अगली सुनवाई तक रुकने का फरमान
रायपुर,26 मार्च 2025(ए)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर की डिवीजन बेंच में प्राचार्य पदोन्नति के मामले में आज सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने कहा है कि अगली सुनवाई तक पदोन्नति सूची जारी ना की जाये। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में इस महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें बी.एड. डिग्री को अनिवार्य करने के संबंध में बहस हुई। इस प्रकरण में याचिकाकर्ता अखिलेश कुमार त्रिपाठी के अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखा, जबकि इंटरविनर की ओर से अधिवक्ता आलोक बख्शी ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। वहीं, शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत ठाकुर उपस्थित रहे और राज्य सरकार का पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए।
रिजॉइंडर प्रस्तुत करने का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे आवश्यकतानुसार अपना-अपना रिजॉइंडर (उत्तर) प्रस्तुत करें। इसके साथ ही, अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 16 अप्रैल निर्धारित करते हुए शासन को निर्देश दिया कि तब तक प्राचार्य पदोन्नति के आदेश जारी न किए जाएं।
पदोन्नति से वंचित रह जायेंगे अनेक शिक्षक
इस फैसले के बाद प्राचार्य पदोन्नति फोरम के घटक संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इनका कहना है कि शासन की पदोन्नति प्रक्रिया अत्यंत धीमी गति से चल रही है। इस कारण वे शिक्षक, जो जनवरी से अप्रैल के बीच सेवानिवृत्त हो रहे हैं, पदोन्नति से वंचित रह जाएंगे। इन शिक्षकों का कहना है कि प्रशासनिक सुस्ती के कारण पात्र शिक्षकों को उनके करियर में न्याय नहीं मिल पा रहा है। यदि पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो कई योग्य उम्मीदवारों को बिना किसी लाभ के सेवानिवृत्त होना पड़ेगा।
