अंबिकापुर प्रचार केंद्र में धूमधाम से मनाया गया गौर पूर्णिमा महोत्सव
अंबिकापुर,17 मार्च 2025 (घटती-घटना)। इस्कॉन अंबिकापुर प्रचार केंद्र में रविवार को गौर पूर्णिमा महोत्सव भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। हरिनाम संकीर्तन के प्रवर्तक भगवान चैतन्य महाप्रभु के शुभ अवतरण दिवस को मनाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। संपूर्ण वातावरण हरे कृष्ण महामंत्र के संकीर्तन से गुंजायमान हो गया, जिससे भक्तों में अपार आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
महोत्सव का शुभारंभ भक्तिमय कीर्तन से हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने नृत्य और भजन के माध्यम से अपनी भक्ति भावनाओं को अभिव्यक्त किया। इस विशेष अवसर पर 51 किलो फूलों से भव्य फूलों की होली खेली गई, जिससे पूरा परिसर रंग-बिरंगे पुष्पों की सुगंध से भर गया और भक्तगण अपार आनंद से झूम उठे। अलौकिक वातावरण में ब्रह्म संहिता का पाठ करते हुए भगवान गौर-निताई का भव्य अभिषेक फलों के रस, पंचामृत और फूलों से किया गया। हरिनाम संकीर्तन के साथ भगवान गौर निताई एवं महाप्रभु जगन्नाथ की वैदिक पंचरात्र पद्धति से आरती की गई।
भगवान चैतन्य महाप्रभु को भक्तों द्वारा तैयार विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों सहित विशेष 56 भोग अर्पण किए गए। भोग अर्पण के बाद सभी उपस्थित भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिवेश सिंह, राजकीर्ति जायसवाल, हेमंत गोयल, शार्दुल विक्रम, स्वस्तिक श्रीवास्तव, सिद्धार्थ पाठक, श्रीमति अश्विनी देशमुख, प्रज्ञा पांडे, महिमा कुशवाहा, प्रियांशी कन्नौजिया की भूमिका प्रमुख रही।
युवा वर्ग में बढ़ रही अध्यात्म के प्रति रुचि
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में युवा,विशेष रूप से मेडिकल और इंजीनियरिंग के छात्र, बढ़-चढकर शामिल हुए। उन्होंने इस्कॉन के माध्यम से भारतीय संस्कृति,सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक जीवनशैली के प्रचार-प्रसार की सराहना की। युवाओं ने विशेष रूप से गौर पूर्णिमा महोत्सव के दौरान मिले आध्यात्मिक अनुभव को अपने जीवन में अपनाने की इच्छा व्यक्त की। महोत्सव के दौरान इस्कॉन अंबिकापुर प्रचार केंद्र के प्रभारी दयानिधि दास ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु ने जातपात की सीमाओं को तोडकर प्रेम और भक्ति के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दी और कलियुग में हरिनाम संकीर्तन को मोक्ष का सरलतम मार्ग बताया। दयानिधि प्रभु ने बताया कि इस्कॉन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस्कॉन द्वारा महाप्रभु की शिक्षाओं का प्रचार किया जा रहा है और उनकी प्रेरणा से आज विश्व के कोने-कोने में हरे कृष्ण महामंत्र गूंज रहा है।