कोरिया/सोनहत@क्या CMHO रिश्वत लेने वाले कर्मचारी पर कार्यवाही से घबरा रहे?

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-रवि सिंह-
कोरिया/सोनहत,18 मार्च 2025 (घटती-घटना)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत में कार्यरत एक सीएचओ ने विकास खंड प्रबंधक डाटा शिवम गौतम पर 84 हजार रुपये रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता सत्यदीप भगत ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और एंटी करप्शन ब्यूरो को लिखित शिकायत दी है, जिसमें उन्होंने रिश्वत न देने पर वेतन रोकने और नौकरी से निकालने की धमकी देने की बात कही है। सारे प्रामाणिक दस्तावेज के साथ खाते में पैसे का लेनदेन सहित कई तथ्य होने के बावजूद कोरिया के सीएमएचओ साहब अभी तक कोई कार्यवाही नहीं कर पाए, यहां तक की इस मामले के लिए जांच टीम भी गठित नहीं कर पाए, आखिर ऐसा क्या वजह है कि कोरिया के सीएमएचओ साहब इस मामले में लेट लतीफ कर रहे हैं? क्या वह आरोपी को प्रार्थी पर दबाव बनाने के लिए मौका दे रहे हैं ताकि वह शिकायत वापस ले ले और वह कार्रवाई से वह बच जाए?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जुलाई 2024 से दिसंबर 2024 तक की कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि (पीएलपी) का सत्यापन होने के बाद जब उन्होंने भुगतान की जानकारी ली, तो विकास खंड प्रबंधक ने 99,900 रुपये में से 84,000 रुपये रिश्वत के रूप में मांगे। जब उन्होंने देने से इनकार किया, तो उन्हें धमकी दी गई कि उनका भुगतान रोक दिया जाएगा और उनकी नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है। यह पैसा शासकीय पैसा है पर इस पैसे में हुए बंदर बाट पर जहां त्वरित कार्रवाई होनी थी वहां पर अभी तक जांच टीम गठित ना हो पाना भी कहीं ना कहीं इस मामले को दबाने का प्रयास माना जा रहा है। जिस प्रकार से रिश्वत लेने की शिकायत आई है, शिकायत के बाद इस बात का भी अनुमान लगाया जा रहा है कि साल में कितने लाख रुपए के शासकीय पैसे का दुरुपयोग किया गया है और ऐसा ही कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी हुआ होगा, यदि इस पर कार्यवाही होती है तो इस प्रकार का भ्रष्टाचार से बचा जा सकता है और शासकीय पैसे का दुरुपयोग को भी बचाया जा सकता है।


शिकायत वापस लेने का दबाव,आरोपी खुद पहुंचा घर
रिश्वत की शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आरोपी शिवम गौतम अपने पिता और बहन के साथ शिकायतकर्ता के घर पहुंचा और शिकायत वापस लेने की गुहार लगाने लगा। उसने यह भी कहा कि अगर शिकायत वापस ली जाती है, तो वह ली गई राशि वापस कर देगा।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
आरोपी के खिलाफ शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सीएमएचओ कार्यालय ने न ही जांच टीम गठित की है और न ही कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। इससे पहले भी एनएचएम में अवैध वसूली के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन प्रशासन की निष्कि्रयता से ऐसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
अगस्त से कई जांचें लंबित
सीएमएचओ कार्यालय में अगस्त 2024 से कई जांच लंबित हैं। आरोप है कि सीएमएचओ डॉ. प्रशांत सिंह खुद इन मामलों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। जिन मामलों में जांच की जरूरत है,उन्हें जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है,जिससे भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की रणनीति बनाई जा सके।


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