बैकुण्ठपुर@क्या खबर नहीं छपती तो जांच भी नहीं शुरू होती… किसके दबाव में है कोरिया के सीएमएचओ साहब?

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-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,21 मार्च 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है और यह सुर्खी इस बार भ्रष्टाचार को लेकर नहीं रिश्वतखोरी को लेकर रिश्वतखोरी की प्रमाणित शिकायत के बावजूद जांच टीम गठित न होना और जांच में हिल हलवा करना जैसी चीज देखने को मिली, खबर प्रकाशन के बाद जांच टीम गठित हुई और खबर प्रकाशन के बाद जा शुरू हुई अब जांच शुरू तो हो चुकी है अंत इसका होगा या फिर इसमें बहुत बड़ा षड्यंत्र होगा? यह भी आने वाला समय बताएगा वैसे षड्यंत्र होने की संभावना ज्यादा है क्योंकि गौतम परिवार काफी रासुकदार परिवार है जो भाजपा का इस्तेमाल करके बचने का पूरा प्रयास करेगा वैसे सीएमएचओ साहब से भी एक सवाल है क्या खबर नहीं प्रकाशन होती तो जांच नहीं होती? जिले के सोनहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पदस्थ लॉक डाटा मैनेजर की रिश्वतखोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को बीडीएम द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों से रिश्वत लेने के आरोपों की जांच शुरू हो चुकी है,जिसमें अब तक 13 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने अपने बयान दर्ज करवा दिए हैं। इन अधिकारियों ने अपने बयान के साथ रिश्वत की गई राशि के बैंक ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट भी प्रस्तुत किए हैं।
ज्ञात हो की सामुदायिक डाटा प्रबंधक जो दूसरे की नौकरी खाने की बात कर रहा था आज जब उसी की घूसखोरी की बात वायरल ऑडियो से जाहिर हो रही है तब क्यों उसके ऊपर कार्यवाही नहीं हो रही है? जो सामुदायिक डाटा प्रबंधक सोनहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीएमओ के नाम से रिश्वत की मांग कर रहा था बीएमओ नाम से कर्मचारी को डरा रहा रहा आज उसकी नौकरी खतरे में है, एक स्वास्थ्य विभाग के ही कर्मचारी से रिश्वत की मांग कर उसकी नौकरी खाने की बात कर रहा था आज जब उसका तथाकथित ऑडियो वायरल हुआ है और बात स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य सचिव तक पहुंची है तो देखना है कि अब कितनी जल्द कार्यवाही होती है? बता दें कि मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत के समुदायिक डाटा प्रबंधक से जुड़ा हुआ है जो स्वास्थ्य विभाग में जमकर वसूली कर रहा है और जिसे वसूली का खौफ भी नहीं है। वैसे बता दें कि उक्त सामुदायिक डाटा प्रबंधक के पिता सहित कई अन्य पारिवारिक सदस्य स्वास्थ्य विभाग में ही पदस्थ हैं और वह किसकी कृपा से नौकरी पाते चले गए यह भी जांच का विषय है। आज जब एक कर्मचारी से रिश्वत की बात सामने आई है तब मामला खुल रहा है कि किस तरह स्वास्थ्य विभाग में खुलेआम वसूली का खेल चल रहा है। ऑडियो वायरल करने वाला भी स्वास्थ्य विभाग का ही कर्मचारी है जिसने ऑडियो जारी कर शिकायत करी है और कार्यवाही की मांग की है।
रिश्वतखोरी की प्रदेश स्तर तक बात पहुंचाने के बाद भी जांच व कार्यवाही कछुए की चाल में क्यों?
सामुदायिक डाटा प्रबंधक सोनहत की रिश्वतखोरी की बात प्रदेश स्तर तक पहुंच चुकी है लेकिन जांच कछुए की चाल से चल रही है। अब ऐसा क्यों है यह भी सोचने वाली बात है। जब सरकार रिश्वत मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है तो सोनहत के बीडीएम साहब पर क्यों मेहरबानी उन्हें भी तत्काल कार्यवाही की जद में क्यों नहीं ले रहा विभाग।
सीएमएचओ की भूमिका पर उठे सवाल
इस जांच को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। हैरानी की बात यह है कि सीएमएचओ ने अब उन स्वास्थ्य कर्मियों के बैंक स्टेटमेंट मंगवाए हैं, जिन्होंने रिश्वत दी है, लेकिन जिनके खाते में राशि जमा की गई, उस पर कोई चर्चा नहीं की जा रही। आरोप है कि आरोपी बीडीएम की पत्नी के खाते में रिश्वत की रकम ट्रांसफर की गई,लेकिन उसके बैंक स्टेटमेंट की कोई जांच नहीं हो रही है।
जांच कमेटी के प्रमुख अधिकारी रहे नदारद
इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम सोनहत और पटना के बीएमओ जांच के दौरान अनुपस्थित रहे। इससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और यह आशंका जताई जा रही है कि पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा सकता है। जांच शुरू होने के पूर्व सभी फरियादियों ने इस पर सवाल उठाए बाद में जांच शुरू हो पाई।
बीडीएम बेखौफ,सोनहत बीएमओ की भूमिका संदिग्ध
पूरे मामले में आरोपी बीडीएम का रवैया चौंकाने वाला है। सूत्रों के अनुसार, बीडीएम की कॉल रेकॉर्डिंग में साफ नजर आ रहा है कि बीडीएम पूरी आत्मविश्वास के साथ स्वास्थ्य कर्मियों के इंसेंटिव की राशि में से 65 प्रतिशत अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर करवाता रहा। इतना ही नहीं, वह खुलेआम सोनहत के बीएमओ के नाम पर धमकी भी देता था। ऐसे में सोनहत बीएमओ की भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई है।
सीएमएचओ पर आरोपी को बचाने का
आज हुई जांच में यह साफ नजर आया कि सीएमएचओ किसी भी हाल में आरोपी बीडीएम को बचाने में लगे हैं। उन्होंने एक बार फिर सभी फरियादियों को जांच कमेटी के अध्यक्ष के समक्ष हाजिर होने को कहा है, जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि मामले को लंबा खींचने और आरोपों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
क्या होगा अगला कदम?
इस मामले ने जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जांच कमेटी निष्पक्ष कार्रवाई करेगी या फिर भ्रष्टाचारियों को बचाने की कोशिश की जाएगी। इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सभी की नजरें जांच के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।


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