बैकुण्ठपुर/सूरजपुर,@क्या कोरिया जिले में चुनाव आयोग था ही नहीं…कर्मचारी के प्रचार पर नहीं हुई कार्यवाही और ना ही पैसा पकड़ने पर कर पाया कोई कार्रवाई?

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-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर/सूरजपुर,23 फरवरी 2025 (घटती-घटना)। छाीसगढ़ में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का अंतिम चरण 23 फरवरी को संपन्न हो गया, पर कोरिया जिले में यह चुनाव काफी विवादस्पद रहा, जिला निर्वाचन आयोग भी कहीं न कहीं निष्पक्ष चुनाव कराने में आसफल माना जा रहा है, ऐसा लग रहा था कि साा पक्ष के इशारे पर जिला निर्वाचन काम कर रहा हो, यह आरोप भी चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का है और देखने को भी कुछ ऐसा ही मिला,खुलेआम जनपद प्रत्याशी के शिक्षक पति प्रचार करते रहे, प्रचार के दौरान पैसे भी पकड़ने की खबर आई सारे शिकायतों के बाद भी जिला प्रशासन कार्यवाही करने का हिम्मत नहीं जुटा पाया, ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर विपक्षी नेता के लिए साा पक्ष में कौन सा ऐसा नेता था जो उसे हर कार्यवाही से बचा रहा था, लोगों का कहना है कि वह नेता पूरी तरीके से ढाल बनकर खड़ा था, ऐसा किसी समझौते के तहत हो रहा था यह तो अंदर खाने की बात है? पर सभी को यह दिखा की साा पक्ष के नेता अपने समर्थित प्रत्याशी को छोड़कर विपक्षी पार्टी के नेता का सहयोग करते दिखे, जबकि उनके खुद की पार्टी के लोग इसे किनारा कर चुके हैं और यह अलग थलग अलग हैं पर इसके बावजूद उसे प्रत्याशी के ऊपर साा पक्ष की मेहरबानी समझ के परे है? जब साा पक्ष को उस प्रत्याशी पर मेहरबान होना ही था तो अपने ही पार्टी का समर्थित प्रत्याशी क्यों नहीं बना लिया गया?
हाई कई प्रोफाइल सीट पर नहीं था किसी का अंकुश?
जिला व जनपद के हाई प्रोफाइल सीटों को लेकर जिला निर्वाचन गंभीर नहीं दिखा जिस वजह से यहां पर आचार संहिता का कई जगह उल्लंघन होते देखा गया, ऐसा लग रहा था कि आचार संहिता का उल्लंघन नहीं उसके धज्जियां उड़ाई जा रही है, तरह-तरह से प्रलोभन तो हो ही रहे थे, तमाम तरीके से पैसे से दारू मुर्गा सब बटा जा रहा था, जानकर भी अनजान निर्वाचन विभाग आंखें मूंदे बैठा था, ऐसा लग रहा था यह लोकतंत्र को मजबूत करने वाला चुनाव नहीं लोकतंत्र को कमजोर करने वाला चुनाव था? शासकीय कर्मचारी तो अपना निर्वाचन से ड्यूटी कटवाकर चुनाव प्रचार कर रहे थे ऐसा लग रहा था कि उनका चुनाव ड्यूटी से छुट्टी ही चुनाव प्रचार के लिए दी गई थी? अब जिला व जनपद का परिणाम सही तरीके से आप आता है या नहीं या फिर इसमें भी धांधली होती है यह भी अब चुनावी परिणाम आने के बाद ही पता चलेंगे।
जमकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चल दारु मुर्गा पर एक भी कार्रवाई नहीं
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का अंतिम चरण लोभ प्रलोभन के बीच संपन्न हुआ जमकर मुर्गा दारू के साथ पैसे के लिफाफा बेट गए, पटना थाने से एक भी कार्यवाही होने की खबर क्यों नहीं आई? ऐसा लग रहा था कि जिला निर्वाचन पूरी तरीके से आंख मूंद लिया था? क्या बैलेटपेपर से भाजपा समर्थित प्रत्याशी नहीं जीत सकते थे इस वजह से प्रशासन को ही जितवाने में लगा दिया गया? और जितने षड्यंत्र कर सकते थे करने की अनुमति दे दी गई? ऐसा दूसरे व तीसरे चरण से ही देखने को मिला। ऐसी खबरें कई जिले से आई सूरजपुर जिला तो इस मामले को लेकर काफी हाइलाइट रहा। बैलेटपेपर से भाजपा समर्थित प्रत्याशी का हार रहे थे क्या यही कारण था की वैलेटपेपर से भाजपा से प्रत्याशी को जितना ही एवं के सवाल को खत्म करने का प्रयास था?
परिणाम निष्पक्ष आएगा या फिर परिणाम में भी षड्यंत्र होगा?
सूरजपुर जिले में निर्वाचन विभाग की लापरवाही तो खूब देखने को मिली शिकायतें भी खूब आई, पर कोई कुछ नहीं कर पाया प्रत्याशियों का आरोप था कि सारे अधिकारी न जाने किसके दबाव में थे की बार-बार उन्हें भाजपा प्रत्याशियों को जीतने के लिए फोन आ रहे थे, जिस वजह से जीते हुए प्रत्याशियों के साथ चीटिंग करके भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को जितना ही जिला निर्वाचन का कर्तव्य जैसा लगा? ऐसा सिर्फ जिला पंचायत चुनाव में ही देखा गया, आखिर ऐसा चुनाव करवाने या ना करवाना एक बराबर ही समझा जा रहा है ऐसे चुनाव प्रक्रिया से मजबूत लोकतंत्र की कल्पना कैसे होगी यह भी अब बड़ा सवाल है?
क्या निर्वाचन सहित जिला प्रशासन सत्ता पक्ष के प्रत्याशियों को जितवाने के लिए कर रहा काम?
जिस प्रकार से आरोप आ रहे थे और आरोप लगाए जा रहे थे उसे देखकर तो यही सवाल उत्पन्न हो रहा है कि क्या निर्वाचन विभाग निष्पक्ष चुनाव करने में असफल रहा? क्या साा के दबाव में साा समर्थित प्रत्याशी को जितवाना ही उनकी मजबूरी थी? अचार संहित का उल्लंघन को लेकर शिकायतें आती रही पर कार्यवाही एक भी नहीं हुई, प्रलोभन में दारू मुर्गा से लेकर लिफाफे बढ़ते रहे पर कार्रवाई एक भी नहीं हुई ऐसा लगा कि यह सब करने की अनुमति दे दी गई हो।


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