अंबिकापुर,20 मार्च 2025 (घटती-घटना)। नेशनल लोक अदालत में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है,जिसमें जिले के विद्युत विभाग की कारगुजारी ने सभी को चौंका दिया। यह मामला एक ऐसे बिजली बिल से जुड़ा है,जिसका भुगतान तीन साल पहले ही कर दिया गया था, फिर भी पीडि़त, जो पेशे से चिकित्सक हैं, को नेशनल लोक अदालत के चक्कर काटने पड़े।
मामला अंबिकापुर शहर के निवासी और चिकित्सक डॉ. श्रीकांत सिंह चौहान से जुड़ा है। डॉ. चौहान ने वर्ष 2019 में अपने घर के निर्माण के दौरान विद्युत विभाग से एक अस्थायी (टेम्परेरी) बिजली कनेक्शन लिया था। 2021 में घर बनकर तैयार होने के बाद उन्होंने स्थायी कनेक्शन के लिए आवेदन किया। नियमों के अनुसार,स्थायी कनेक्शन मिलने से पहले अस्थायी कनेक्शन के पूरे बिल का भुगतान करना जरूरी था। डॉ. चौहान ने बिल का भुगतान किया,लेकिन इसके लिए उन्हें 5 हजार रुपये की जगह 8 हजार रुपये देने पड़े। रसीद मांगने पर विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि 5 हजार रुपये की रसीद उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आएगी, जबकि बाकी 3 हजार रुपये ‘मिस्ति्रयों के खर्चे’ के लिए हैं। पीडि़त का कहना है कि विद्युत विभाग के कर्मचारी ऐसे पैसे मांगते हैं, मानो यह कंपनी उनकी पैतृक संपçा हो।
विद्युत विभाग की
गलती से 35,000 रुपये का बकाया नोटिस
हैरानी की बात तब हुई, जब विद्युत विभाग ने उसी अस्थायी कनेक्शन के लिए 35,000 रुपये से अधिक का बकाया बिल दिखाते हुए मामला नेशनल लोक अदालत में डाल दिया। डॉ. चौहान को जब लोक अदालत से नोटिस मिला,तो वे हैरान रह गए। उनका कहना है कि अस्थायी कनेक्शन का पूरा भुगतान करने के बाद ही उन्हें स्थायी कनेक्शन मिला था,फिर यह बकाया कहां से आ गया? नोटिस में याज सहित 35,000 रुपये से अधिक की राशि चुकाने की बात कही गई थी। डॉ. चौहान ने कहा,अगर मेरे पास भुगतान का सबूत न होता, तो मुझे यह भारी-भरकम राशि चुकानी पड़ती।
लोक अदालत में विद्युत विभाग को लगी फटकार
नेशनल लोक अदालत में जब डॉ. चौहान अपने भुगतान के पूरे सबूत लेकर जज के सामने पेश हुए, तो विद्युत विभाग के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। अपनी गलती स्वीकार करते हुए विभाग ने मामले को तुरंत सेटलमेंट कर लिया। हालांकि,इस पूरी प्रक्रिया से डॉ. चौहान को काफी परेशानी हुई। उन्होंने बताया कि अपने व्यस्त शेड्यूल से समय निकालकर लोक अदालत में उपस्थित होना पड़ा,जिसके लिए वे विद्युत विभाग को जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने विभाग की लापरवाही के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत करने की बात भी कही।
