लेख@ वास्तविकता क्या है वैलेंटाइन डे मनाने का

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हम सब मनुष्य लोग प्रेम का परिणाम हैं। प्रेम किसी को भी, किसी समय, किसी से हो सकता है। प्रेम जाति,धर्म, भाषा, क्षेत्र, उम्र आदि बातों को नहीं मानता। प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण नहीं है बल्कि प्रेम अंतरात्मा की आवाज है। युगो युगांत्रों से हम प्रेम कहानियाँ सुनते आए हैं। भारत में प्रेम के इजहार के लिए मधुमास दिवस, प्यार दिवस, बसंत उत्सव आदि मनाए जाते हैं। प्रेम कोई आज की बात नहीं है। राधा और कृष्ण के किस्से हम सब लोग जानते हैं। लैला मजनू, शीरी फरहाद, हीर रांझा आदि के किस्से लगभग सभी नौजवान तथा नवयुवतियां जानती हैं। हमारी फिल्म तथा टीवी चैनलों में ऐसे लगता है जैसे कि प्रेम मोहब्बत ही मुख्य मुद्दा हो। पहले पहले प्रेम करना लड़कियों की दृष्टि से एक बंदिश होती थी। अगर मां बाप को पता चल जाता कि उनकी लड़की किसी से प्रेम करती है तो उसका घर से निकलना बंद कर दिया जाता था। लेकिन फिर भी अगर किसी लड़के या लड़की का आपस में प्रेम होता था तो उसमें मर्यादा तथा लुकाछिपी की बात जरूर होती थी। कई बार तो किसी लड़की का किसी लड़के से प्यार होने का राज खुलता था तो उसकी शादी में बहुत रुकावट आ जाती है। प्रेमी तथा प्रेमिका आंखों आंखों में एक दूसरे से प्यार करते थे, कभी कभार एक दूसरे को कोई रुमाल, फूल या पत्ते दे दिया करते थे जिन्हें कि वह अपनी किताबों या कापियों में संभाल कर रखते थे। आजकल भी कुछ मामले ऐसे मामले देखने को मिलते हैं जिसमें प्रेम करने वाले युवा प्रेमियों को समाज जान से मार देता है या फिर किसी वृक्ष पर फांसी पर लटका देता है। कई बार तो युवा प्रेमी जब कोर्ट मैरिज कर लेते हैं तो समाज उनका तथा उनकी मां-बाप का बहिष्कार कर देता है दूसरे शब्दों में हुका पानी बंद कर देता है। यह सारी बातें पारंपरिक प्यार मोहब्बत की है
लेकिन अब जमाना बदल गया है। 1990 के दशक से भारत में प्यार मोहब्बत का इजहार करने के लिए हर साल 14 फरवरी को…वैलेंटाइन डे.. अर्थात प्यार दिवस. दुनिया के बहुत सारे देशों की तरह भारत में भी जोश और खरोश के साथ मनाया जाता है। इस दिन युवा प्रेमी तथा प्रेमिका एक दूसरे को लाल गुलाब या फिर और उपहार का आदान-प्रदान करते हैं। इस उत्सव को मनाने के लिए कई बार पार्टियां भी की जाती हैं, युवा प्रेमी तथा प्रेमिका सार्वजनिक तौर पर या किसी होटल में डांस भी करते हैं। आजकल प्रेम और प्यार पहले की तरह डर डर कर या फिर छुप कर नहीं किया जाता। बहुत बार तो लड़का या लड़की अपने मां-बाप को साफ-साफ बता देते हैं कि वो एक दूसरे को पसंद करते हैं और विवाह करना चाहते हैं। अगर मां-बाप सहमत ना भी हो तो भी वह कोर्ट मैरिज कर लेते हैं। पहले जमाने में तो प्रेम के संदेश चिट्टियों, कबूतरों या फिर छोटे बच्चों के द्वारा उन्हें लालच देकर पहुंचाए जाते थे। मेरे विचार में कालिदास के प्रसिद्ध मेघदूत में बादल प्रेमी प्रेमिका के संदेश को ले जाने वाला पहला डाकिया समझ जाना चाहिए। लेकिन आजकल प्रेम के इजहार के लिए हमारे पास मोबाइल जैसा सोशल मीडिया है जिसमें वीडियो कॉलिंग, एसएमएस आदि के द्वारा प्यार मोहब्बत के संदेश का आदान-प्रदान किसी भी समय और कहीं भी किया जा सकता है। शेक्सपियर ने अपने किसी नाटक में…प्रथम दृष्टि में प्यार…लव एट फ स्ट साईट की बात कही है। अधिकांश मामलों में जब कोई लड़की किसी लड़के को मुस्कुरा कर देखती हैं या मुस्कुरा कर बात करती है तो उस लड़के को ऐसे लगता है जैसे कि वह उसे प्यार करती हो। लेकिन यह जरूरी नहीं। आमतौर पर हम एक दूसरे के साथ मुस्कुरा कर ही बात करते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हम सब एक दूसरे को प्यार करते हैं। कई बार एक तरफा प्यार होता है अर्थात लड़का तो लड़की से प्रेम करता है लेकिन लड़की की दिलचस्पी किसी और में होती है। इसके उलट भी हो सकता है अर्थात लड़की सोचती हो कि यह लड़का मुझे प्यार करता है लेकिन वह लड़का वास्तव में किसी और लड़की में दिलचस्पी रखता हूं। अब कैसे पता चले कि कौन किसे प्यार करता है। प्यार तो एक मन की स्थिति है। प्यार बाजार में बिकता नहीं है। किसी से जबरदस्ती प्यार की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह तो दिल की भावना है। यह तो दिल के देने और दिल के लेने का मामला है। पुराने विचारों के लोग अपनी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए…वैलेंटाइन डे… मनाने के पक्ष में नहीं है! कुछ समय पहले कुछ अति उत्साही…. वैलेंटाइन डे विरोधी… संगठनों ने लड़के तथा लड़कियों को पार्कों में या बागों में आपत्तिजनक स्थिति में व्यवहार करते हुए उनके साथ मारपीट की। ठीक है, प्यार करना कोई पाप या जुर्म नहीं। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि सच्चा प्यार जिंदगी में केवल एक बार और एक से ही होता है। लेकिन आजकल यह देखा गया है कि एक लड़का या लड़की एक समय में एक से ज्यादा के साथ संबंध बनाते हैं। हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि प्यार का मतलब शारीरिक आकर्षण नहीं। लेकिन आजकल के आशिक लोग अपने मनपसंद लड़की से जबरदस्ती शारीरिक आकर्षण के कारण प्यार करते हैं। उसके द्वारा मना करने पर बलात्कार करते हैं, गैंग रेप करते हैं और जान से मार कर टुकड़े-टुकड़े कर देते हैं। इसे प्यार नहीं बल्कि वहशीपन कहना चाहिए। आजकल तो प्यार करने वाले शादीशुदा आदमी और औरत भी… लिव इन रिलेशनशिप… के तहत जब तक दिल चाहे इकट्ठे रहते हैं और फिर जब दिल ‌ऊब जाए तो अपने-अपने रास्ते चले जाते हैं! मैं‌इसे प्यार के नाम पर वेश्यावृत्ति ही कहूंगा! असल में प्यार परमात्मा का नाम जपने के बराबर है! इसमें स्वार्थ, लुका छिप्पी, केवल शारीरिक आकर्षण नहीं होता। प्यार तो आत्मा की आवाज है, दिल के बदले दिल लेने और देने की बात है। प्रेम कोई व्यापार नहीं, प्यार का दिखावा नहीं होता, प्रेम त्याग चाहता है। प्रेम के लिए इंग्लैंड के राजा एडवर्ड तृतीय ने अपना ताजो तख्त छोड़ दिया था। सच्चा प्रेम स्थाई होता है। कभी डगमगाता नहीं है। सच्चे प्यार की अभिव्यक्ति के लिए पति-पत्नी भी वैलेंटाइन डे मना सकते हैं। वैलेंटाइन डे मर्यादा में रहकर मनाना चाहिए। दिल है तो धड़केगा, धड़केगा तो प्यार भी करेगा और प्यार किसी भी उम्र में, किसी भी जगह, किसी भी क्षेत्र में तथा किसी भी भाषा वाले के साथ हो सकता है। लेकिन यह देखा गया है कि लोग खुद तो प्रेम करना अपना अधिकार समझते हैं लेकिन जब कोई दूसरा व्यक्ति उनके परिवार की बेटी या बहन के साथ प्रेम करता है तो वह इसके खिलाफ हो जाते हैं। बहुत कम मामलों में ही मां बाप अपने बच्चों को अपनी मर्जी से प्रेम करके प्रेम विवाह करने की सच्चे दिल से सहमति देते हैं।
प्रोफेसर शाम लाल कौशल
रोहतक-124001( हरियाणा)


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