बैकुंठपुर/पटना,@सरगुजा संभाग का इकलौता ग्राम पंचायत रनई जहां बिना चुनाव के निर्वाचित होते है सरपंच व पंच

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कोरिया जिले के रनई ग्राम पंचायत का बिना चुनाव सरपंच व पंच चुने का का रिकॉर्ड कायम
आजादी के 78 साल में एक भी बार नहीं हुआ चुनाव हर बार रनई जमींदार ने निर्विरोध बनाया सरपंच व पंच
पहले पिता और अब बेटा योगेश शुक्ला निर्विरोध चुनाव के क्रम को रखे हुए हैं जारी
आजादी के बाद से इस गांव में कभी नहीं हुआ चुनाव इस बार फिर सर्वसम्मति से चुन लिए गए पंच और सरपंच
कोरिया जिले का रटगा ग्राम पंचायत भी बना रनई जैसा गांव,सर्वसम्मत्ति से चुने गए सरपंच पंच,अब नहीं होगा वहां भी चुनाव

बैकुंठपुर/पटना,04 फरवरी 2025 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग व कोरिया जिले का इकलौता गांव है रनई जहां पर आजादी के बाद से आज तक कभी भी सरपंच व पंच का चुनाव नहीं हुआ है, यहां पर सर्वसम्मति से चुने जाते हैं सरपंच व पंच, आजादी के 78 साल बाद भी यह सिलसिला जारी है। पहले रनई जमींदार योगेश शुक्ला के पिता के रहते यह प्रक्रिया सतत चली आ रही थी और अब योगेश शुक्ला इस प्रक्रिया को सतत आगे बढ़ा रहे हैं। एक ओर जब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए प्रदेश समेत जिलेभर में गहमागहमी बनी हुई है, ऐसे में लोकतंत्र की मिसाल पेश करते हुए कोरिया जिले की जनपद पंचायत बैकुंठपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत रनई ने एक बार फिर निर्विरोध सरपंच और 15 पंचों का चयन कर अपनी ऐतिहासिक परंपरा को कायम रखा है। आजादी के बाद से इस गांव में कभी चुनाव नहीं हुआ और यह परंपरा आज भी बरकरार है। रनई ग्राम में सौहार्द और आपसी सहमति से प्रतिनिधियों का चयन किया जाता है, जिससे बिना किसी मतदान के पंचायत का गठन होता है। इस परंपरा को बनाए रखने में रनई जमींदार योगेश शुक्ला का अहम योगदान रहता है। उनकी पहल से गांव में निर्विरोध चुनाव की परंपरा बनी हुई है, जिससे पंचायत संचालन में किसी प्रकार का राजनीतिक तनाव नहीं रहता।
कोरिया की दूसरी ग्राम पंचायत रटगा जहां सरपंच सहित 11 पंच निर्विरोध निर्वाचित
अब ग्राम पंचायत रटगा में भी अजा वर्ग के सरपंच जगरनाथ सिंह सहित 11 पंच निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। ग्राम पंचायत में सरपंच सहित पूरे पंच के निर्विरोध चुने का यह कारनामा दूसरी बार हुआ है। इसके पीछे वहां के कुछ वरिष्ठ नागरिकों का योगदान है जिन्होंने सभी को एकजुट रखते हुए एकता की मिसाल पेश की है।
अन्य पंचायतों के लिए मिसाल
रनई ग्राम पंचायत की यह लोकतांत्रिक परंपरा अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायक व मिसाल है, जहां चुनावी प्रतिस्पर्धा की जगह आपसी सहमति से नेतृत्व तय किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस परंपरा से पंचायत में शांति बनी रहती है और विकास कार्य बिना किसी राजनीतिक विवाद के संचालित होते हैं।
चुने गए निर्विरोध सरपंच-पंच
रनई में इस बार बबीता ठकुरिया सरपंच, गीता शुक्ला उप सरपंच, पंचों में यशोदा ठकुरिया, आशा दुबे, सुमित्रा पटेल, लता विश्वकर्मा, वेदमति साहू, ज्योति सिंह, हीरामनी पंडो, राधा साहू, सोनकुंवर कोल, शशि कोल, लीलाकोल, श्यामवती कोल, चंद्रमनी एवं सोनकुवंर कोल शामिल है
निर्विरोध चुनाव का ऐतिहासिक है रिकॉर्ड
रनई के ग्रामवासियों ने एक बार फिर से मतदान की आवश्यकता ही नहीं पड़ने दी और आपसी सहमति से सरपंच और 15 पंचों का चयन किया। यह सिलसिला आजादी के बाद से लगातार चला आ रहा है और एक मिसाल बन चुका है। निविरोध चयन की घोषणा के बाद गांव में उत्सव ग्रामीणों ने इसे आपसी भाईचारे और सामंजस्य की जीत बताया।
आजादी के समय से कायम है परंपरा
रनई जमीदार योगेश शुक्ला रनई की इस परंपरा को बनाए रखने में हमारे पूर्वजों का अहम योगदान रहा। जिसे आज भी कायम हम लोग रखे हुए हैं। हर बार बिना किसी विवाद के जन प्रतिनिधियों का चयन करते हैं। इस अनूठी परंपरा ने एक बार फिर रिकॉर्ड बना दिया है, जहां दशकों से बिना किसी चुनावी प्रतिस्पर्धा के पंचायत संचालन होता आ रहा है।


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