कोरबा,24 मार्च 2025 (घटती-घटना)। कोरबा वन मंडल एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा किंग कोबरा कंजर्वेशन प्रोजेक्ट के तहत सर्पदंश जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग, एसईसीएल, वेदांता बालको सहित विभिन्न संस्थाओं ने सहयोग दिया। उक्त कार्यशाला में कोरबा जिला नगर निगम महापौर संजू देवी राजपूत, कोरबा जिला कलेक्टर अजीत बसंत, डीएफओ अरविंद पीएम, कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत, नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय, सीएमओ एस.एन. केशरी, नगर पालिका अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राजपूत, भाजपा महामंत्री संतोष देवेंगन सहित विभिन्न जिलों से 350 चिकित्सक, 30 रेस्क्यूर्स और मेडिकल कॉलेज के छात्र शामिल हुए। वन मंडल अधिकारी अरविंद पीएम ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए किंग कोबरा कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की जानकारी दी। नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के एम. सूरज ने सर्पदंश की गंभीरता और इसके समाधान के लिए वन, स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व विभागों और आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ एस.एन. केशरी ने बताया कि पिछले 30 वर्षों में पहली बार इस विषय पर इतना व्यापक कार्यक्रम हुआ है, जिससे हेल्थ वर्कर्स को प्रशिक्षित करने और सर्पदंश के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित विशेषज्ञों ने व्याख्यान के रूप में जानकारी साझा की। जिसमे चैतन्य मालिक (संगवारी संस्था, सरगुजा) सर्प दंश के प्रबंधन ने उचित मौसम और उपचार पद्धतियों की जानकारी, कृष्ण दा चावली (एम्स, रायपुर) प्राथमिक उपचार, विषैले और विषहीन दंश की पहचान, फॉरेंसिक प्रक्रिया और मुआवजा प्राप्त करने के तरीके, विवेक शर्मा (सर्प विशेषज्ञ) सांपों की पहचान, छाीसगढ़ में उनकी उपलधता और विष की तीव्रता की जानकारी, सविता सिदार (नायब तहसीलदार, कोरबा) सरकारी मुआवजा प्रक्रिया और उसके लिए आवश्यक नियम आदि की समस्त जानकारी विस्तृत रूप से साझा की। एम. सूरज ने हृ्रक्कस्श्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत सरकार ने 2030 तक सर्प दंश से होने वाली मृत्यु को आधा करने का लक्ष्य रखा है। हाल ही में भारत सरकार ने सर्प दंश को नोटिफाएबल बीमारी घोषित करने का प्रस्ताव भी दिया है। कार्यक्रम आखिर में विशेषज्ञों को किंग कोबरा की फोटो स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की गई।
