बैकुण्ठपुर,@कोरिया नवीन भाजपा जिलाध्यक्ष व स्थानीय विधायककी तकरार से बिगड़ेगा पार्टी के भीतर का सामंजस्य?

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रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,08 जनवरी 2025 (घटती-घटना)। पूरे प्रदेश के लगभग सभी जिलों के भाजपा जिलाध्यक्ष बदल दिए गए, इसी क्रम में कोरिया के भी जिलाध्यक्ष का बदलाव हो गया, बदलाव के बाद यदि कोई समस्या उत्पन्न हो गई है तो वह है स्थानीय विधायक व नवीन जिलाध्यक्ष के बीच के पूर्व से चल रहे तकरार को लेकर, इस तकरार के बीच कैसे चलेगा कोरिया जिले का भाजपा संगठन व साा इसे लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं, वहीं विधायक समर्थक नवीन जिलाध्यक्ष के साथ कैसे तालमेल बैठाएंगे यह भी अब उनके जेहन में चल रहा है, स्थिति यह है कि विधायक को कहीं बुरा ना लगे इसलिए समर्थक नवीन जिलाध्यक्ष तक पहुंच नहीं रहे हैं, वही विधायक की नाराजगी अभी भी देखी जा रही है क्योंकि उन्होंने अभी तक नवीन जिलाध्यक्ष को स्वीकार नहीं किया है, क्योंकि अभी तक उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से नवीन जिलाध्यक्ष भाजपा कोरिया के लिए बधाई भी नहीं आई है, जिसे लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है वही ऐसे में नवीन जिलाध्यक्ष कैसे अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे और सत्ता के साथ कैसे तालमेल बिना संगठन के आगे बढ़ाएंगे? यह उनके लिए बड़ी चुनौती हो गई है। भले ही उन्हें संगठन से बड़ा दायित्व मिला है पर सत्ता के साथ इस दायित्व को निभाना उनके लिए कड़ी चुनौती होगी अब ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि नवीन जिलाध्यक्ष कोरिया भाजपा एवं स्थानीय विधायक के बीच के तकरार को खत्म कौन करेगा कहा जाए तो बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा?
नवीन जिलाध्यक्ष व स्थानी विधायक की तकरार काफी पुरानी है क्या अब खत्म होगी या फिर आगे भी चलती रहेगी?
नवीन जिलाध्यक्ष भाजपा कोरिया और स्थानीय विधायक बैकुंठपुर की आपसी तकरार आज की नहीं है।विधायक जब मंत्री थे तबसे यह तकरार है और तब वर्तमान में जिलाध्यक्ष बनाए गए देवेंद्र तिवारी विधायक साथ ही मंत्री से खुद को अलग ही लेकर चलते थे या यह कहें खुद विधायक साथ ही तत्कालीन मंत्री भी उन्हें अपने मंचों पर पसंद नहीं करते थे जिसकी कई बानगी देखने को मिला करती थी।अब विधायक पुनः वही हैं जो मंत्री थे कभी लेकिन अब देवेंद्र तिवारी जिला संगठन मुखिया हो गए हैं और न चाहकर भी विधायक को आगे चलकर मंच साझा करना होगा। अब कैसे यह होगा कैसे दोनों एक मंच पर होंगे यह देखने वाली बात होगी वैसे क्या ऐसा होगा भी दोनों एक मंच पर आयेगे यह देखने वाली बात होगी।क्या तकरार जाएगी यह भी आगे पता चलेगा।
नवीन जिलाध्यक्ष व स्थानीय विधायक की तकरार जारी रही तो क्या होगा नुकसान?
भाजपा के नए जिलाध्यक्ष सहित स्थानीय विधायक की आपसी तकरार यदि चलती रही तो क्या होगा भाजपा को कोरिया जिले में नुकसान यह भी अब विचारणीय है।वैसे यह तो तय है कि तकरार खत्म करना होगा वरना पार्टी को खामियाजा भुगतना होगा क्योंकि निकाय चुनाव त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सामने हैं और पार्टी को प्रत्याशी चयन करना है उन्हें जीत दिलानी है और इस बीच सामंजस्य के बिना सत्ता संगठन यह संभव नहीं हो सकता।
पूर्व जिलाध्यक्ष के हटने पर कार्यकर्ताओं में तो खुशी है पर समस्या है विधायक समर्थकों के साथ
पूर्व जिलाध्यक्ष का कार्यकाल कैसा था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके निवर्तमान होने पर ज्यादा उदासी कार्यकर्ताओं में नजर नहीं आई बशर्ते कार्यकर्ता खुश नजर आए। वैसे नए जिलाध्यक्ष के मनोनयन के बाद कुछ भाजपाई खुश नजर आए कुछ नहीं जिसका कारण विधायक समर्थक या उनका खास होना था और विधायक समर्थक या उनके खास लोग खुश नहीं हुए और यह समस्या उनकी देखने को मिली कि वह हंसे या रोएं।वैसे उत्साहित सभी हैं पूर्व जिलाध्यक्ष के हटने से लेकिन विधायक के खास लोगों को मलाल है कि उनके विधायक की मंशा से जिलाध्यक्ष नहीं बन सका।
बैकुंठपुर विधायक के करीबी भाजपाइयों ने देवेंद्र तिवारी को नहीं दी सोशल माडिया पर बधाई
बैकुंठपुर विधायक के करीबी माने जाने वाले भाजपाइयों के द्वारा देवेंद्र तिवारी को जिलाध्यक्ष भाजपा कोरिया बनने पर बधाई नहीं दी गई सोशल मीडिया में। विधायक समर्थक एवम करीबियों ने व्यक्तिगत बधाई देकर अपना फर्ज पूरा किया और वह चलते बने। देवेंद्र तिवारी का जिलाध्यक्ष बनना ऐसा कुछ हुआ विधायक समर्थकों करीबियों के लिए की वह खुश होने का प्रयास भी नहीं कर सकते। विधायक समर्थकों करीबियों का बधाई देने से बचने के पीछे का कारण था विधायक की नाराजगी उन्हें न झेलना पड़े।
जिलाध्यक्ष विधायक खेमे का होगा यह सोचकर मनोनयन के दौरान पहुंचे थे कुछ विधायक समर्थक
जिलाध्यक्ष के मनोनयन के दौरान विधायक समर्थक उनके करीबी यह सोचकर पहुंचे थे कि विधायक खेमे का अध्यक्ष मनोनीत होगा लेकिन हुआ उल्टा। जिलाध्यक्ष के रूप में मनोनयन ऐसे व्यक्ति का कोरिया जिले के लिए हो गया जिससे विधायक का छाीस का आंकड़ा हमेशा रहा है। विधायक समर्थक उनके करीबी मनोनयन के बाद चलते बने और उन्हें मायूस देखा गया। बताया जा रहा है कि विधायक समर्थक करीबी भाजपाई काफी गंभीर नजर आए और वह बधाई देने जाएं न जाएं उन्हें यह सोचते देखा गया।
ब्राह्मण समाज के लोगों ने पार्टी लाइन से हटकर भाजपा कार्यालय पहुंचकर बधाई दी
ब्राह्मण समाज के लोगों को बधाई देने के दौरान काफी उत्साहित देखा गया। कई लोगों ने पार्टी लाइन का त्याग किया और अन्य दलों से होने के बावजूद उन्होंने भाजपा कार्यालय पहुंचकर देवेंद्र तिवारी को जिलाध्यक्ष बनने की बधाई दी। कई अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया पर भी बधाई दी। ब्राह्मण समाज के लोगों की यह एकजुटता राजनीतिक द्वेष रखने वाले लोगों के लिए एक सीख हो सकती है जो राजनीति के कारण अच्छे संबंध खराब करने से भी नहीं पीछे हटते उन्हें यह सीखना चाहिए कि कैसे समाज से किसी के आगे बढ़ने पर उसे प्रोत्साहित करने की जरूरत होती है। वैसे समाज से ऐसे भी लोग बधाई देते नजर आए जो कभी किसी राजनीतिक दल के प्रति खासकर जहां वह पद पर हैं वहां भी विश्वासपात्र नहीं रहे और जिन्हें अवसरवादी कहना ही ज्यादा उचित होगा। ऐसे लोगों की उपस्थिति और बधाई को लोगों ने व्यर्थ बताया और इसे केवल स्वार्थसिद्धि का एक तरीका माना।
कर्मचारियों ने भी बधाई देने में दिखाई उत्सुकता,पहुंचे कई कर्मचारी दी बधाई
कर्मचारियों के द्वारा भी देवेंद्र तिवारी को बधाई दी गई। कई कर्मचारियों ने मनोनयन के तत्काल बाद पहुंचकर बधाई दी और तनिक भी विलंब करना उचित नहीं समझा वहीं कुछ ने समूह में भी घर जाकर देर शाम बधाई दी और देवेंद्र तिवारी से मुलाकात की। देवेंद्र तिवारी को कर्मचारियों में से कुछ ऐसे गुटों की भी बधाई मिली जो विधायक के खिलाफत वाले गुट हैं और उनके चुनावों में उनके विरूद्ध जिनके काम करने का कोई उदाहरण मौजूद है। कुल मिलाकर विधायक के विरोधी कर्मचारी गुटों को इस दौरान उत्साहित देखा गया क्योंकि विरोध करने की वजह से चुनाव में विधायक उन्हें भाव देते नहीं थे वहीं अब जिलाध्यक्ष से उन्हें बेहतर उम्मीद होगी। वैसे यह गुट ज्यादा प्रभावशाली है ऐसा नहीं है बस यह आजकल कर्मचारी समूह होकर भी खुलेआम राजनीति करता नजर आता है विरोध प्रदर्शन में कई सरकार के ही निर्णय का यह विरोध करता है।
मेरा पानी उतरता देखकर किनारे पर घर न बसा लेना मै समुद्र हूं लौटकर आऊंगा जैसी बातें लिखकर भी देवेंद्र तिवारी समर्थकों ने विधायक को चिढ़ाया
देवेंद्र तिवारी के समर्थकों का उत्साह काफी सिर चढ़कर भी बोल रहा था उनके जिलाध्यक्ष मनोनयन के बाद। कुछ ने विधायक को चिढ़ाने यह भी सोशल मीडिया में लिखने से गुरेज नहीं किया की मैं समुद्र हूं मेरे लौटने का इंतजार करो मेरे जाते ही किनारे पर घर न बसाओ। इस तरह के सोशल मीडिया बयानों के बाद शायद ही विधायक साथ ही नए जिलाध्यक्ष के बीच सामंजस्य स्थापित हो सकेगा। समर्थकों का यह उत्साह और विधायक को चिढ़ाने का प्रयास साा संगठन के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है।


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