अस्पताल प्रबंधन की सफाई…गलत इंजेक्शन नहीं लगाया गया…
बिलासपुर,21 मार्च 2025 (ए)। न्यायधानी के सिम्स अस्पताल में पिछले दिनों एक गर्भवती महिला के गर्भपात का मामला प्रकाश में आया था। हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान सिम्स द्वारा कराई गई जांच हाईकोर्ट में पेश की गई। वहीं कोर्ट ने कलेक्टर से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देने कहा है। कोर्ट ने सवाल उठाया है कि इलाज में इतनी लापरवाही कैसे बरती जा रही है?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सिम्स अस्पताल की बदहाली को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान गर्भवती महिला के गर्भपात के मामले को भी कोर्ट ने गंभीरता से लिया।
अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि कलेक्टर बिलासपुर के निर्देश पर गठित डॉक्टरों की टीम ने जांच रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया कि इलाज के दौरान प्रोटोकॉल का पालन किया गया और महिला को कोई दवा या इंजेक्शन नहीं दिया गया।
इस पर कोर्ट ने कलेक्टर से जवाब मांगा कि आखिर इस तरह की लापरवाही कैसे हो रही है? मरीजों को उचित उपचार क्यों नहीं मिल रहा है? अगली सुनवाई 7 अप्रैल को होगी, जिसमें कलेक्टर को जांच रिपोर्ट पर उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।बता दें कि सिम्स में दाखिल कराई गई गर्भवती महिला गिरजा साहू के परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगाने के कारण पांच महीने का गर्भ समाप्त हो गया।सिम्स प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए डॉक्टरों की एक टीम गठित की, जिसमें डॉ. नीरज शेंडे, डॉ. अमित ठाकुर, डॉ. श्वेता कुजूर और गायत्री सहायक नर्सिंग अधीक्षिका को शामिल किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल में गर्भपात कराने वाला कोई भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से गर्भपात हुआ है, जबकि जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन ने खुद को क्लीन चिट दी है।
