नई दिल्ली@ कॉलेजियम प्रणाली ही है दोषपूर्ण

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अब सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने क्यों उठाए सवाल
सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने न्यायिक नियुक्तियों पर टिप्पणी की…
हरीश साल्वे ने न्यायपालिका की पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया है…
साल्वे ने न्यायिक नियुक्तियों की प्रणाली को सुधारने की जरूरत बताई…
नई दिल्ली,22 मार्च 2025 (ए)।
दिल्ली हाई कोर्ट के एक जज से जुड़े कथित घर पर नकदी मामले में भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अधिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए न्यायिक नियुक्ति की प्रणाली में व्यापक बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका के खिलाफ लगाए गए लांछन और अपुष्ट आरोप जनता की आस्था को हिला देते हैं और अंततः लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े प्रकरण को चेतावनी बताते हुए उन्होंने कहा कि आज हमारे पास न्यायिक नियुक्ति की जो प्रणाली है, वह निष्कि्रय है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले सप्ताह जब अग्निशमन विभाग की एक गाड़ी जस्टिस वर्मा के आवास पर आग बुझाने गई थी, तो वहां भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। उन्होंने ताजा विवाद को बदलाव की याद दिलाते हुए कहा, हमें चर्चा फिर से शुरू करने की जरूरत है… यह अस्तित्व का संकट है। आपको इस संस्था को बचाना होगा। साल्वे ने विधानमंडल, विशेषकर संसद सदस्यों से, न्यायिक नियुक्तियों के लिए एक सटीक और अधिक पारदर्शी प्रणाली के लिए सामूहिक रूप से सुझाव देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, मैं देखता हूं कि जिन 500 लोगों को हमने वोट देकर सत्ता में भेजा है, उन्हें अपने राजनीतिक मतभेदों को एक तरफ रखना होगा। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें उन्हें एक साथ बैठकर विचार-विमर्श करना होगा, संसद में भेजे गए 500 लोगों के सामूहिक विवेक से एक ढांचा तैयार करना होगा। उन्होंने न्यायपालिका के खिलाफ लगाए गए आरोपों की भी आलोचना की और कहा कि इससे लोगों की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।


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