- नगर पंचायत अध्यक्ष की नई टीम के साथ पटना भाजपा होगी पटना में मजबूत,नगरवासियों में भी दिखने लगा विश्वास
- वार्ड क्रमांक 6 के कांग्रेसी पार्षद की भाजपा में वापसी से भी नजर आया पटना का नेतृत्व परिवर्तन
- सत्ता संगठन में हमेशा एक जैसी स्थिति और एक ही तरह के लोगों का वर्चस्व नहीं रहता तय हुआ
- भाजपा में कोई छोटा बड़ा नहीं सभी का है सम्मान नए सहित पुराने का मान यह भी नजर आया
बैकुंठपुर/पटना,29 मार्च 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के नव गठित नगर पंचायत पटना में भाजपा संगठन में या कहें भाजपा की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव नजर आने लगा है। अब पटना नगर को भाजपा के पुराने मठाधीशों से आजादी मिलती नजर आ रही है और इसका असर यह देखने को मिल रहा है कि पटना नगर के लोगों का भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ रहा है जो घटा हुआ नजर आता था। आरम्भ से जबसे भाजपा की सत्ता पटना के लोगों ने देखी थी तभी से पटना भाजपा की राजनीति कुछ गिने चुने लोगों तक ही जाकर सिमट जाती थी और इसका असर यह होता गया कि पटना में भाजपा बिल्कुल कमजोर होती जाने लगी। जो मतदाता भाजपा के माने जाते थे वह भी मठाधीशों के कारण पार्टी से विमुख होने लगे थे। पटना का नगर पंचायत बनना और संपन्न हुआ चुनाव पटना भाजपा के लिए नेतृत्व परिवर्तन वाला साबित हुआ। संपन्न चुनाव में निश्चित ही मठाधीशों से भाजपा को आजादी मिली और यह भी तय हुआ कि भाजपा के कुछ मठाधीशों से नगर की जनता खुश नहीं थी और जिसका परिणाम भी उनके विपक्ष में देखा गया। भाजपा पटना में सम्पन्न हुए नगर पंचायत चुनाव के बाद नए निर्वाचित अपने अध्यक्ष के साथ लगातार मजबूत हो रही है। हाल ही में बिना बहुमत के भाजपा ने नगर पंचायत में उपाध्यक्ष अपना बना लिया वहीं यह झटका कांग्रेस झेल पाती उससे पहले ही एक कांग्रेसी पार्षद को अपने खेमे में लेकर भाजपा में शामिल करा लिया। कुल मिलाकर भाजपा का पटना में नित नया प्रयोग पार्टी के लिए जारी है जो अब नए और युवा वर्ग के निर्वाचित नगर पंचायत के सदस्यों के द्वारा संभव किया जा रहा है।
वार्ड क्रमांक 6 के पार्षद का भाजपा में शामिल होना इसीलिए संभव हुआ क्योंकि नेतृत्व कहीं न कहीं नए और युवा वर्ग के हाथों में जा रहा है जिसकी कमान नई अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सम्हाल रहे हैं वरना वार्ड क्रमांक 6 के पार्षद को कभी भाजपा में एंट्री नहीं मिलती यदि पुराने मठाधीशों की चलती। भाजपा में हमेशा एक ही जैसी स्थिति नहीं रहती नेतृत्व परिवर्तन कर नए लोगों को मौका देना और नीचे से ऊपर लोगों को ले जाना भाजपा की परम्परा है यह पटना में भी देखने को मिला। वैसे भाजपा में पुराने लोगों के मान का भी ध्यान रखा जा रहा है ऐसा कहना सही होगा लेकिन समय अनुसार पार्टी अब नए लोगों को आगे आने का मौका देना चाहती है पटना में जो पहले की परम्परा पटना में नहीं थी ऐसा माना जाता है जो अच्छा संकेत है। पुराने सहित नए में सामंजस्य बनाने का काम बस अब नए नेतृत्व को निभाना है जिसके लिए उन्हें कुछ बहुत मेहनत की जरूरत पड़ने वाली है,वैसे नव निर्वाचित नगर पंचायत अध्यक्ष के पास एक दशक का अपना राजनीतिक अनुभव है और वह नगर की नब्ज कुछ हद तक जानती हैं इसलिए वह भी पुराने और नए भाजपाइयों में सामंजस्य बना सकेंगी ऐसा माना जा सकता है। वैसे पुराने मठाधीशों को अब बड़ा हृदय दिखाना चाहिए क्योंकि अब समय युवाओं के लिए है क्योंकि उन्होंने अपने समय में भाजपा से जुड़कर काफी कुछ पाया है। वैसे जिलाध्यक्ष भाजपा की रणनीति लगातार कोरिया भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो रही है और ऐसा कब तक होता रहने वाला है देखने वाली बात होगी।
पटना भाजपा के नए चेहरे अब नगर पंचायत अध्यक्ष सहित उपाध्यक्ष एवं पार्षद
पटना नगर में अब भाजपा के नए चेहरों की बात की जाए तो अब नगर पंचायत अध्यक्ष उपाध्यक्ष सहित पार्षद नए चेहरे होंगे वहीं नेतृत्व अध्यक्ष ही करती नजर आयेगीं भाजपा का। भाजपा में यह परिवर्तन बहुत वर्षों बाद तब हुआ जब नई नई पार्टी में शामिल हुई नव निर्वाचित अध्यक्ष जिन्हें पार्टी ने ही टिकट दिया का पार्टी में प्रवेश हुआ। नगर पंचायत अध्यक्ष के साथ अब उनकी नगर पंचायत की टीम भाजपा की रीति नीति को नगर के वार्ड वार्ड तक पहुंचाएगी।
नगर पंचायत अध्यक्ष के साथ पटना में भाजपा हो रही लगातार मजबूत
नव निर्वाचित नगर पंचायत अध्यक्ष के साथ अब पटना में भाजपा लगातार मजबूत हो रही है। नगर पंचायत अध्यक्ष गायत्री सिंह के पुराने अनुभवों का लाभ पार्टी को मिल रहा है। पहले उपाध्यक्ष पद पर बाजी मारकर बिना बहुमत पार्टी का उपाध्यक्ष बना ले जाना और फिर एक कांग्रेस पार्षद को भाजपा में प्रवेश दिला ले जाना,यह सब कुछ साबित करता है कि नगर पंचायत अध्यक्ष के नेतृत्व में पटना में भाजपा मजबूत हो रही है।
जिन्हें जनता ने नहीं पहुंचने दिया नगर पंचायत परिषद तक उनकी राजनीति अब समाप्ति की ओर
संपन्न नगर पंचायत चुनाव में भाजपा के कुछ बड़े नेता चुनाव हार गए,ऐसे नेताओं को पार्षद लायक भी जनता ने नहीं माना और अपनी नाराजगी इनके प्रति जाहिर की। अब ऐसे नेताओं की राजनीति समाप्ति की ओर है और युवा वर्ग का भाजपा में परचम लहराने वाला है। वैसे जो बड़े नेता चुनाव हारे वह अध्यक्ष की रेस में भी थे और ऐसे में समझा जा सकता है कि जब उन्हें एक वार्ड की जनता ने नकार दिया पूरा नगर उन्हें स्वीकार करता यह मानना कठिन है।