बिलासपुर,@ जूनियर को सीनियर की कुर्सी पर बिठाने का खेल जारी

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हाईकोर्ट ने रद्द किया बेमेतरा डीईओ का आदेश…
छत्तीसगढ़ढ़ में प्रभार के बहाने जूनियर्स को बिठाया जा रहा है वरिष्ठों की कुर्सी पर…
बिलासपुर,23 मार्च 2025 (ए)
। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक बार फिर वरिष्ठ स्टाफ की उपेक्षा करते हुए जूनियर को उनके ऊपर पदस्थ करने का एक मामला सामने आया है। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने
शिक्षा विभाग में वरिष्ठता की अनदेखी कर प्रभारी प्राचार्य नियुक्त करने के जिला शिक्षा अधिकारी बेमेतरा द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वरिष्ठ व्याख्याता डेलूराम खरे को पुनः शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कूरा में प्रभारी प्राचार्य के पद पर नियुक्त किया जाए।
क्या है जूनियर सीनियर पद का मामला?
डेलूराम खरे, ग्राम चारभाठा, पोस्ट पेंड्रावन, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में वरिष्ठ व्याख्याता के रूप में कार्यरत थे। 16 जुलाई 2024 को उन्हें डीईओ बेमेतरा द्वारा कूरा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया था। हालांकि, मात्र दो महीने बाद 18 सितंबर 2024 को एक संशोधित आदेश जारी कर उन्हें इस पद से हटा दिया गया और उनके स्थान पर जूनियर व्याख्याता प्रदीप कुमार बंजारे को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त कर दिया गया।
वरिष्ठता के आधार पर पदस्थापना का आदेश
इस निर्णय से आहत होकर डेलूराम खरे ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 4 अगस्त 2011 और 16 मई 2012 को जारी सर्कुलर के अनुसार, किसी भी शासकीय कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारी को ही प्रभारी पद का चार्ज सौंपा जाना चाहिए। कोर्ट ने डीईओ बेमेतरा के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि डेलूराम खरे को वरिष्ठता के आधार पर पुनः प्रभारी प्राचार्य के पद पर बहाल किया जाए।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि पूर्व में दिए गए कई फैसलों में भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वरिष्ठ अधिकारी को दरकिनार करना प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है।
प्रदेश भर में इसी तरह की मनमानी
शिक्षा विभाग में अधिकांश डीईओ और बीईओ के पद पर जूनियरों को प्रभारी बनाकर बिठा दिया गया है। विडम्बना इस बात की है कि इन जूनियर्स के नीचे कई सीनियर शिक्षक और व्याख्याता काम कर रहे हैं। अपने ही जूनियर से मिलने वाले आदेश को सुनकर उनकी मनःस्थिति क्या होगी इसका अंदाजा सहज ही लगाया सकता है। हाई कोर्ट ने ऐसे ही कई मामलों में आदेश जारी किया है। कोर्ट ने तो यहां तक कह दिया है कि प्रदेश में जितने भी बीईओ के पद पर जूनियर कर्मी प्रभारी के तौर पर काम कर रहे हैं, वहां नियम के मुताबिक वरिष्ठों को पदस्थ किया किया जाये, मगर इस आदेश का भी अब तक पालन नहीं किया गया है।


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