प्रयागराज@ हर-हर,बम-बम के बीच अखाड़ों का हुआ पहला अमृत स्नान

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@ त्रिवेणी तट पर नागा साधु बने आकर्षण का केंद्र
@ महाकुम्भ 2025 के पहले अमृत स्नान मकर संक्रांति के पावन अवसर पर नागा श्रद्धालुओं ने खींचा ध्यान
@ अखाड़ों का नेतृत्व कर रहे नागा साधुओं के अद्भुत प्रदर्शन को देखने को जमा हुई भारी भीड़
@ घोड़ों पर सवार होकर और पैदल चल रहे नागा साधुओं ने शस्त्रों के साथ अपनी युद्ध कला का किया प्रदर्शन
प्रयागराज,14 जनवरी 2025 (ए)।
महाकुम्भ 2025 के प्रथम अमृत स्नान के दौरान नागा साधुओं का अद्भुत प्रदर्शन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना। त्रिवेणी तट पर इन साधुओं की पारंपरिक और अद्वितीय गतिविधियों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। अमृत स्नान के लिए ज्यादातर अखाड़ों का नेतृत्व कर रहे इन नागा साधुओं का अनुशासन और उनका पारंपरिक शस्त्र कौशल देखने लायक था। कभी डमरू बजाते हुए तो कभी भाले और तलवारें लहराते हुए, इन साधुओं ने युद्ध कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। लाठियां भांजते और अठखेलियां करते हुए ये साधु अपनी परंपरा और जोश का प्रदर्शन कर रहे थे।
अमृत स्नान के लिए निकली अखाड़ों की शोभा यात्रा में कुछ नागा साधु घोड़ों पर सवार थे तो कुछ पैदल चलते हुए अपनी विशिष्ट वेशभूषा और आभूषणों से सजे हुए थे। जटाओं में फूल, फूलों की मालाएं और त्रिशूल हवा में लहराते हुए उन्होंने महाकुम्भ की पवित्रता को और भी बढ़ा दिया। स्व-अनुशासन में रहने वाले इन साधुओं को कोई रोक नहीं सकता था, लेकिन वो अपने अखाड़ों के शीर्ष पदाधिकारियों के आदेशों का पालन करते हुए आगे बढ़े। नगाड़ों की गूंज के बीच उनके जोश ने इस अवसर को और भी खास बना दिया। त्रिशूल और डमरू के साथ उनके प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि महाकुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के मिलन का उत्सव है। शोभायात्रा के दौरान मीडिया ही नहीं, बल्कि आम श्रद्धालुओं के मोबाइल के कैमरे भी नागा साधुओं को कैप्चर करने के लिए हवा में लहरा रहे थे। नागा भी किसी को निराश नहीं कर रहे थे, बल्कि वो अपने हाव भाव से उन्हें आमंत्रित कर रहे थे। कुछ नागा तो आंखों में काला चश्मा लगाकर आम लोगों से इंटरैक्ट भी कर पा रहे थे। उनकी इस स्टाइल को हर कोई कैद कर लेना चाहता था। यही नहीं, नागा साधु नगाड़ों की ताल पर नृत्य करते हुए अपनी परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी जोश और उत्साह से भरपूर गतिविधियों ने श्रद्धालुओं के बीच अपार उत्साह पैदा किया। जितने उत्साहित नागा साधु थे, उतने ही श्रद्धालु भी उनकी हर गतिविधि को देख मंत्रमुग्ध हो गए।स्नान के दौरान भी नागा साधुओं का अंदाज निराला था। त्रिवेणी संगम में उन्होंने पूरे जोश के साथ प्रवेश किया और बर्फ के समान पानी के साथ ऐसे अठखेलियां कीं जैसे वो गुनगुने पानी में उतरे हों। इस दौरान सभी नागा आपस में मस्ती करते नजर आए। इस दौरान उन्होंने मीडिया के साथ भी अठखेलियां कीं और कैमरामैन पर पानी छिड़क दिया।
महिला नागा संन्यासी भी जुटीं
प्रयागराज। पुरुष नागा साधुओं के साथ ही महिला नागा संन्यासियों की भी बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। पुरुष नागाओं की तरह ही महिला नागा संन्यासी भी उसी ढंग से तप और योग में लीन रहती हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि ये गेरुआ वस्त्र धारत करती हैं उसमें भी ये बिना सिलाया वस्त्र धारण करती हैं। उन्हें भी परिवार से अलग होना पड़ता है। खुद के साथ परिवार के लोगों का पिंड दान करना होता है तब जाकर महिला नागा संन्यासी बन पाती हैं। जब एक बार महिला नागा संन्यासी बन जाती हैं तो उनका लक्ष्य धर्म की रक्षा, सनातन की रक्षा करना होता है। इस महाकुम्भ में हर कोई इनके बारे में जानने को उत्सुक नजर आ रहा है।
महिला नागा संन्यासी भी जुटीं
पुरुष नागा साधुओं के साथ ही महिला नागा संन्यासियों की भी बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। पुरुष नागाओं की तरह ही महिला नागा संन्यासी भी उसी ढंग से तप और योग में लीन रहती हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि ये गेरुआ वस्त्र धारत करती हैं उसमें भी ये बिना सिलाया वस्त्र धारण करती हैं। उन्हें भी परिवार से अलग होना पड़ता है। खुद के साथ परिवार के लोगों का पिंड दान करना होता है तब जाकर महिला नागा संन्यासी बन पाती हैं।
मकर संक्रांति पर 2.50 करोड़ से अधिक लोगों ने लगाई डुबकी


महाकुम्भ के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति पर मंगलवार को सुबह से दोपहर तक 13 अखाड़ों के साधु संतों ने बारी-बारी अमृत स्नान किया। मेला प्रशासन के मुताबिक, अपराह्न तीन बजे तक 2.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई। अखाड़ों के अमृत स्नान में सबसे पहले सन्यासी अखाड़ों में पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और शंभू पंचायती अटल अखाड़ा के साधु संतों ने हर हर महादेव’ के घोष के साथ संगम पर अमृत स्नान किया। अमृत स्नान के उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर चेतनगिरी जी महाराज ने कहा कि हर 12 साल में पूर्ण कुंभ प्रयागराज में होता है और 12 पूर्ण कुंभ होने पर 144 साल बाद यह महाकुंभ आता है। बहुत भाग्यशाली लोगों को महाकुंभ में स्नान का अवसर मिलता है। महानिर्वाणी अखाड़े से 68 महामंडलेश्वर और हजारों साधु संतों ने अमृत स्नान किया।
यदि आप भी जा रहे हैं महाकुंभ, तो इन नंबरों को रखें संभाल कर कोई भी परेशानी हो तो तुरंत करें संपर्क
महाकुंभ 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब तो है ही, साथ ही इस विशाल आयोजन के बीच कई स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधित चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। खासकर कड़ाके की ठंड में, जहां करोड़ों श्रद्धालु डुबकी लगा रहे हैं, वहीं कई लोग स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार हो चुके हैं। यदि आप महाकुंभ में किसी समस्या का सामना करते हैं, तो निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबरों और सुविधाओं से मदद ले सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाः1920
पुलिस सहायताः 112
रेलवे से मददः 18004199139
श्रद्धा के आगे हाड़ कंपाती ठंड बनी खिलौना
तीर्थराज प्रयागराज में जब उजाले की एक किरण तक नहीं निकली थी, हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच मकर संक्रांति के पावन पर्व पर महाकुम्भ नगर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अमृत स्नान के लिए देश-विदेश से करोड़ों लोग गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर पहुंचे। पवित्र स्नान का यह दृश्य भारतीय संस्कृति और परंपरा की गहराई को दर्शाता नजर आ रहा था।
महाकुंभ में बीमार पड़े हजारों संत और नेता की हार्ट अटैक से मौत


प्रयागराज में महाकुंभ के पहले दिन सर्दी और शीतलहर के कारण हजारों श्रद्धालु बीमार हो गए। 1३ जनवरी को मेला क्षेत्र के केंद्रीय अस्पताल और अन्य ओपीडी में 3000 से अधिक मरीज पहुंचे। इस दौरान, 85 वर्षीय अर्जुन गिरि नामक संत की हार्ट अटैक से मौत हो गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके अलावा, महाराष्ट्र के सोलापुर के पूर्व महापौर महेश कोठे की भी निधन हो गया। शाही स्नान के बाद ठंड के कारण उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके कारण उनकी मौत हो गई।
केंद्रीय अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर मनोज कौशिक ने बताया कि 3104 मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जिनमें से 37 गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया गया। मेला क्षेत्र के झूंसी और अरैल क्षेत्रों से भी कई मरीज एसआरएन अस्पताल में रेफर किए गए। यहां 24 मरीज आए, जिनमें से 12 को भर्ती किया गया और बाकी को इलाज के बाद घर भेज दिया गया।
आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की अगुवाई में किन्नर अखाड़े के सदस्यों ने किया अमृत स्नान


महाकुम्भ 2025 के पहले अमृत स्नान के पावन अवसर पर किन्नर अखाड़ा आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की अगुवाई में किन्नर अखाड़े के सभी सदस्यों ने दोपहर में संगम नोज पहुंचकर अमृत स्नान किया। महासंक्रांति के पर्व पर किन्नर अखाड़े ने समाज के कल्याण और उन्नति की कामना की। किन्नर अखाड़े के सदस्य हर हर महादेव का नारे लगाते हुए संगम की ओर बढ़े। बीच में छत्र के नीचे आचार्य महामंडलेश्वर चल रहे थे और उनके साथ अखाड़े के अन्य महामंडलेश्वर उपस्थित थे।


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