- क्या कोरिया जिले के लैपटॉप का उपयोग सुरजपुर जिले में हो रहा है? कोरिया सीएमएचओ कार्यालय एनएचएम शाखा से कई दस्तावेज गायबःसूत्र
- क्या कलेक्टर कोरिया मामले में दर्ज कराएंगी एफआईआर?

-समरोज खान-
बैकुंठपुर,कोरिया,05 जनवरी 2025 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में सीटी स्कैन खरीदी को लेकर भारी भ्रष्टाचार की शिकायत है पर शिकायत जांच तक पहुंच नहीं पा रही है? और अब ऐसे में दस्तावेज गायब होने की जानकारी भी सामने आ रही है सूत्रों का दावा है कि जांच हुई तो सीटी स्कैन मशीन घोटाला सामने आ जाएगा,जिस वजह से घोटाले में शामिल लोग दस्तावेज ही गायब कर चुके हैं,अब दस्तावेज शासन व जिला प्रशासन कैसे ढूंढ पाएगा और कैसे जांच करके कार्यवाही करेगा यह बड़ा प्रश्न बन गया है भले से घोटाला कांग्रेस शासनकाल में हुआ है पर भाजपा शासनकाल में इस घोटाले की कलई कब खुलेगी इसका इंतजार है?
ज्ञात हो की कोरिया जिले में कांग्रेस शासन के कार्यकाल में सीटी स्कैन मशीन की खरीदी की गई, भ्रस्टाचार के आरोप लगे परंतु तत्कालीन सीएमएचओ और तत्कालीन डीपीएम ने दस्तावेज सार्वजनिक नही किए यहां तक सीटी स्कैन खरीदी के दस्तावेजों की मांग आरटीआई से कई बार की गई परंतु दोनो ने मामले पर चुप्पी साधे रखी। वही एनएचएम के कई कार्यक्रमों में खर्च की गई सरकारी राशि के दस्तावेज भी गायब बताए जा रहे है।
सच्चाई सामने आने की बौखलाहट में प्रभारी डीपीएम लगा रहे आरोप,फर्जी डिग्री वाला मान-सम्मान वाला कैसे हो सकता है?
फर्जी डिग्री से नौकरी हथिया कर कोई शासन को चुना लगा रहा है शिक्षित बेरोजगारों के हक को मार रहा है और कलई खुलने पर बौखलाहट में आरोप लगा रहा है। वैसे डिग्री फर्जी है यह आरोप बैकुंठपुर के पार्षद लगा रहे हैं आरोप के साथ वह तथ्य और दस्तावेज प्रस्तुत कर रहे हैं। अब सच सामने आते ही अनर्गल आरोप दूसरे पर लगा रहे हैं डीपीएम प्रभारी सुरजपुर…वैसे कोई फर्जी डिग्री वाला कैसे मान-सम्मान वाला हो सकता है यह विचारणीय है। फर्जी डिग्री वाला केवल मुन्ना भाई ही हो सकता है जो जगजाहिर है।
प्रमाणित खबर लगने पर लगाते हैं… भयादोहन का आरोप
जब कोई प्रमाणित खबर छपती है तथ्यों के साथ छपती है और सत्य के करीब होती है तो प्रभारी डीपीएम प्रिंस साहब तिलमिला जाते हैं और बिना अपने उच्च अधिकारियों से परमिशन लिए पत्रकारों के विरुद्ध शिकायत करते हैं और बताते हैं कि पत्रकार अधिकारियों को भय दिखाकर दोहन करते हैं,अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि कितने अधिकारियों ने आज तक पत्रकारों पर यह आरोप लगाया है कि घटती-घटना के वरिष्ठ पत्रकार ओमकार पांडे ने किसी अधिकारियों के साथ भयादोहन किया हो? दैनिक घटती-घटना के वरिष्ठ पत्रकार सूरजपुर ओमकार पांडे एक बेदाग व बेबाक पत्रकार में अपना नाम शुमार करते है, पर उनके नाम प्रभारी डीपीएम का शिकायत करना किसी भी पत्रकार को रास नहीं आ रहा जल्द ही पत्रकार इसके विरोध में जा सकते हैं। वैसे तो दैनिक घटती-घटना पर आज तक किसी ने यह आरोप भयादोहन का नहीं लगाया है और जो लगाए हैं वह साबित नहीं कर पाए हैं कि उनके साथ भयादोहन कैसे हुआ है और कब हुआ है? इकलौता एक ऐसा छाीसगढ़ में अधिकारी होगा जो शिकायतकर्ता व समाजसेवी बना हुआ है ऐसा लग रहा है कि वह सही है बाकी सब गलत है सरकारी बंदिशें में बंधकर भी वह अपने आप को सुपर अधिकारी कम सुपर नेता समझ रहे हैं?
सीटी स्कैन मशीन खरीदी के दस्तावेज गायब
कांग्रेस सरकार में तत्कालीन सीएमएचओ डॉ आरएस सेंगर और तत्कालीन डीपीएम प्रिंस जायसवाल के द्वारा बिना पारदर्शिता बरते चुपचाप सीटी स्कैन मशीन की खरीदी की गई, परंतु आज तक कौन सी मशीन खरीदी गई है ये किसी को नही बताया,मशीन से जुड़े दस्तावेज कार्यालय से गायब है,डॉ सेंगर और प्रिंस जायसवाल दोनो ने प्रभार दे दिया पर सीटी स्कैन के दस्तावेज नही दिए, मामले में कई आरटीआई मांगी गई परंतु दस्तावेज होंगे तो जानकारी मिलेगी, ऐसे में क्या कलेक्टर कोरिया सीटी स्कैन के दस्तावेज जमा नही करने वाले पर एफआईआर दर्ज कराएंगी यह देखने का विषय होगा।
लैपटॉप कहाँ है?
कांग्रेस सरकार में तत्कालीन सीएमएचओ डॉ आरएस सेंगर और तत्कालीन डीपीएम प्रिंस जायसवाल के द्वारा काफी संख्या में लैपटॉप खरीदे गए, इनकी खरीदी में बड़ा गड़बड़झाला की चर्चा आम है, वही लैपटॉप भौतिक रूप से कहा किसके पास है इसका हिसाब कोई नही जानता है,सूत्र बता रहे है कि तत्कालीन डीपीएम अब तक कोरिया जिले के लैपटॉप का प्रयोग कर रहे है, एक साल से ज्यादा हो गया सुरजपुर पदभार संभाले पर उन्होंने अभी तक कोरिया के लैपटॉप वापस लौटना मुनासिब नही समझा है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर लैपटॉप विभागीय था या फिर प्रभारी डीपीएम का पर्सनल था जिस वह अपने साथ लेते गए? क्या शासन ने सरकारी पैसा खर्च करके कोरिया के तत्कालीन डीपीएम को उनके निजी उपयोग के लिए लैपटॉप दिया था?
एनएचएम के कई दस्तावेज गायब
अगस्त 2024 में तत्कालीन सीएमएचओ डॉ आरएस सेंगर से स्वास्थ्य विभाग का कार्यालय मुक्त हुआ, परंतु एनएचएम के दर्जनों कार्यक्रम में 2022 से 2024 तक खर्च के दस्तावेजों का अता पता नही है,सूत्र बताते है कि तत्कालीन सीएमएचओ, तत्कालीन डीपीएम और एक एनएचएम का बाबू कमरा बन्द करके वित्तीय अनियमितता करने में जुटे रहते थे, सूत्र यह भी बताते है तीनो ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में खर्च करने के नियमो को फाड़ के फेंक कर राशि व्यय कर डाली, अब कई राष्ट्रीय कार्यक्रमो में खर्च की राशि के दस्तावेज कार्यालय से गायब है, एनएचएम के तहत तमाम तरह की खरीदी के दस्तावेजों की जानकारी आरटीआई के तहत दी ही नही जा रही है। यदि 2022 से 2024 मार्च तक एनएचएम के तहत मील बजट की निष्पक्ष जांच हो तो कई वित्तीय अनियमितता सामने आ सकती है।