लेख@कथावाचकों के भरोसे सुधरेगी देश की दशा और दिशा?

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राज्य व देश की स्थिति कैसे बदलेगी इसकी चिंता छोड़ शासकीय पैसे से कथावाचकों का कार्यक्रम कराना हुआ आम,उन्हें लाने और ले जाने के लिए सरकार बनती है?
कथावाचक के साथ सरकारी हेलीकॉप्टर में आना जाना क्या मंत्री पद व सरकार को बचाने का प्रयास है?
क्या कथावाचक भी छत्तीसगढ़ सरकार के लिए राज्य अतिथि बन गए हैं?
आखिर छत्तीसगढ़ में क्या-क्या देखने को मिलेगा भाजपा सरकार में?
कथावाचक का आयोजन अब सरकार के मंत्री शासकीय पैसे से करवाएंगे?

लेखा BY रवि सिंह! इस समय देश की दशा व दिशा दोनों ही सुधारने की बहुत जरूरत है जिसका जिम्मा सरकारों पर होता है और सरकार जनता चुनती है जनता इसलिए सरकार चुनती है ताकि उनकी देखरेख व उनकी जरूरत को वह सरकार पूरा कर सके, पर आज की स्थिति में जनता की हालत या कहा जाए तो मिडिल क्लास की हालत तो और भी बत्तर है राजनीति के चक्रव्यूह में धर्म की बात करने वाले जनता को लडवा और भीडवा रहे हैं, और स्वयं राजा की गादी पर बैठ लिए हैं यह सब हो रहा है, राज्य व देश की आर्थिक स्थिति किसी से छुपी नहीं है भारत की संस्कृति सामाजिक परिस्थितियों पर कितना असर डाल दिया है यह भी किसी से छिपा नहीं है, नफरत की राजनीति के बीच लोगों व देश के हित की राजनीति लोग भूल गए हैं, सिर्फ धर्म जाति को लेकर देश की स्थिति को बिगाड़ रहे हैं, अभी तक सरकार देशहित की सोचती थी देश में रहने वाले लोगों के लिए सोचती थी, उनके अधिकारों के रक्षा के लिए सोचती थी, पर इस समय परिस्थितियों बदल रही हैं और उस पर यदि गौर किया जाए तो शासकीय पैसे से इस समय कथावाचको का कार्यक्रम आयोजित करना और उन्हें लाना ले जाना ही सरकार का उद्देश्य हो गया है? आखिर लोगों के टैक्स के पैसे से क्या सरकार अब लोगों को कथा सुनाएगी और कथावाचकों का झोली भरेगी तो फिर राज्य व देश की स्थिति कैसे बदलेगी? क्या अब यह नया चलन सरकार शुरू कर रही है छत्तीसगढ़ में यह चलन इस समय खूब सुर्खियों में है मुख्यमंत्री के गृह ग्राम में देश के एक काफी प्रसिद्ध कथावाचक का कार्यक्रम आयोजित किया गया बताया जाता है कि यह कार्यक्रम शासकीय पैसे से आयोजित हुआ है, कथावाचक को लाने ले जाने के लिए भी शासकीय हेलीकॉप्टर तक का उपयोग किया गया, अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार ऐसे ही प्रदेश की दशा व दिशा बदलेगी? कर्मचारियों को पैसे देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है कई ऐसी योजनाएं हैं जिसके लिए सरकार के पास पैसे नहीं है, सरकार पैसे ना होने का रोना होती है कई जगह पर तो मानदेय तक नहीं मिल रहा, शहरी क्षेत्र में ठेके पर काम करने वाले मजदूर पैसे नहीं पा पा रहे हैं, निगम के कर्मचारियों का वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा पर यहां पर सरकार को इसकी चिंता छोड़ अब शासकीय पैसे से कथावाचकों को बुलाकर कथा सुनवाकर क्या लोगों का दुख हरने का प्रयास है? क्या कथा सुनकर व कथावाचक को देखकर लोगों की भूख मिट जाएगी उनकी समस्या दूर हो जाएगी और प्रदेश एक खुशहाल प्रदेश हो जाएगा?
इस बात की चर्चा राजनीतिक गलियारों इसलिए हो रही है क्योंकि रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर प्रसिद्ध शिवपुराण कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के स्वागत के लिए छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री पहुंचे हुए थे उनका आगमन रायपुर से कुनकुरी यात्रा के दौरान मयाली स्थित विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर महादेव की हवाई परिक्रमा कर हेलीकॉप्टर से उनके साथ पुष्प अर्पित किया। यहां 21 मार्च से महाशिवपुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है, यह आयोजन लाखों श्रद्धालुओं के लिए हुआ है, यह कोई पहला मौका नहीं है इससे पहले की सरकार व वर्तमान सरकार में कई बार ऐसा हो चुका है इससे पहले छत्तीसगढ़ में धीरेंद्र शास्त्री के अलावा कई कथावाचक इस तरह से शासकीय पैसे पर पहुंचे हैं पर सवाल अब लोगों को व विपक्षी पार्टियों सहित बुद्धिजीवियों के मन में खटकने लगा है कि ऐसे आयोजन तो लोग स्वयं कराया करते हैं पर अब ऐसे आयोजन सरकार करा रही है तो क्या सरकार को इसी प्रकार के आयोजनों के लिए चुना जा रहा है? कथावाचकों पर हिंदू धर्म के लोगों की आस्था रहती है आस्था होनी भी चाहिए पर कथा वाचक का यह एक व्यापार भी माना जाता है, पर क्या व्यापार का हिस्सा सरकार बने यह उचित है? जहां पर सरकार के लिए कई ऐसे दायित्व हैं अपने प्रदेश के लोगों के लिए जिस पर वह खरा उतर नहीं पा रही और इस प्रकार के आयोजन से क्या प्रदेश की स्थिति बदल जाएगी और ऐसे कार्यक्रम क्या छत्तीसगढ़ में सरकार करने का बीड़ा उठा ली है? अब आम लोगों को ऐसे कार्यक्रम करने की जरूरत नहीं है? क्योकि सरकार इस का जिम्मा उठाली है? ऐसे आयोजन सामूहिक सहयोग से पहले होते थे पर अब सरकारी सहयोग से भी होने लगे हैं? कथावाचक भी अब राजनीतिक रूप में रंगने लगे, उन्हें भी राजनीति का मजा आने लगा है किसी न किसी पार्टी के अब प्रचारक भी वह बनते दिखने लगे हैं जो सिर्फ लोगों को मार्गदर्शन सहित परम ज्ञान देने के लिए कथा करते थे, ताकि लोग उनकी कथा श्रवण कर एक सत्य के मार्ग पर चले पर ऐसे कथा श्रवण करने वाले नेता मंत्री सहित आयोजन करने वाले क्या इन कथा वाचकों के कथा सुनकर अपने अंदर बदलाव ला पा रहे हैं? जो श्रद्धालुओं का नाम लेकर उनके लिए बुलाए जाने को लेकर आयोजन की बात कहते हैं और शासकीय पैसे का बंदरबाट करते हैं यह पैसा आम आदमी के मेहनत से कमाए गए पैसे है जो सरकार के पास आते हैं जिस पर आम आदमी मेहनत से कमाता भी है उस पर भी टैक्स देता है और जब मेहनत से कमाए हुए पैसे को खर्च करता है उस पर भी टैक्स देता है उस पैसे का उपयोग क्या ऐसे होगा? श्रद्धा, धर्म के अड़ में गंदी राजनीती हो रही?

-:रवि सिंह:-
कटकोना कोरिया
छत्तीसगढ़


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