बैकुण्ठपुर @क्या रिटर्निंग ऑफिसर की गलती किसी प्रत्याशी की हार वजह बनी?

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-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 26 फरवरी 2025 (घटती-घटना)। भले ही नवीन जिला एमसीबी बना था पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लगा कि कोरिया जिला ही नवीन जिला है जिस जिले में कई त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न हो गए इस जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान इतनी खामियां इस बार देखने को मिली की ऐसा लगा कि पहली बार कोई जिले में चुनाव हो रहा है या कहें तो ऐसा लगा नौसिखिए चुनाव करा रहे हैं, अनुभवहीन लोगों के हाथों चुनाव की कमान समझ में आई जिससे कुछ लोगों प्रत्याशियों को नुकसान हुआ जो अब कभी भरा न जा सकने वाला नुकसान है, इसबार ऐसा लगा की पहली बार कोरिया जिले में बैलेट पेपर से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव करवाया जा रहा है ऐसे नौसिखिए अधिकारी कर्मचारी इस चुनाव में बैठे थे और चुनाव प्रक्रिया में त्रुटि के अंबार में प्रत्याशियों के नाम वापसी से लेकर चुनाव चिन्ह आवंटित तक कई त्रुटियां सामने आई। एक नई त्रुटि जो समाने आई है अब वह तो और चौंका देने वाली त्रुटि है जिसमें रिटर्निग ऑफिसर सहित सहायक रिटर्निग ऑफिसर पर कार्यवाही कम से कम होनी चाहिए क्योंकि किसी प्रत्याशी का चिन्ह ही मतदान के दिन बदला जाना अक्षम्य अपराध माना जाना चाहिए।
बता दें कि रिटर्निंग अधिकारी के यहां से प्रत्याशी के लिए चुनाव चिन्ह आवंटित हो जाता है उसकी प्रति भी प्रत्याशी को दे दी जाती है वहीं वह प्रत्याशी आबंटित चुनाव चिन्ह को लेकर पूरा प्रचार भी करता है पर जिस दिन चुनाव होना होता है उस दिन प्रत्याशी को पता चलता है कि प्रत्याशी जो चुनाव चिन्ह अपना बताकर लोगों के बीच प्रचार कर रहा था वह अन्य को आबंटित है मतपत्र में और वह जब इसकी शिकायत करता है तो उसे शिकायत पर कोई जवाब या निष्कर्ष देंने की बजाए उल्टे न्यायालय जाने की सलाह दी जाती है, वहीं उसे जब पता चला कि वह जिस चिन्ह के साथ लोगों के बीच उनका मत मांगने जा रहे थे वह चुनाव चिन्ह तो उसका है ही नहीं उस समय उसके पैरों तले जमीन खिसक गई वहीं वह जब तक कुछ समझ पाता तब तक सबकुछ संपन्न हो चुका था और वह चुनाव हार चुका था वहीं तब तक तो सारी गड़बडि़यां हो चुकी थी, इसी घटना पर एक कहावत चरितार्थ होती है वह कहावत है’ अब पछताए होत क्या जब चिडि़या चुग गई खेत’ एक हिन्दी लोकोक्ति है. इसका मतलब है कि समय बीत जाने के बाद पछताने से कोई फ़ायदा नहीं होता, यह कहावत प्रत्याशी पर एकदम सटीक बैठती है क्योंकि शुरुआत में ही इस पर ध्यान दे दिया गया होता तो शायद यह स्थिति नहीं होती।
प्रत्याशी पूर्व में मिले चुनाव चिन्ह पर ही अपना प्रचार-प्रसार कर मतदाताओं से अपने लिए मत मांगती रही
प्रत्याशी की माने तो वह अपने आबंटित चिन्ह के साथ प्रचार कर रही थी और उसे आभास ही नहीं था कि वह अंतिम समय में रिटर्निग ऑफिसर की बड़ी गलती का शिकार हो जाएगी। रिटर्निग ऑफिसर प्रिंटिंग कार्य उपरांत यदि पूरे मतपत्रों का मिलान सही से करते तो त्रुटि पकड़ में आ जाती लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अंत में अपनी त्रुटि का ठीकरा रिटर्निग ने प्रत्याशी पर फोड़ दिया और वह आबंटित चिन्ह पर ही प्रचार करती रही और अंतिम दिवस मतपत्र में उसे दूसरा चिन्ह चुनाव का आबंटित प्रकाशित मिला और वह चुनाव हार गई। यह त्रुटि पीठासीन अधिकारी की भी है और अन्य मतदान दल के कमर्चारियों की भी क्यों उन्होंने आबंटित चिन्ह और मतपत्रों का मिलान सही तरीके से नहीं किया और चुनाव संपन्न करा लिया।कार्यवाही की मांग और त्रुटि से हारे प्रत्याशी की जीत घोषित या पुनः चुनाव की मांग प्रत्याशी की है जो जायज भी है।
प्रत्याशी का शिकायत वाला दुखड़ा
खैर पीठासीन अधिकारी ने जो गड़बड़ी की अब इसके बाद प्रत्याशी प्रभावती सिंह पति फुरमान सिंह निवासी मुरमा फरिकापानी थाना व तह0 पटना जिला कोरिया ने कलेक्टर से शिकायत करते हुए कहा कि मेरे द्वारा ग्राम पंचायत मुरमा के वार्ड क. 03 के पंच पद हेतु अभ्यर्थी के रूप में चुनाव लड़ रही थी जिसमें मेरे को दिनांक 06.02.2025 को रिटर्निंग ऑफिसर (पंचायत) के हस्ताक्षर के साथ फावड़ा छाप का चुनाव चिन्ह मिला हुआ था, लेकिन निर्वाचन दिनांक 23.02.2025 को प्राथमिक पाठ शाला मुरमा में निर्वाचन दल के द्वारा मेरा चुनाव चिन्ह सिढी छाप दिवाल में प्रदर्शित किया गया व वैलेट पेपर में भी मेरा चुनाव चिन्ह सीढ़ी छाप था और मेरे साथ वार्ड क. 03 के प्रत्याशी रूकमणी ईश्वर सिंह पोया जिनका चुनाव चिन्ह सिढी छाप है। तथा मेरे चुनाव चिन्ह फावड़ा छाप में 51 मत व सिढी छाप में 25 मत प्राप्त हुआ था। जीत का अंतर 26 मत का है। परंतु चुनाव चिन्ह व नाम स्पष्ट नहीं होने से वार्ड पंच प्रतिनिधि बनने के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मेरे चुनाव चिन्ह में लापरवाही के कारण मेरे साथ अन्याय हुआ है जिसकी गहन जांच करते हुए संबंधित चुनाव अधिकारी व अन्य के विरूद्ध कार्यवाही करें तथा मेरे नाम व चुनाव चिन्ह को दिनांक 06.02.2025 के अनुसार स्पष्ट करते हुए मेरे साथ न्याय करने की कृपा करें।
जब चुनाव चिन्ह बदल दिया गया तो फिर प्रत्याशी को सूचना क्यों नहीं दी गई?
यदि किसी कारणवश किसी प्रत्याशी को आबंटित चुनाव चिन्ह अंतिम समय में बदल दिया गया तो फिर इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई प्रत्यासी को यह भी सवाल उठ रहा है। अब प्रत्याशी चुनाव हारकर इस ग़म में है कि उसको आबंटित चिन्ह ही चुनाव जीत गया है वहीं वह उसी चिन्ह का प्रचार कर रहा था इसलिए वही जीत का हकदार था जो जीत उसे न मिलकर अन्य को मिल गई।
क्या रिटर्निंग ऑफिसर पर होगी कार्रवाई?
पूरे मामले में रिटर्निग ऑफिसर सहित पीठासीन अधिकारी अन्य मतदान दल कर्मचारियों पर कार्यवाही होनी चाहिए क्योंकि यदि आरोप सही है तो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कोरिया जिले में एक आदिवासी समुदाय के पंच प्रत्यासी के साथ यह एक तरह का अन्याय हुआ है जहां उसे रिटर्निंग ऑफिसर की त्रुटि पीठासीन अधिकारी सहित अन्य मतदान दल कर्मचारियों की त्रुटि की वजह से चुनाव में पराजित जो प्रायोजित जैसी हुई का सामना करना पड़ा है। वैसे यदि प्रकाशन गलत हुआ भी था तो स्टीकर लगाकर उसे सुधारा जा सकता था और ऐसे कई पूर्व के उदाहरण हैं जहां ऐसी त्रुटि जिनमें कई बार मतपत्रों में चिन्ह का ही प्रकाशन नहीं होना होता रहा है जहां सजग और कार्य के प्रति जिम्मेदार रिटर्निग ऑफिसर, सेक्टर ऑफिसर,पीठासीन सहित अन्य मतदान दल कर्मचारियों की सजगता से पकड़ा जाता रहा है और स्टीकर लगाकर चुनाव कराया जाकर बिना किसी विवाद शिकायत चुनाव संपन्न कराकर जिले का नाम खराब होने से बचाया गया है। वैसे इस तरह के आरोप यदि सही है तो निश्चित ही रिटर्निंग ऑफिसर को कटघरे में खड़े करना चाहिए और कठोर कार्यवाही करनी चाहिए क्योंकि एक आदिवासी समुदाय का प्रत्यासी केवल लापरवाही के कारण जिम्मेदारों के चुनाव हार गया है।


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