लेख@ संघर्ष कीजिये फल अवश्य मिलेगा

Share

मेरी आज दो बेटी है और एक आई आई टी से इंजीनियर बनी दूसरा एनआईटी से इलेक्ट्रॉनिक में बिटेक कर रही है दो बेटी जो बेटे से बढकर अपना भविष्य बनाने में आगे आ रही है। समय का इंतज़ार करना और सही समय में किसी कार्य को करना अति आवश्यक है क्योंकि एक बार समय निकला तो आप पीछे रह जायेंगे और धैर्य भी जरुरी है। दोनों बेटी बेटे से बढ़कर हो इसलिए हम हमेशा यही कह रहें दुनिया के पीछे मत भागो क्योंकि दुनिया में सभी लोग कभी भला नहीं चाहते है। जीवन का नाम संघर्ष है। आज का किया हुआ संघर्ष कल तुम्हे महान बनाएगा । हमेशा अपनी राह पर चलो। मैंने जितना संघर्ष अपने जीवन में किया है। शायद रूला देगी क्लर्क की नौकरी उस समय मिलना एक सपना जैसा था। हमें याद है उस समय क्लर्क की नौकरी लेने के कितने ऐसे लोग भी थे जो एमएससी करने के बाद फिर से मैट्रिक का एग्जाम ऐज कम करने को दिया। जब मेरी नौकरी नहीं लग रही थी तो उत्तर देने के बजाय खून का घूंट पी कर रहा। जब मैं साइंटिफिक फील्ड का फॉर्म भर रहा था तो लोग मना कर रहें थे कि वहाँ होने वाला नहीं है । वह बहुत टेक्निकल फील्ड है लेकिन मैं किसी के बात प्रर ध्यान नहीं दिया। जब एग्जाम व इंटरव्यू के लिए मुंबई बुलाया गया तो लोग कहते थे इसको टिकट का पैसा मत दो। जबकि मैं सुबह 6 बजे ही ट्यूशन के लिए निकलता था। जब टिकट रिजर्वेशन कराया किसी से उधार ले कर। जब मुंबई के लिए अपने परिवार के खिलाफ निकल पड़ा तो ट्रेन 12घंटे लेट थी। मेरे पिताजी केवल मेरे लिए सपोर्ट किया। वह बोले मुंबई नहीं जा सकोगे। मैंने वहाँ भी नहीं सुना। जनरल बौगी में सांस लेने की जगह नहीं थी। वहाँ से पंडित दिन दयाल स्टेशन पहुंचा। रात थी वहाँ से मुंबई के लिए एक मात्र ट्रेन हाबड़ा मेल मिला। खचाखच भीड़ थी तलटकर लोग जा रहें थे मैं भी लटक-लटक कर मुंबई पहुंचा और उसके बाद में तो उससे भी ज्यादा कष्ट यहाँ झोपड़ पट्टी में रह कर हुआ। पहले दिन रिटेन एग्जाम हुआ और शाम में रिजल्ट आया जिसमें भी करीब 500 से अधिक लोग आए थे और मैं उस 20 की सूची में था हालांकि पायदान कुछ नीचे था लेकिन एक बार आप एक सीढ़ी पार करते हैं तो हौसला बढ़ता है। अतः उस दिन जिसके माता या पिता साथ आए थे जिसका इंटरव्यू के लिए सलेक्शन हुआ वो बहुत खुश हुए सुबह इंटरव्यू के लिए जाना था अतः पुनः उस मुंबई की कुटिया में गया उन्होंने मुंबई में शरण दे दिया यही बहुत था और सुबह अगले दिन इंटरव्यू के लिए 25किलो मीटर का सफर बस से तय किया। रात में नींद नहीं आयी क्योंकि जहाँ सोने को मिला था वो घर में दरवाजा के पास था और कुछ खुला था और रात में चादर के निचे बिल्ली घुस गई और पैर चाटने लगी। अतः ऐसा देख बाहर देखा क़ोई जगह है तो कंस्ट्रक्शन के सीमेंट के बड़े पाइप जो पूल बनाने हेतु उपयोग होता है वहाँ गया। वहाँ गया तो पहले से ही क़ोई सो रहा था अतः पुनः अपने स्थान पर ही आकर रात भर जागते रहा और किसी तरह सुबह इंटरव्यू के लिए निकल गया और जब पहुंचा तो कुछ देर थी चूंक मेरा नम्बर बीच में था अतः कुछ समय बाद वहाँ के कर्मचारी बुलाकर उपर इंटरव्यू के लिए ले गए और कुछ देर बाद इंटरव्यू के लिए बुलाया पूछा आपने कहाँ से डिग्री ली है दिखाया और उसके बाद पूछा डिग्री लेने के इतने सालों बाद क्या किया। अतः मैंने कुछ टेक्निकल कोर्स किया था उसके बारे में बताया बाद में बहुत देर तक इंटरव्यू चला। कुछ सही कुछ गलत होगा लेकिन जो बताया वो मेरा अपना किया हुआ फार्मूला था जिसे समझाया वो शायद उन्हें ठीक लगा होगा और अंत में कुल मिलाकर संतोषजनक रहा बाद में सेलेक्ट हुआ और ट्रेनिंग के लिए कॉल आया, बहुत से लोगों ने उत्साहित किया कुछ ने डराया भी कि वहाँ टिकना मुश्किल होगा बाद में मेरे पिता जी समझा कर मुंबई में आए और फिर होने के बाद लौट गए। एक मोहल्ले के राकेश कुमार जी थे जो आईआई टी मुंबई से मेटेरियल इंजीनियरिंग में एम टेक किये थे उन्होंने गेस्ट हाउस बुक कराया और काफी सज्जन थे। उन्होंने काफी मदद की और प्रोत्साहित किया। अतः इस तरह मैं मेडिकल में फिट होकर ट्रेनिंग कर जॉब पर लग गया। शहर देख कर अच्छा लगा लेकिन दूर होने का गम भी था। अगले अगर उस वक़्त संघर्ष ना किया होता तो कहीं दुकान चला रहा होता इसलिए अच्छा बनने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। थोड़ा भी चूक हुई तो अपने ही लोग मन ही मन बहुत खुश होते है।मुझे लगता है ईश्वर ने मुझे बहुत बचाया है और सब उन्ही की कृपा है।
संजय गोस्वामी
मुंबई,महाराष्ट्र


Share

Check Also

लेख@ भारत का मध्यम वर्ग अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में अपने बच्चों को क्यों दाखिल करना चाहता है…

Share भारत में अब विश्व स्तर पर अंतरराष्ट्रीय स्कूलों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। …

Leave a Reply