लखनऊ@ योगी के बुलडोजर कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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@योगी के अफसरों को लगाई कड़ी फटकार…
@बुलडोजर एक्शन के प्रभावितों को 10-10 लाख का मुआवजा देने का आदेश…
@सुको ने कहा बुलडोजर एक्शन ने हमारी अंतरात्मा हिला दी…
@लखनऊ,01 अपै्रल 2025 (ए)।
प्रयागराज में एक वकील, एक प्रोफेसर और तीन महिला याचिकाकर्ताओं के घरों को 2021 में बुलडोजर से ध्वस्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि घर गिराने की प्रक्रिया असंवैधानिक थी। कोर्ट के बयान के अनुसार, घर ध्वस्त करने की प्राधिकरण की ये मनमानी प्रक्रिया पनाह लेने के नागरिक अधिकार का असंवेदनशील तरीके से हनन भी है।
कोर्ट ने कहा कि ‘यह हमारी अंतरात्मा को झकझोरता है। राइट टू शेल्टर नाम की भी कोई चीज होती है। इस सिलसिले में नोटिस और अन्य समुचित प्रक्रिया नाम की भी कोई चीज होती है।’ सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज विकास प्राधिकरण को आदेश दिया है कि पांचों पीड़तों को 10-10 लाख रुपये हर्जाना का भुगतान करे।ं
भाग रही बच्ची के वीडियो का दिया हवाला
इसी मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस उज्जल भुइयां ने यूपी के अंबेडकर नगर में 24 मार्च को हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान एकतरफ झोपडç¸यों पर बुलडोजर चलाया जा रहा था तो दूसरी तरफ 8 साल की एक बच्ची अपनी किताबें लेकर भाग रही थी। इस तस्वीर ने सबको हैरान कर दिया। ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
एक दिन पहले नोटिस देकर चला दिया बुलडोजर
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, साल 2021 में उन्हें 6 मार्च को नोटिस मिला, फिर अगले ही दिन 7 मार्च को मकानों पर बुलडोजर एक्शन किया गया।अधिवक्ता जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य लोगों की याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की जिनके ध्वस्त कर दिए गए थे।
अतीक अहमद की प्रॉपर्टी समझ कर चलाया बुलडोजर
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि प्रशासन और शासन को ये लगा कि ये संपत्ति गैंगस्टर और राजनीतिक पार्टी के नेता अतीक अहमद की है। अफसरों ने पर्याप्त जानकारी लिए बिना ही घरों को ढहा दिया।
कोर्ट ने कहा- अफसरों में संवेदनशीलता नहीं बची
घरों पर बुलडोजर चलने की ये घटना 2021 में हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे संविधान के तहत नागरिकों के मूल अधिकार का उल्‍लंघन माना। कोर्ट ने कहा कि नोटिस देने के 24 घंटे के भीतर घर गिराने की कार्रवाई पूरी तरह से अवैध थी। कोर्ट ने इसे समाज में गलत संदेश फैलाने वाली और कानून के शासन के खिलाफ कार्रवाई करार दिया।
15 दिन का नोटिस देना अनिवार्य
कोर्ट ने पहले के दिशा निर्देशों का भी हवाला दिया जिसमें किसी संपत्ति को ध्वस्त करने से पहले 15 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपने खर्चे पर घर दोाबरा बनाने की अनुमति दी लेकिन कहा कि अगर उनकी अपील खारिज होती है तो उन्हें निर्माण हटाना होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका
इन सभी लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में फरियाद की थी,लेकिन हाईकोर्ट ने घर गिराए जाने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने राज्य सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए नोटिस देने में पर्याप्त उचित प्रक्रिया का पालन करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बड़े पैमाने पर अवैध कब्जों की ओर इशारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार के लिए अनधिकृत कब्जा छुड़ाना और इसे रोकना मुश्किल है।


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