिकारियों से चर्चा करेंगे…
जगदलपुर,02 अप्रैल 2025 (ए)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नक्सल प्रभावित बस्तर के दौरे से पहले नक्सलियों ने तत्काल युद्ध विराम और सशर्त शांति वार्ता की मांग की है। नक्सलियों के प्रवक्ता अभय की ओर से जारी बयान में केंद्र सरकार से एंटी नक्सल ऑपरेशन को रोकने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही सुरक्षा बलों की वापसी और माओवादी विरोधी अभियानों को रोकने की मांग की गई है।
चार अप्रैल की शाम को छत्तीसगढ़ आएंगे अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चार अप्रैल की शाम रायपुर पहुंचेंगे। अगले दिन पांच अप्रैल को गृह मंत्री शाह नक्सल प्रभावित बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के दौरे पर रहेंगे, जहां वे पंडुम महोत्सव के समापन
कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यहां वे मां दंतेश्वरी के दर्शन करेंगे। इसके अलावा एंटी-नक्सल अभियान के ऑपरेशन कमांडरों के साथ संवाद भी करेंगे।
छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करने के लिए अभियान चला रखा है। लगातार नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन और उनके सरेंडर को देखकर नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी डरी हुई है।
मुख्य धारा में आकर सकारात्मक योगदान दें नक्सली:उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एक भी गोली चलना नहीं चाहती है। न ही केंद्र और न ही राज्य सरकार इस दिशा में हिंसा को बढ़ावा देना चाहती है। सरकार की मंशा है कि नक्सली मुख्य धारा में लौटें और समाज के साथ सकारात्मक योगदान दें। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में देश की सबसे प्रभावी और उदार आत्मसमर्पण नीति लागू की गई है।
इस नीति के तहत बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्य धारा में लौट रहे हैं। विजय शर्मा मंगलवार को राजधानी स्थित निवास कार्यालय में पत्रकारों से नक्सल उन्मूलन नीति, बस्तर पंडुम महोत्सव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित दौरे को लेकर जानकारियां साझा की। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति, स्वाभिमान और गौरव को उजागर करने वाला बस्तर पंडुम महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जो दो से पांच अप्रैल तक चलेगा। महोत्सव में बस्तर की सांस्कृतिक विविधता,पारंपरिक नृत्य, गीत, लोक कला, आभूषण, परिधान और स्थानीय व्यंजनों की भव्य प्रस्तुति की जाएगी। अब बस्तर सामान्य होकर अपनी मूल संस्कृति को सहेज रहा है। इस अवसर पर प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास बस्तर के राम विषय पर व्याख्यान देंगे,जिसमें भगवान श्रीराम और बस्तर के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला जाएगा। शर्मा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर क्षेत्र में विकास को पहुंचाना है। बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार की योजनाएं सही दिशा में कार्य कर रही हैं। उन्होंने बस्तर पंडुम महोत्सव में भाग लेने का आग्रह किया।
नक्सलियों के शांति प्रस्ताव पर कांग्रेस ने किया स्वागत
सरकार से गंभीर निर्णय लेने की अपील
नक्सलियों द्वारा शांति वार्ता के लिए जारी प्रेस नोट पर कांग्रेस ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार को इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। कांग्रेस का मानना है कि अगर यह प्रस्ताव प्रमाणिक है,तो दोनों पक्षों को संवाद के लिए आगे आना होगा। अब अंतिम निर्णय सरकार को लेना है।
बस्तर की शांति के लिए ठोस निर्णय ले सरकार
नक्सलियों के इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यदि नक्सलियों की ओर से ठोस प्रस्ताव आया है, तो सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सरकार पर निर्भर करता है कि वह नक्सलियों के शांति वार्ता के मकसद को समझे और बस्तर की शांति के लिए उचित निर्णय ले।
शांति वार्ता के लिए नक्सलियों ने रखी शर्तें
नक्सलियों की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार,उन्होंने सरकार से सुरक्षाबलों के अभियानों को रोकने की अपील की है। सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय द्वारा जारी इस नोट में ‘ऑपरेशन कगार’ को रोकने की मांग की गई है। उनका दावा है कि इस अभियान के तहत आदिवासी समुदायों के खिलाफ हिंसा हुई है। नक्सली सुरक्षा बलों की वापसी और आतंकवाद विरोधी अभियानों को रोकने की मांग कर रहे हैं।
