कवासी लखमा को थी घोटाले की पुरी जानकारी
रायपुर,21 जनवरी 2025 (ए)।छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में ईडी ने बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने अपना बयान जारी कर रहा है कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बडि़यों की जानकारी थी। लेकिन उन्होनें ने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया ।
लखमा ने शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके कारण छत्तीसगढ़ राज्य में एफ एल-10ए लाइसेंस की शुरुआत हुई। गौरतलब है पिछली सरकार में हुए लीकर स्कैम मामले में विधायक कवासी लखमा 21 जनवरी तक ईडी की रिमांड पर है। जहां प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी उनसे पूछताछ कर रहे है।
सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे कवासी
प्रवर्तन निदेशालय ने अपने प्रेस नोट में बताया है कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे । लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी। जिसके बदल में कवासी लखमा को शराब घोटाले से होने वाली कमाई से हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलता था। ईडी ने जांच में पाया कि कवासी लखमा घोटाले से मिलने वाली आय से कई अचल संपत्तियों के निर्माण में लगाया।
कमीशन रुपए बेटे के घर निर्माण और कांग्रेस भवन के निर्माण में लगे
शराब घोटाला केस में ईडी की हिरासत पर चल रहे पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा पर श्वष्ठ का आरोप है कि शराब घोटाला मामले में हर महीने कवासी लखमा 2 करोड़ रुपए मिलते थे। श्वष्ठ के वकील सौरभ पांडेय ने कहा कि, 3 साल
शराब घोटाला चला इस दौरा 36 महीने में विधायक लखमा को 72 करोड़ रुपए मिले और ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में लगे।
एफ एल-10 लाइसेंस क्या है?
एफ एल-10 का फुल फॉर्म है, फॉरेन लिकर-10। इस लाइसेंस को छत्तीसगढ़ में विदेशी शराब की खरीदी की लिए राज्य सरकार ने ही जारी किया था। जिन कंपनियों को ये लाइसेंस मिला है, वे मेनूफैर्ख्स यानी निर्माताओं से शराब लेकर सरकार को सप्लाई करते थे। इन्हें थर्ड पार्टी भी कह सकते हैं। खरीदी के अलावा भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम भी इसी लाइसेंस के तहत मिलता है। हालांकि इन कंपनियों ने भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन का काम नहीं किया इसे बेवरेज कॉर्पोरेशन को ही दिया गया था। इस लाइसेंस में भी ्र और ख् कैटेगरी के लाइसेंस धारक होते थे।
एफ एल-10 एः-इस कैटेगरी के लाइसेंस-धारक देश के किसी भी राज्य के निर्माताओं से इंडियन मेड विदेशी शराब लेकर विभाग को बेच सकते हैं।
एफ एल-10 बीः-राज्य के शराब निर्माताओं से विदेशी ब्रांड की शराब लेकर विभाग को बेच सकते हैं।
घोटाले की रकम 2161 करोड़
निदेशालय की ओर से लखमा के खिलाफ एक्शन को लेकर कहा गया कि, ईडी की जांच में पहले पता चला था कि अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अन्य लोगों का शराब सिंडिकेट छत्तीसगढ़ राज्य में काम कर रहा था। इस घोटाले की रकम 2161 करोड़ रुपए है। जांच में पता चला है कि कवासी लखमा को शराब घोटाले से पीओसी से हर महीने कमीशन मिला है ।
