सूरजपुर/रायपुर@क्या सुरजपुर और एमसीबी के डीपीएम पर स्वास्थ्य मंत्रालय मेहरबान…भर्ती परीक्षा में असफल होने के बावजूद कुर्सी बरकरार?

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-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर/रायपुर 27 मार्च 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जिला कार्यक्रम प्रबंधक पद के लिए भर्ती परीक्षा और साक्षात्कार का परिणाम जारी कर दिया गया है। जहां योग्य उम्मीदवारों को विभिन्न जिलों में पदस्थ किया गया है,वहीं सुरजपुर और एमसीबी जिलों में सरकार की मेहरबानी पुराने प्रभारी डीपीएम पर बनी हुई है, और यह आगे भी बनी रहेगी, क्योंकि इनकी एनएचएम विभाग में अच्छी पकड़ बनी हुई है चाहे यह विवादों में रहे चाहे यह शिकायतों में रहे, यह हर तरह से आरोपों से घिरे क्यों ना रहे फिर भी इनके मर्जी के अनुसार ही इन्हें पद देना एनएचएम की मजबूरी हो गई है? अब सवाल यह उत्पन्न होता है कि डीपीएम की भर्ती परीक्षा में अपात्र होने के बाद भी प्रभारी डीपीएम आखिर क्यों बनाए रखा जा रहा है और जिले की जिम्मेदारी उन्हें क्यों दी जा रही है? आखिर इनके प्रभारी डीपीएम बनाने के पीछे की मजबूरी क्या है? विवादित व्यक्तियों को विभाग दूर नहीं रख पा रहा अभी ही हाल ही में कुछ डीपीएम का तबादला हुआ पर सूरजपुर के विवादित प्रभारी डीपीएम का तबादला नहीं हो पाया।
प्रिंस जायसवाल का विवादों से नाता
परीक्षा में अयोग्य घोषित होने वाले प्रिंस जायसवाल का नाम लगातार विवादों में बना हुआ है। उन्होंने अलग-अलग विश्वविद्यालयों की डिग्रियां प्रस्तुत कर डीपीएम पद के लिए आवेदन किया,जिनमें से कुछ मामलों की पुलिस जांच भी जारी है। पहले साबरमती यूनिवर्सिटी की डिग्री प्रस्तुत की…फिर सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी की डिग्री के आधार पर आवेदन किया। इन विवादों के बावजूद सरकार ने उन्हें पद से नहीं हटाया। जिसकी चर्चा विभागों में चल रही है।
स्वास्थ्य सचिव सहित मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से हुई प्रभारी डीपीएम सुरजपुर की शिकायत,एफआईआर की हुई मांग
सुरजपुर के प्रभारी डीपीएम की पुनः एकबार शिकायत हुई है,यह शिकायत स्वास्थ्य सचिव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक के नाम से की गई है,शिकायत में सुरजपुर के प्रभारी डीपीएम की डिग्री फर्जी होने की बात कही गई है और जांच कर एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही की बात की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार कलेक्टर सुरजपुर ने खुद प्रभारी डीपीएम की डिग्री की जांच के लिए मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य राज्य मिशन राज्य कार्यालय को पत्र लिखा गया है।
जब जिले के लिए है डीपीएम मौजूद है फिर भी प्रभारी डीपीएम की जरूरत क्यों है?
जब जिले के लिए डीपीएम चयनित परीक्षा पास मौजूद हैं योग्य मौजूद है तो अपात्र और अयोग्य प्रभारी डीपीएम की जरूरत क्या है,सवाल बड़ा है और यह सवाल खड़ा होता रहेगा क्योंकि एक फर्जी डिग्री का आरोप झेल रहा और अपात्र व्यक्ति स्वास्थ्य विभाग में जमा रहे यह प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के लिए अच्छा नहीं।
सुरजपुर डीपीएम इंटरव्यू में फेल,फिर भी कुर्सी बरकरार
भर्ती परीक्षा में सुरजपुर जिले के प्रभारी डीपीएम प्रिंस जायसवाल आवश्यक अंक प्राप्त करने में असफल रहे, लेकिन उन्हें पद से हटाया नहीं गया है। इसी तरह एमसीबी जिले में भी नई भर्ती के बावजूद पुरानी नियुक्ति को बनाए रखा गया है। यह सवाल उठाता है कि जब नौ से अधिक उम्मीदवार डीपीएम पद पर सफल घोषित किए गए हैं,तो चयनित अभ्यर्थियों को पदस्थापना क्यों नहीं दी जा रही?
नियुक्ति में पारदर्शिता पर सवाल
इस बार की भर्ती में वरुण कुमार साहू (10.75 अंक), राकेश कुमार (9.67 अंक), गीतू हरित (9.67 अंक), प्रतीक सोनी (9 अंक) और डॉ. हमित कुमार (12 अंक) जैसे अभ्यर्थियों ने अच्छे अंक प्राप्त किए और उन्हें विभिन्न जिलों में नियुक्ति दी गई। लेकिन वहीं सुरजपुर और एमसीबी में नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय में अंदरखाने खेल?
राज्य सरकार ने हाल ही में चार नए डीपीएम की नियुक्ति के आदेश जारी किए,लेकिन सुरजपुर और एमसीबी में नियुक्ति का मामला अलग ही नजर आ रहा है। क्या यह स्वास्थ्य मंत्रालय में अंदरखाने किसी बड़े खेल का संकेत है? क्यों सरकार ने योग्य अभ्यर्थियों को नजरअंदाज कर पुराने अधिकारियों को ही कुर्सी पर बनाए रखा है?
विवादों के बीच भी सम्मान पाते हैं उत्कृष्ट कार्य का कैसे?
सुरजपुर के प्रभारी डीपीएम लगातार विवादों में रहते हैं और उन्हें इसी बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य का इनाम भी मिलता रहता है,सम्मान के मामले में बताया जाता है कि सभी सम्मान वह खुद ही प्रायोजित करते हैं और अपनी उपलçधयों के बखान के लिए अच्छी खासी राशि खर्च करते हैं। अब राशि कहां से आती है समझा जा सकता है।
क्या स्वास्थ्य मंत्रालय भी डरता है सुरजपुर के एक प्रभारी डीपीएम से?
जिस तरह परीक्षा में फेल होने के बाद भी सुरजपुर जिले के प्रभारी डीपीएम पद पर बने हुए हैं उसे देखकर यह सवाल उठता है कि क्या उनसे स्वास्थ्य मंत्रालय भी डरता है। एक अयोग्य व्यक्ति को जो अहर्ता परीक्षा पास नहीं पर सका उसका पद पर बने रहना यही साबित करता है।


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