- जिम्मेदार कभी भी बस स्टैंड जाकर यात्रियों से लेने वाले किराए की नहीं लेते जानकारी क्यों?
- क्या बस मालिकों के सामने नासमस्तक है क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी व उनका उड़नदस्ता?
- यदि यात्री को जाना अंबिकापुर है तो रायगढ़ तक का किराया क्या गुंडागर्दी के दम पर वसूला जाता है?
- अंबिकापुर बस स्टैंड में यात्रियों को सीट खाली है कहकर बुलाया जाता है पहुंचने के बाद कहते हैं सीट खाली नहीं है चिरमिरी और रायगढ़ कोटे से मिल सकती है सीट देना पड़ेगा ज्यादा किराया
- यात्री से अतिरिक्त 500 से 1000 लेकर दिया जाता है बसों में सीट:सूत्र

–भूपेन्द्र सिंह –
अंबिकापुर,18 मार्च 2025 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग में एक ही अंतरराज्यीय बस स्टैंड है जहां से हर राज्यों के लिए बस जाती है और यात्री भी यहां से हर राज्य में जाने के लिए आते हैं, पर यात्रियों के साथ जो लूट हो रही है उस पर किसी का भी ध्यान नहीं जाता है, यात्री यहां पर बड़े-बड़े बस मालिकों के एजेंट के हाथों लूट जा रहे हैं,ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जबरदस्ती ही उनसे किराया वसूली की जाती है किराया का दर सूची का पता नहीं जिसे जो पाया जैसे पाया जितना अधिक ले सकते हैं यात्रियों से किराया लेकर उन्हें लूट रहे हैं,यदि यात्री को जाना है अंबिकापुर तो रायगढ़ तक का किराया लिया जाता है, नहीं तो सीट देने से इनकार किया जाता है,रोज नोक झोक की स्थिति निर्मित होती है पर पर जिम्मेदार अधिकारी कभी भी उसे बस स्टैंड पर जाकर यात्रियों के साथ नियम से अधिक किराया लेने की जांच नहीं करते हैं, या कहा जाए तो उनके प्रभाव में इतना दबे हुए हैं की यात्री बस तक जाना उनके सान के खिलाफ है। होली की छुट्टी विताकर आ रहे एक यात्री ने बताया कि औरंगाबाद से मैं बैठा अंबिकापुर के लिए पर मुझे रायगढ़ तक का किराया देना पड़ा क्योंकि उनका कहना था कि रायगढ़ तक का ही किराया लगेगा,अब मुझे आने की मजबूरी थी इस वजह से मुझे रायगढ़ तक का किराया देना पड़ा होली की छुट्टी के बाद बसों में भीड़ थी और बस के एजेंट की मनमानी देखने को मिला, जहां पर एक स्लीपर में दो लोग बैठ कर जाते हैं पैसे देने के बाद वहां पर तीन से चार लोगों को जबरदस्ती बैठाया गया, जिसे लेकर यात्री के बीच नोक झोंक भी देखने को मिले ऐसा लग रहा था कि यात्रियों का शुभ यात्रा नहीं नोक झोक वाला यात्रा बन गया था,जहां पैसे भी ज्यादा लग रहे थे और सीट पर भी क्षमता से ज्यादा लोग बैठ कर जा रहे थे। किराया निर्धारण भी कोई चीज होती है इस नाम का तो पूरी तरीके से माखोल उड़ाया जा रहा था।
यात्रियों की माने तो राजहंस बस पर यात्रियों से जमकर किराया वसूल किया जा रहा है अंबिकापुर से पटना,औरंगाबाद गया रांची जाने वाली बसों में अंबिकापुर से जाने वाले यात्रियों से रायगढ़ एवं चिरमिरी का पैसा वसूला जा रहा है, यात्रियों ने जानकारी देते हुए बताया कि जब हम इनके अंबिकापुर बस स्टैंड के एजेंट मोबाइल नंबरों पर पटना बिहार जाने के लिए टिकट मांगे तो वे कहता हैं कि आप अंबिकापुर आ जाओ पूरी बस खाली है जब हम सब अंबिकापुर पहुंच गए तो उनके एजेंट का बाद व्यवहार तुरंत चेंज हो जाता है दादागिरी पर उतर जाते हैं और कहते हैं कि आपने बात तो किया था लेकिन कुछ पैसा एडवांस डाल नहीं था आप 4 घंटे पहले बात किए थे फिर आपने कुछ बताया नहीं अभी तक हम आपका इंतजार थोड़ी करेंगे स्टैंड में यात्री आ गए और बस फुल हो गई है यहां का कोटा फूल है यदि आपको यात्रा करनी है और सीट चाहिए तो तो मैं चिरमिरी एवं रायगढ़ के कोटे से सीट दे सकता हूं लेकिन किराया में चिरमिरी और रायगढ़ का ही लूंगा…बिचारा लाचार यात्री जो अपने परिवार के साथ यात्रा कर दूसरे प्रदेश जाना चाहता है इनकी मनमानी का शिकार हो जाता है और मुंह मांगा किराया दे देता है ऐसा धोखा देकर लगातार यात्रियों के साथ मनमानी पर राजहंस बस संचालक और उसके एजेंट उतारू है।
बैतूल और उसके परिवार का पटना,रांची गया मार्ग पर एक तरफा दबदबा,भांजा और भतीजा करते हैं यात्रियों से बदसलूकी और अवैध उगाही…
ज्ञात हो कि राजहंस बस का संचालक रांची और पटना गया रोड पर अपना वज्र साम्राज्य स्थापित कर रखा है, बिहार झारखंड और छत्तीसगढ़ की सरकारी यात्रियों के सुविधाओं के लिए दर्जनों रिक्तियां परस्पर कार के तहत दे रखी हैं लेकिन इन सभी व्यक्तियों पर पिछले तीन दशक से यह परिवार की काली छाया पड़ी हुई है यही कारण है कि इस मार्ग पर अपना एक छात्र राज स्थापित कर रखा है यात्रियों से बदसलू की मनमाना किराया वसूली और कभी भी कहीं पर भी बसों को खड़ा कर यात्रियों से बदतमीजी करने का सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ है और छाीसगढ़ से भी लगभग रिक्तियों पर इसका कजा है, वही बिहार राज्य की रिक्तियां पर भी यही बस मालिक परमिट लेकर बसों का संचालन नहीं कर रहे हैं, नियमों के तहत जिस राज्य का बस मालिक निवासी है वही उसे राज्य की रिक्तियां ले सकता है लेकिन बैतूल और उसके भांजे तीनों राज्य से परमिट लिए हुए हैं और छाीसगढ़ सरकार से बाकायदा काउंटर साइन भी करते हैं जबकि वे सभी छाीसगढ़ राज्य के निवासी हैं आखिर दूसरे प्रदेशों से यही बस मालिक यदि नियमों के विरुद्ध परमिट ले आते हैं तो हमारी सरकारी काम से कम नियम विरुद्ध काम ना करें और उनके काउंटर साइन ना करें लेकिन राज्य परिवहन प्राधिकार के रायपुर के दफ्तर में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों के कारण यह भ्रष्टाचारी आज भी पनप रहे हैं और यात्रियों से बदसलूकी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं सरकारों ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए करीब दर्जन भर बसें संचालित करने के लिए परमिट रूट तय कर रखे हैं लेकिन अपना दबदबा और रोड पर एक तरफा वज्र साम्राज्य स्थापित करने के गरज से बैतूल और उसके भांजे बेसन का परमिट तो ले रखे हैं लेकिन बसों का संचालन नहीं कर रहे हैं जिन बसों का संचालन कर रहे हैं उन पर यात्रियों के साथ मनमानी कर रहे हैं शासन प्रशासन आंख बंद करके इनको लूटपाट की अनुमति दे रखा है ऐसा नहीं है कि यात्री इसकी शिकायत नहीं करते हैं लेकिन प्रदेश के सबसे प्रभावशाली नेता जी का अपने आप को खास बात कर लोगों से कब तक बैतूल और उसका परिवार यात्रियों से बदसलूकी और शोषण करता रहेगा,, माननीय मुख्यमंत्री जी को इस और गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।