कोरिया/सूरजपुर@साउथ की पुष्पा 2 लोगों को बहुत पसंद आ रही है जो चंदन लकड़ी के तस्करी पर बनी है…क्या सूरजपुर कोरिया में पुष्पा 3 यूकोलिपिस के तस्करी पर बनेगी?

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-शमरोज खान-
कोरिया/सूरजपुर,08 जनवरी 2025 (घटती-घटना)। पुष्पा के बाद पुष्पा 2 मूवी सामने आई है जो साउथ की मूवी है और लोगों को काफी पसंद आ रही है, यह मूवी चंदन की लकड़ी की तस्करी पर बनी हुई है, पर वही इस समय सरगुजा का सूरजपुर कोरिया यूकेलिप्टस की तस्करी पर पुष्प 3 जैसी मूवी बनाने की ओर अग्रेषित है, बस एक लेखक चाहिए यूकेलिप्टस पर पुष्प 3 लिखने के लिए, यदि कोई अच्छा लेखक मिल गया तो छत्तीसगढ़ में पुष्पा 3 मूवी यूकेलिप्टस की तस्करी पर बनाया जा सकता है, जिस पर यह बताया जा सकता है कि प्रशासन कितना निरंकुश है, जिसकी वजह से बिना रोक-टोक यूकेलिप्टस की लकड़ी की तस्करी हो रही है चाहे वह लकड़ी फॉरेस्ट लैंड पर हो या फिर किसी की निजी जमीन पर तस्करों की आंख पर दिखी कि वह लकड़ी काटी।
ज्ञात होकी नीलगिरी या यूकेलिप्टस के पेड़ पर्यावरण के लिए हानिकारक है क्योंकि यह पेड़ 18
20 गुना वाष्पोत्सर्जन करता हैं इससे सूखा पढ़ने की स्थिति उत्पन्न होती है, साथ ही इसके पोशाक जहरीले होने की वजह से मिट्टी के पोषक तत्व को खींचकर बंजर बना देती है जिस वजह से इस पेड़ को पर्यावरण के हिसाब से हानिकारक माना जाता है यही वजह है कि इस पेड़ की कटाई पर कोई भी रोक नहीं है, पर यदि रोक है तो वह रोक है अपने पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति लेने की,यह अनुमति इसलिए ली जाती है क्योंकि पेड़ को बेचने में आसानी हो सके,पेड़ की कटाई के लिए अनुमति जरूरी नहीं है पर पेड़ को बेचने के लिए अनुमति होती है, इस समय सूरजपुर जिले के हर गांव तक यूकेलिप्टस पेड़ की अंधाधुंध कटाई हो रही है और यह पेड़ दूसरे राज्यों में तस्करों द्वारा भेजे जा रहे हैं, यदि कहा जाए तो औने पौने रेट में तस्कर इस पेड़ को काटकर अच्छे दामों पर बाहर बेच रहे हैं, निजी जमीन पर लगे यूकेलिप्टस के पेड़ तो काटे जा ही रहे हैं, साथ ही शासकीय जमीन पर भी लगे यूकेलिप्टस के पेड़ को काटकर तस्कर बेच दे रहे हैं, पर सवाल यह उठता है कि क्या यूको लिफ्ट्स जो शासकीय जमीन पर लगे हुए हैं जिसे लगाने के लिए शासन ने काफी पैसे खर्च किए हैं उस पेड़ को भी वह फ्री में काट कर ले जा रहे हैं, जबकि वह पेड़ अच्छे दामों पर बाहर बेचे जा रहे हैं क्या उस पेड़ की कटाई का पैसा सरकार के खजाने में नहीं जाना चाहिए?
क्या यह नियम विरुद्ध तरीके से तस्करी नहीं माना जाएगा?
यूकेलिप्टस के पेड़ कटवाने के लिए दो जिले के रसूखदार व्यक्ति अपने मुनाफे के लिए हुए लकड़ी माफिया के साथ शामिल
यूकेलिप्टस के पेड़ो की कटाई के लिए सुरजपुर जिले के दो रसूखदार एक साथ अन्य राज्य से आए लकड़ी माफिया के साथ शामिल हुए हैं और उसके साथ मिलकर जिले के यूकेलिप्टस साथ ही उसकी ही आड़ में अन्य पेड़ों की कटाई और उसकी लड़की को अन्य राज्यों को सप्लाई कर रहे हैं और अपना मुनाफा बना रहे हैं। केवल मुनाफे के लिए नियम कायदों को वह दरकिनार कर रहे हैं और लगातार सूरजपुर जिले से यूकेलिप्टस के पेड़ो की कटाई जारी है।
आपदा में अवसर की तरह यूकेलिप्टस पेड़ की हो रही कटाई?
यूकेलिप्टस पेड़ की कटाई आपदा में अवसर जैसी हो गई है क्योंकि जब से यह बात पता चली है कि यूकेलिप्टस का पेड़ पर्यावरण के लिए हानिकारक है, पर इस पेड़ की कीमत आज भी है जो इसे दूसरे राज्यों में बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है, और कमाई के लिए ही इस समय सूरजपुर जिले में यूकेलिप्टस के पेड़ की कटाई भी तस्करों द्वारा की जा रही है, बस उनके लिए यह बात आसान हो गया है की कटाई में कोई प्रतिबंध नहीं है, पर शायद उन्हें यह नहीं पता है कि बेचने व बाहर ले जाने के लिए अनुमति होनी आवश्यक है, इस लकड़ी की तस्करी में कहीं ना कहीं शासन भी तस्करों के साथ है, क्योंकि जिस प्रकार से इस लकड़ी की कटाई तस्कर अपने मुनाफा के लिए कर रहे हैं और अच्छा खासा मुनाफा पा रहे हैं, यही वजह है कि दूसरे राज्यों से बुलाकर लकड़ी काटने व ढोने वाले ले जाने वाले को लकड़ी माफिया ने टेंडर दे रखा है। पर मुनाफा तस्कर कमा रहे हैं नुकसान जिले का हो रहा है यहां तक की पेड़ लगाकर बड़े करने वाले को भी इसका भारी भरकम नुकसान हो रहा है, निजी जमीनों के पेड़ तो काटे ही जा रहे हैं जो पेड़ सरकारी खर्चे पर लगाए गए थे उन पेड़ों को भी निशुल्क काटकर लकड़ी माफिया अपना जेब भर रहे हैं।
बिना नंबर प्लेट बिना नियम कायदों की डाला बॉडी वाली ट्रैक्टरों से हो रहा लकडि़यों का परिवहन,कौन करेगा कार्यवाही?
लकडि़यों का परिवहन जिन ट्रैक्टरों से हो रहा है वह अन्य राज्यों की ट्रेक्टर हैं। ट्रैक्टरों में न तो इंजन का नम्बर है न ही डाला बॉडी का नंबर है। डाला बॉडी का बनावट भी नियम कायदों के विपरीत है जो शायद परिवहन और यातायात विभाग के लिए कार्यवाही का कारण बनना चाहिए। क्षेत्र के जिले के वाहनों पर कार्यवाही करने वाले यातयात विभाग परिवहन विभाग के कर्मचारियों की निगाह इन ट्रैक्टरों पर क्यों नहीं पड़ रही है यह भी सवाल है। इन ट्रैक्टरों पर कौन कार्यवाही करेगा ओवरलोड पर कौन एक्शन लेगा और कौन इनके कागज की जांच करेगा यह भी प्रश्न है। इन ट्रैक्टरों की गति और भार ढोने की क्षमता कितनी होनी चाहिए और कितनी ढोकर यह ला ले जा रहे हैं इसकी जांच कौन करेगा यह भी देखने वाली बात होगी।
पर्यावरण के लिए नुकसान पर यूकेलिप्टस का पेड़ तस्करों के लिए मुनाफे वाला
यूकेलिप्टस का पेड़ पर्यावरण खासकर भू जल स्रोत के लिए सही नहीं माना जाता। यूकेलिप्टस का पेड़ भू जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाता है यह सही भी है लेकिन यूकेलिप्टस का पेड़ फिर भी बड़े पैमाने पर लगाया जाता है।कोरिया जिले सहित सूरजपुर जिले में काफी तादाद में यह वृक्ष लगा हुआ था जो अब लकड़ी तस्करों के लिए मुनाफे का कारण बन रहा है। अब लकड़ी तस्कर जो बाहरी हैं वह खुलेआम इसको काट रहे हैं और अन्य राज्यों को भेज रहे हैं।
1 महीने में लगभग सूरजपुर जिले में हजारों की संख्या में काटे गए होंगे यूकेलिप्टस के पेड़
जबसे सूरजपुर जिले में यूकेलिप्टस के पेड़ की कटाई जारी है और उनका जिले से बाहर अन्य राज्यों को भी भेजा जाना जारी है। इस दौरान हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं। तस्कर निश्चिंत और बेफिक्र है क्योंकि उसे मिला संरक्षण काफी पहुंचा संरक्षण है। संरक्षण देने वाला उन्हें हर जायज गैरजायज की अनुमति दे रहा है जिसके बाद वह निडर होकर बेफिक्र होकर लकड़ी की कटाई बड़े स्तर ओर कर रहे हैं उन्हें बिना नियम कायदों का सड़क नियमों के वाहन नियमों के पालन के किए बिना बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टरों के ढोकर एक जगह इक्कठा करके अन्य राज्यों को भेज रहे हैं।


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